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रात का सफर था, ट्रेन अपनी रफ्तार से गाजियाबाद से गोरखपुर की ओर बढ़ रही थी। डिब्बे में सैकड़ों यात्री सवार थे — कोई मोबाइल में डूबा था, कोई नींद के आगोश में, तो कोई खिड़की से बाहर अंधेरे में झांक रहा था। इसी भीड़ में एक कोने में बैठी थी एक अकेली लड़की, जो अपनी मंजिल तक पहुंचने का सपना लिए यात्रा कर रही थी।
लेकिन उसे नहीं पता था कि यह सफर उसकी जिंदगी की सबसे डरावनी रात बनने वाला है।
शुरुआत एक नजर से हुई
डिब्बे में मौजूद एक अजनबी शख्स की नजरें बार-बार उस लड़की पर टिकने लगीं। पहले तो उसने नजरअंदाज किया, सोचा शायद संयोग होगा। लेकिन जल्द ही वो शख्स गंदे इशारे करने लगा, घूरने लगा। भीषण गर्मी के चलते लड़की ने शर्ट का एक बटन ढीला किया था — बस इतना ही काफी था उस दरिंदे के लिए, उसने चुपके से उसकी तस्वीर खींच ली।
लड़की असहज हो उठी। उसने खुद को शांत करने के लिए कानों में इयरफोन लगाए, फोन में गाने चलाए — उम्मीद थी कि शायद ध्यान भटकाने से बात खत्म हो जाएगी। मगर वो आदमी रुका नहीं।
जब हद पार हो गई
आंखें मारना, घूरना, और फिर सबसे शर्मनाक पल — वो शख्स जोर-जोर से पीड़िता और उसके आसपास बैठी अन्य लड़कियों के बारे में अश्लील टिप्पणियां करने लगा। उसने चारों को अपमानजनक शब्दों से नवाजा।
डिब्बे में दर्जनों लोग मौजूद थे। सब कुछ देख रहे थे, सुन रहे थे — लेकिन कोई आगे नहीं आया। न किसी ने आवाज उठाई, न किसी ने उस शख्स को रोका। पीड़िता बाद में रोते हुए कहेगी — “लोग सिर्फ तमाशा देखते रहे।”
आखिरी सहारा — चेन पुलिंग
जब डर अपनी हद पार कर गया, जब लड़की को लगा कि अब उसकी जान और इज्जत दोनों खतरे में हैं, तो उसके पास एक ही रास्ता बचा — चेन खींचना। कांपते हाथों से उसने इमरजेंसी चेन खींची, ट्रेन झटके से रुकी।
अफरा-तफरी मच गई। और इसी अफरा-तफरी का फायदा उठाकर वो आरोपी पीड़िता का पर्स छीनकर भाग निकला।
“अगर मैं चेन नहीं खींचती, तो शायद आज जिंदा नहीं बचती” — यही शब्द थे उस लड़की के, जब उसने RPF और GRP जवानों के सामने रो-रोकर पूरी आपबीती सुनाई।
पुलिस पहुंची, लेकिन सवाल बाकी रह गए
मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने पीड़िता को दिलासा दिया, सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया। लेकिन उन्होंने भी उसी डिब्बे में बैठे यात्रियों को कठघरे में खड़ा कर दिया — “आप लोगों को एक अकेली लड़की की मदद के लिए आगे आना चाहिए था।”
पीड़िता ने बस एक मांग रखी — हर डिब्बे में पुलिस की तैनाती हो, ताकि किसी और लड़की को यह दिन न देखना पड़े।



