
तमिलनाडु की राजनीति में मंगलवार को उस समय बड़ा भूचाल आ गया, जब पुलिस ने राज्य के पूर्व उपमुख्यमंत्री और मौजूदा नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन को तड़के उनके घर से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे में मद्रास हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद बड़ा मोड़ आया। अदालत के स्पष्ट निर्देशों के आधार पर पुलिस को महज 4 घंटे की पूछताछ के बाद उन्हें स्टेशन बेल पर छोड़ना पड़ा।
मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु पुलिस को सख्त हिदायत दी कि पूछताछ पूरी होते ही नेता प्रतिपक्ष को रिहा किया जाए। इसके साथ ही अदालत ने उदयनिधि स्टालिन को भी निर्देश दिया है कि वे भविष्य में जांच प्रक्रिया में पूरी तरह सहयोग करेंगे। इससे पहले, सुनवाई के दौरान तमिलनाडु के एडवोकेट जनरल विजय नारायण ने पीठ को आश्वस्त किया था कि राज्य पुलिस का उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का कोई इरादा नहीं है और प्रक्रिया के अनुसार पूछताछ पूरी होते ही उन्हें ज़मानत दे दी जाएगी।
तड़के घर पहुंची पुलिस और गिरफ्तारी का ड्रामा
मंगलवार सुबह जब पुलिस की एक विशेष टीम चेन्नई के नीलांकरई स्थित उदयनिधि स्टालिन के निजी आवास पर पहुंची, तो वहां अचानक अफरा-तफरी का माहौल बन गया। जब पुलिस अधिकारियों ने उन्हें तुरंत हिरासत में लेने की बात कही, तो उनकी पत्नी ने गेट पर आकर कहा, “वे टॉयलेट में हैं, कृपया थोड़ा इंतजार कीजिए।” हालांकि, पुलिस ने कोई ढील न देते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया। पुलिस वाहन में बैठते समय भी उदयनिधि के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने बेबाकी से सवाल दागा, “क्या मैंने कुछ गलत कहा है?” यानी उन्होंने अपने बयान को आपत्तिजनक मानने से पूरी तरह इंकार कर दिया।
कावेरी रैली में अभिनेत्री तृषा पर आपत्तिजनक टिप्पणी का आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत सोमवार 3 अगस्त 2026 को तंजावुर में पनागल बिल्डिंग के पास हुई। वहां कावेरी जल विवाद और किसानों की समस्याओं को लेकर द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) की ओर से एक विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था। मंच से भाषण देते समय जब उदयनिधि मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे, तब भीड़ में मौजूद कुछ समर्थकों ने तमिल सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री तृषा कृष्णन का नाम लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। आरोपों के अनुसार, नारे सुनकर उदयनिधि रुके और उन्होंने अभिनेत्री के संदर्भ में एक अश्लील व द्विअर्थी (डबल मीनिंग) टिप्पणी कर दी।
तृषा, मुख्यमंत्री विजय की पुरानी सह-कलाकार रही हैं और सोशल मीडिया पर उनकी निकटता को लेकर अक्सर चर्चाएं चलती रहती हैं। जैसे ही इस घटना का 2 मिनट 39 सेकंड का वीडियो इंटरनेट पर प्रसारित हुआ, राज्य में राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया।
TVK और राष्ट्रीय महिला आयोग का कड़ा रुख
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सत्तारूढ़ पार्टी ‘तमिझागा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने इस बयान पर बेहद आक्रामक रुख अपनाया। टीवीके ने न केवल तंजावुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, बल्कि राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में भी औपचारिक याचिका दायर की। पार्टी के वरिष्ठ नेता अमेरिकाई नारायणन ने मीडिया से बातचीत में तीखा हमला बोलते हुए कहा “उन्हें उदयनिधि नहीं, बल्कि अपना नाम बदलकर ‘वल्गर-निधि’ रख लेना चाहिए। यह गिरफ्तारी किसी राजनीतिक दुर्भावना के कारण नहीं हुई है, बल्कि इसलिए हुई है क्योंकि उन्होंने तमिलनाडु की नारियों का अपमान किया है।”
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिलाओं के उत्पीड़न से जुड़ी धाराओं और आईटी एक्ट के तहत एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली, जिसके बाद तड़के यह गिरफ्तारी हुई।
उदयनिधि का पलटवार
पुलिस कस्टडी में लिए जाने के दौरान उदयनिधि स्टालिन का तेवर काफी हमलावर रहा। उन्होंने विजय सरकार पर तीखा जुबानी हमला बोलते हुए कहा कि कावेरी जल संकट और किसानों की वास्तविक समस्याओं से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह पूरी पटकथा रची गई है। उदयनिधि ने आरोप लगाया कि उनके भाषण की एडिटेड और फर्जी वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही है। राजनीतिक रंजिश के सवाल पर उन्होंने कहा “मुझे नहीं लगता कि उनके पास इसे राजनीतिक मुद्दा बनाने जितना दिमाग है। वे बेवकूफों का झुंड हैं। मैं इस तरह के फर्जी मुकदमों से डरने वाला नहीं हूं और हर परिणाम का सामना करने को तैयार हूं।”
तमिलनाडु का राजनीतिक इतिहास
तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के साथ ही बड़े नेताओं की गिरफ्तारियां कोई नई बात नहीं रही हैं। राज्य के सियासी पन्नों में ऐसी कई हाई-प्रोफाइल घटनाएं दर्ज हैं:
1996: कलर टीवी घोटाले के आरोप में तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री जे. जयललिता को जेल जाना पड़ा था।
2001: जयललिता सरकार ने आधी रात को धावा बोलकर पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि को उनके घर से गिरफ्तार करवाया था।
2026: अब कावेरी रैली के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन की गिरफ्तारी दर्ज हुई।
विजय सरकार ने दिया कड़ा संदेश
इससे पहले जब राज्य में डीएमके की सरकार थी और एम.के. स्टालिन मुख्यमंत्री थे, तब उदयनिधि के बयानों पर अक्सर कानूनी कार्रवाई नहीं हो पाती थी। चाहे सनातन धर्म पर दिया गया विवादित बयान हो या हिंदी भाषा को लेकर की गई टिप्पणियां, वे कानूनी औपचारिकताओं के बीच से निकल जाते थे। लेकिन वर्ष 2026 में तमिलनाडु के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। अब तमिल सिनेमा के सुपरस्टार से राजनेता बने सी. जोसेफ विजय राज्य के मुख्यमंत्री हैं और स्टालिन परिवार की तीसरी पीढ़ी के नेता उदयनिधि विपक्ष में हैं।
चेन्गलपट्टू कोर्ट के पुराने वाकयों से लेकर विधानसभा के भीतर व्यक्तिगत छींटाकशी तक, दोनों नेताओं के बीच कड़वाहट लगातार बढ़ रही थी। लेकिन तृषा पर की गई टिप्पणी ने इस सीमा को लांघ दिया। मुख्यमंत्री विजय ने महज 24 घंटे के भीतर सख्त पुलिस कार्रवाई करवाकर यह साफ संदेश दे दिया है कि नई सरकार में व्यक्तिगत आक्षेपों और महिला सम्मान से खिलवाड़ को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।



