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बच्चा पढ़ाई से कतराता है तो डांटें नहीं, अपनाएं ये आसान तरीके 

बच्चे का पढ़ाई से जी चुराना, किताब खोलते ही बहाने बनाना या पढ़ने के नाम पर रोने लगना मातापिता के लिए चिंता का विषय हो सकता है। कई बार ऐसी स्थिति में अभिभावक गुस्सा करने लगते हैं और बच्चे पर पढ़ाई का दबाव बढ़ा देते हैं, लेकिन डांट या मार समस्या का समाधान नहीं है। इसके बजाय यह समझना जरूरी है कि आखिर बच्चा पढ़ाई से बच क्यों रहा है।

संभव है कि उसे कोई विषय कठिन लग रहा हो, स्कूल में किसी तरह की परेशानी हो, समझने में दिक्कत आ रही हो या फिर उसकी क्षमता से अधिक पढ़ाई का दबाव उस पर डाला जा रहा हो। बच्चे की परेशानी का कारण समझकर ही सही समाधान निकाला जा सकता है।

पढ़ाई को बोझ नहीं रुचिकर गतिविधि बनाएं

बच्चों के मन में पढ़ाई को लेकर नकारात्मक भावना अक्सर तब पैदा होती है, जब उन्हें बारबार खेलने, टीवी देखने या दोस्तों के साथ समय बिताने से रोककर पढ़ने के लिए कहा जाता है। इससे उन्हें लगने लगता है कि पढ़ाई एक सजा है। मातापिता को कोशिश करनी चाहिए कि पढ़ाई को बच्चे की रुचि के अनुसार रोचक बनाया जाए। कठिन विषयों को उदाहरणों, कहानियों, चित्रों या खेल के माध्यम से समझाया जा सकता है। जब पढ़ाई बच्चे के लिए आनंददायक अनुभव बनेगी, तो उसका डर धीरेधीरे कम होने लगेगा।

दूसरे बच्चों से तुलना न करें

‘देखो, तुम्हारा दोस्त कितना अच्छा पढ़ता है’ या ‘तुम उससे पीछे क्यों रह गए?’ जैसे वाक्य बच्चे के आत्मविश्वास को नुकसान पहुंचा सकते हैं। हर बच्चे की सीखने और समझने की गति अलग होती है।

इसलिए बच्चे की तुलना किसी दूसरे से करने के बजाय उसकी पिछली उपलब्धियों से करें। अगर उसने कल से आज बेहतर प्रदर्शन किया है, तो उसकी तारीफ करें। इससे उसके मन में यह विश्वास पैदा होगा कि वह लगातार बेहतर कर सकता है।

बच्चा रोए तो पहले उसकी बात सुनें

अगर पढ़ाई के दौरान बच्चा रोने लगे या परेशान दिखाई दे, तो तुरंत डांटने के बजाय उसे शांत करें। उसे प्यार से समझाएं और पूछें कि उसे किस बात की परेशानी हो रही है।

कई बार बच्चे अपनी समस्या शब्दों में नहीं बता पाते। ऐसे में मातापिता का धैर्य और अपनापन बहुत महत्वपूर्ण होता है। जब बच्चे को यह भरोसा होगा कि उसकी बात सुनी जाएगी और उसे डांटा नहीं जाएगा, तो वह अपनी परेशानी खुलकर बताने लगेगा।

छोटी सफलता का भी करें सम्मान

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े परिणामों का इंतजार न करें। अगर बच्चे ने कोई कठिन सवाल हल किया, नया शब्द सीखा या पहले की तुलना में कुछ बेहतर किया, तो उसे जरूर शाबाशी दें।

ऐसी छोटीछोटी प्रशंसा बच्चे के भीतर सीखने की इच्छा को मजबूत करती है और पढ़ाई को लेकर उसका आत्मविश्वास बढ़ाती है।

कब विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है?

अगर लगातार प्रयास करने के बावजूद बच्चा पढ़ाई के नाम से बहुत अधिक डरता है, बारबार तनाव में रहता है, स्कूल जाने से बचता है या उसे सामान्य चीजें सीखने में भी लगातार परेशानी हो रही है, तो इसे केवल उसकी जिद समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में शिक्षक, चाइल्ड काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। सही समय पर बच्चे की परेशानी को समझकर मदद करने से उसकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।

लंबे समय तक बैठाने के बजाय दें छोटे ब्रेक

बच्चे को घंटों लगातार पढ़ने के लिए मजबूर करना उसकी एकाग्रता कम कर सकता है। इसलिए पढ़ाई को छोटेछोटे हिस्सों में बांटना बेहतर तरीका है। कुछ देर पढ़ने के बाद बच्चे को छोटा ब्रेक दें, ताकि वह मानसिक रूप से तरोताजा हो सके। जब वह कोई छोटा लक्ष्य पूरा करे, तो उसकी सराहना भी करें। यह जरूरी नहीं कि हर बार अच्छे अंक लाने पर ही बच्चे की प्रशंसा की जाए। उसकी मेहनत, कोशिश और सुधार को पहचानना उसके आत्मविश्वास को मजबूत करता है।

छोटी सफलता का भी करें सम्मान

बच्चों को प्रोत्साहित करने के लिए बड़े परिणामों का इंतजार न करें। अगर बच्चे ने कोई कठिन सवाल हल किया, नया शब्द सीखा या पहले की तुलना में कुछ बेहतर किया, तो उसे जरूर शाबाशी दें।

ऐसी छोटीछोटी प्रशंसा बच्चे के भीतर सीखने की इच्छा को मजबूत करती है और पढ़ाई को लेकर उसका आत्मविश्वास बढ़ाती है।

कब विशेषज्ञ की मदद लेना जरूरी है?

अगर लगातार प्रयास करने के बावजूद बच्चा पढ़ाई के नाम से बहुत अधिक डरता है, बारबार तनाव में रहता है, स्कूल जाने से बचता है या उसे सामान्य चीजें सीखने में भी लगातार परेशानी हो रही है, तो इसे केवल उसकी जिद समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में शिक्षक, चाइल्ड काउंसलर या चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है। सही समय पर बच्चे की परेशानी को समझकर मदद करने से उसकी सीखने की क्षमता और आत्मविश्वास दोनों को बेहतर बनाया जा सकता है।

 

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