
वाराणसी, अमृत विचार। काशी में एक परिवार की दर्दनाक कहानी ने रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र से बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए वाराणसी आए एक परिवार का कुछ ही दिनों में ऐसा दुखद अंत हुआ कि पति, पत्नी और बेटे के शव लेने के लिए भी कोई अपना आगे नहीं आया। आखिरकार पुलिस ने समाजसेवी अमन कबीर की मदद से शुक्रवार शाम हरिश्चंद्र घाट पर तीनों का एक साथ अंतिम संस्कार कराया।
बाबा विश्वनाथ के दर्शन की थी अंतिम इच्छा
पुलिस के अनुसार, महाराष्ट्र के रहने वाले व्यापारी विशाल मुखर्जी अपनी पत्नी जया मुखर्जी और बेटे ईशान मुखर्जी के साथ पांच अगस्त को काशी आए थे। परिवार ने श्री काशी विश्वनाथ धाम समेत प्रमुख मंदिरों में दर्शनपूजन किया और गंगा आरती में भी शामिल हुआ। बताया जा रहा है कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे विशाल मुखर्जी की सावन में बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने की अंतिम इच्छा थी। परिवार ने उनकी यह इच्छा पूरी भी की, लेकिन इसके कुछ ही दिन बाद हालात ने भयावह मोड़ ले लिया।
ट्रॉमा सेंटर में हुई विशाल की मौत
रविवार को बीमारी के चलते विशाल मुखर्जी की ट्रॉमा सेंटर में मौत हो गई। पति की मौत का सदमा पत्नी जया और बेटे ईशान को इतना गहरा लगा कि वे इसे सहन नहीं कर सके। पुलिस के मुताबिक, दोनों विशाल का शव ट्रॉमा सेंटर में छोड़कर लक्सा क्षेत्र स्थित होम स्टे लौट गए। रविवारमध्यरात्रि से सोमवार के बीच दोनों ने जहरीला पदार्थ खाकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली।
कर्ज के बोझ में दबा था परिवार
जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि विशाल मुखर्जी और उनके बेटे ईशान पर काफी कर्ज था। पुलिस का मानना है कि बीमारी, पिता की मौत और आर्थिकमानसिक तनाव ने परिवार को इस बेहद दुखद स्थिति तक पहुंचाने में भूमिका निभाई हो सकती है। मामले की जांच जारी है।
अपनों ने भी शव लेने से कर दिया इनकार
घटना के बाद पुलिस ने प्रयागराज समेत अन्य स्थानों पर रहने वाले परिजनों और रिश्तेदारों से कई बार संपर्क किया। हालांकि, किसी ने भी शव लेने की सहमति नहीं दी। पुलिस के अनुसार, कुछ रिश्तेदारों ने फोन पर यह तक कह दिया कि उनका इस परिवार से अब कोई संबंध नहीं है। ऐसे में तीनों शवों के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी पुलिस के सामने चुनौती बन गई।
समाजसेवी अमन कबीर ने दी तीनों को मुखाग्नि
शुक्रवार शाम पुलिस ने समाजसेवी अमन कबीर की मदद से हरिश्चंद्र घाट पर तीनों का अंतिम संस्कार कराया। अमन कबीर ने स्वयं पति, पत्नी और बेटे को मुखाग्नि दी। अमन कबीर ने बताया कि वह अक्सर लावारिस या आर्थिक रूप से असमर्थ लोगों के अंतिम संस्कार में सहयोग करते हैं, लेकिन यह पहला मौका था जब उन्हें एक ही परिवार के तीन सदस्यों का एक साथ अंतिम संस्कार करना पड़ा। उन्होंने कहा, “जीवनभर साथ निभाने वाले अपने लोग मृत्यु के बाद इस तरह मुंह मोड़ लेंगे, इसकी कभी कल्पना भी नहीं की थी।”
रिश्तों की संवेदनाओं पर छोड़ गई बड़ा सवाल
काशी में सामने आई यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है। यह बदलते सामाजिक रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं पर भी गंभीर सवाल छोड़ गई है। जिस परिवार ने साथ मिलकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए, उसका कुछ ही दिनों में इस तरह बिखर जाना और अंतिम समय में अपनों का साथ न मिलना बेहद मार्मिक है।



