
मार्कण्डेय पाण्डेय, लखनऊ, अमृत विचार: दुनिया भर में पर्यावरण के लिए खतरा बने प्लास्टिक का विकल्प बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक ने ढूंढ लिया है। वैज्ञानिक डॉ. रवि गुप्ता बैक्टीरिया और गाय के गोबर से ऐसे बायोप्लास्टिक का निर्माण किया है जो 4050 वर्ष में नष्ट होकर प्रकृति के साथ घुलमिल जाएगी, जबकि प्लास्टिक हजारों वर्ष तक नष्ट नहीं होती है। हालत ये है कि महासागरों में खड़े हो रहे प्लास्टिक के मल्टीलेयर पैच जलीय जीवों को नष्ट कर रहे हैं। इस प्लास्टिक के निर्माण की प्रक्रिया ग्लोबल वार्मिंग को भी बढ़ावा दे रही है। बायोप्लास्टिक के लिए बीबीएयू के इस वैज्ञानिक को 20 वर्षो का पेटेंट भी मिल गया है।
डॉ. रवि गुप्ता ने बताया कि प्लास्टिक जैसे गुणों वाले बायोडिग्रेडेबल पदार्थ गन्ना, मक्का, गेहूं, चावल और केले के छिलके आदि बायोमास से तैयार किया गया है। ऐसे गुण सूक्ष्मजीवों द्वारा संश्लेषित पॉलीहाइड्रॉक्सी ब्यूटिरेट में भी मौजूद हैं। बैक्टीरिया और गाय के गोबर का उपयोग करके कम लागत वाले बायोप्लास्टिक का निर्माण किया गया है। इससे प्लास्टिक की वस्तुओं, बोतल, पॉलीबैग आदि किसी भी सामान का निर्माण किया जा सकता है। पीएचबी उत्पादन को सस्ता करने के लिए गाय के गोबर से बैक्टीरिया विकसित किया गया है। इस विधि से बायोप्लास्टिक उत्पादन की लागत को व्यावसायिक रूप से उपलब्ध पीएचबी की तुलना में लगभग 200 गुना कम कर दिया है। बायोडिग्रेडेबल का उपयोग गैर विषाक्त घाव भरने वाले ड्रेसिंग पैच, तेजी से ऊतक और हड्डी के उत्थान और विभिन्न पशु संक्रमण मॉडल में दवा यौगिकों की नैनोडिलीवरी के विकास के लिए पीएचबी की नैनोशीट भी बना रहे हैं।
पेट्रोलियम प्लास्टिक से बनता है प्लास्टिक
पेट्रोलियम आधारित सिंथेटिक प्लास्टिक आजकल हर चीज में उपयोग होने लगा है। जिसके कारण गैर अपघटनीय अपशिष्ट पदार्थ जमा हो जाते हैं जो हजारों वर्षों तक पर्यावरण में रहते हैं। पृथ्वी पर कई प्रजातियां प्लास्टिक प्रदूषण से पीड़ित हैं और यह ग्लोबल वार्मिंग के प्रमुख कारणों में से एक है।
घरेलू सामग्री से बन जाएगी बायोप्लास्टिक
प्लास्टिक कचरा हजारों वर्ष तक नष्ट नहीं होता और जलाने पर रासायनिक जहरीली गैसें वातावरण को जहरीला बनाती है। बायोमास से बनाए गए पदार्थो में वांछनीय गुण सूक्ष्मजीवों द्वारा संश्लेषित पॉलीहाइड्रॉक्सी ब्यूटिरेट में भी मौजूद हैं।
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