
बरसात का मौसम आते ही खान-पान और सेहत का खास ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। इस दौरान वातावरण में नमी बढ़ने के साथ कई तरह के संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है। बाहर का खाना, दूषित पानी और साफ-सफाई की कमी से गैस, अपच, पेट खराब और दूसरी परेशानियां हो सकती हैं।
ऐसे में संतुलित डाइट के साथ कुछ सामान्य हर्बल और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को शामिल किया जा सकता है। अदरक, तुलसी, जीरा और नीम जैसी चीजों का इस्तेमाल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से होता रहा है। इनमें कई तरह के बायोएक्टिव और एंटीऑक्सीडेंट कंपाउंड पाए जाते हैं।
हालांकि, इन चीजों को किसी बीमारी का इलाज नहीं माना जाना चाहिए। आइए जानते हैं मानसून में डाइट में शामिल किए जा सकने वाले 7 हर्बल विकल्पों के बारे में।
1. गुनगुना पानी
मानसून में पर्याप्त पानी पीना बेहद जरूरी है। कुछ लोगों को गुनगुना पानी पीने से पेट के भारीपन, गैस और पाचन संबंधी परेशानी में आराम महसूस हो सकता है।
सुबह उठकर गुनगुना पानी पीना और दिनभर पर्याप्त मात्रा में सुरक्षित पानी का सेवन करना हाइड्रेशन बनाए रखने में मदद करता है। बरसात में पानी को लेकर साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
2. अदरक
अदरक भारतीय रसोई का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसमें जिंजरोल जैसे बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं, जिनमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण हो सकते हैं।
इसे चाय, सब्जी या भोजन में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। अदरक का इस्तेमाल मतली और कुछ प्रकार के दर्द से जुड़ी परेशानी में भी किया जाता रहा है। हालांकि, ज्यादा मात्रा में अदरक लेने से कुछ लोगों को सीने में जलन या पेट की परेशानी हो सकती है।
3. त्रिफला
त्रिफला आंवला, हरड़ और बहेड़ा से तैयार किया जाने वाला पारंपरिक आयुर्वेदिक मिश्रण है। इसका इस्तेमाल खासतौर पर पाचन और कब्ज से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है।
लेकिन त्रिफला को शरीर की सारी ‘गंदगी’ निकालने या डायबिटीज का इलाज करने वाला चमत्कारी उपाय समझना सही नहीं है। लंबे समय तक या नियमित सेवन करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
4. भुना हुआ जीरा
जीरा पाचन को सपोर्ट करने वाला लोकप्रिय मसाला है। इसे सब्जियों, दाल या छाछ में मिलाकर आसानी से खाया जा सकता है।
भुना हुआ जीरा कुछ लोगों में गैस, पेट फूलने और भारीपन जैसी सामान्य पाचन संबंधी परेशानियों में आराम देने में मदद कर सकता है। हालांकि, किसी गंभीर पाचन समस्या में केवल जीरे पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
5. सेंधा नमक
सेंधा नमक भी मुख्य रूप से सोडियम क्लोराइड ही होता है। इसका इस्तेमाल भोजन और पेय पदार्थों में स्वाद के लिए किया जाता है और यह कुछ लोगों को सामान्य नमक का विकल्प लगता है।
हालांकि, सेंधा नमक को ज्यादा मात्रा में खाना भी सही नहीं है। अधिक सोडियम का सेवन ब्लड प्रेशर और शरीर में पानी रुकने की समस्या को प्रभावित कर सकता है। इसलिए इसे भी सीमित मात्रा में ही इस्तेमाल करें।
6. तुलसी
तुलसी का इस्तेमाल भारतीय पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से होता आया है। इसमें यूजेनॉल समेत कई बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं।
मानसून में तुलसी की चाय या इसे भोजन में सीमित मात्रा में शामिल किया जा सकता है। तुलसी गले और सामान्य स्वास्थ्य के लिए कुछ संभावित लाभ दे सकती है, लेकिन इसे वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण की दवा या प्राकृतिक एंटीबायोटिक नहीं माना जाना चाहिए।
7. नीम
नीम की पत्तियों में कई ऐसे पौधों से मिलने वाले यौगिक पाए जाते हैं जिनमें एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुणों पर अध्ययन हुए हैं। पारंपरिक चिकित्सा में नीम का इस्तेमाल त्वचा और दूसरी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है।
हालांकि, नीम की पत्तियों का नियमित रूप से सेवन हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है। खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और नियमित दवाएं लेने वाले लोगों को बिना विशेषज्ञ की सलाह नीम का सेवन नहीं करना चाहिए।
मानसून में इन बातों का भी रखें ध्यान
हर्बल चीजों के साथ बरसात में साफ और ताजा भोजन करना, सुरक्षित पानी पीना, फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोना और बाहर के खुले भोजन से बचना भी जरूरी है। सिर्फ किसी एक हर्ब या घरेलू नुस्खे से इम्यूनिटी मजबूत होने की गारंटी नहीं दी जा सकती।
निष्कर्ष: अदरक, जीरा, तुलसी और दूसरे हर्बल खाद्य पदार्थ संतुलित डाइट का हिस्सा बन सकते हैं। इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर है और किसी बीमारी के इलाज के लिए इन पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। हर्बल फूड या घरेलू नुस्खे किसी बीमारी की दवा या इलाज का विकल्प नहीं हैं। यदि आप किसी बीमारी से पीड़ित हैं या नियमित दवाएं लेते हैं तो इन्हें नियमित रूप से लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।



