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लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने की जांच तेज : डामर-मिट्टी के नमूने लिए, ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे धंसने की जांच तेज : डामर-मिट्टी के नमूने लिए, ड्रेनेज सिस्टम पर उठे सवाल

लखनऊ, अमृत विचार: लखनऊकानपुर एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों में सड़क धंसने के मामले की जांच में प्रारंभिक तौर पर ड्रेनेज सिस्टम और अर्थवर्क में खामियां सामने आई हैं। आईआईटी खड़गपुर, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और स्वतंत्र प्रयोगशाला की संयुक्त टीम ने गुरुवार को करीब चार घंटे तक 126 किलोमीटर लंबे एक्सप्रेसवे का निरीक्षण किया। टीम ने सड़क के विभिन्न हिस्सों का तकनीकी परीक्षण करने के साथ कई स्थानों के फोटोग्राफ भी लिए।

निरीक्षण के दौरान आईआईटी खड़गपुर के प्रोफेसर के.एस. रेड्डी ने सड़क की ज्यामिति, ढाल और जल निकासी व्यवस्था का बारीकी से परीक्षण किया। ग्रीनफील्ड सेक्शन में लखनऊ से कानपुर की ओर जाते समय अधिक कर्व तथा कानपुर से लखनऊ की ओर अधिक ढाल का अवलोकन किया गया। एनएचएआई अधिकारियों ने बताया कि संबंधित हिस्से में नीचे से नदी गुजरने के कारण सड़क का डिजाइन इस प्रकार रखा गया है।

संयुक्त टीम ने उन्नाव के कोरारी क्षेत्र के आसपास किलोमीटर64 पर पाया कि वर्षा का पानी दोनों ओर समान रूप से निकलने के बजाय कर्व वाले हिस्से में अधिक एकत्र हो रहा है। प्रारंभिक जांच में इसी स्थान पर ड्रेनेज सिस्टम में कुछ तकनीकी कमियां भी सामने आई हैं। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएंगे।

टीम ने जिन स्थानों पर सड़क धंसने की शिकायत मिली थी, वहां से डामर और मिट्टी के नमूने भी एकत्र किए। प्रारंभिक परीक्षण में मिट्टी की गहराई तक नमी मिलने के संकेत मिले हैं। तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अर्थवर्क और ड्रेनेज लेयर अपेक्षित मानकों के अनुरूप नहीं रही होगी तो लगातार बारिश के बाद पानी नीचे तक पहुंचने से सड़क की सतह प्रभावित हो सकती है। हालांकि डामर की गुणवत्ता शुरुआती जांच में संतोषजनक पाई गई है।

एनएचएआई के परियोजना निदेशक नवरत्न ने बताया कि जांच अभी तीन से चार दिन और चलेगी। सभी नमूनों की जांच आईआईटी खड़गपुर अथवा किसी स्वतंत्र प्रयोगशाला में कराई जाएगी। पीएनसी की लैब में नमूनों की जांच नहीं होगी। कुछ रिपोर्ट तीनचार दिन में और शेष लगभग एक सप्ताह में मिलने की संभावना है। अंतिम रिपोर्ट के बाद ही सड़क धंसने के वास्तविक कारणों पर स्पष्ट निष्कर्ष सामने आएगा।

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