भारतीय चिंतन ने हमेशा नारी को शक्ति के रूप में देखा है, कमजोरी के तौर पर नहीं. स्वामी विवेकानंद का प्रसिद्ध कथन है कि जिस राष्ट्र में नारी की पूजा होती है, वहां देवता निवास करते हैं. समाज की प्रगति का मार्गदर्शक सिद्धांत भी यही है और राष्ट्र की समृद्धि भी तभी संभव है, जब उसकी आधी आबादी को स्वावलंबन की दिशा देने के साथ ही सम्मान भी दिया जाए. उत्तर प्रदेश के सामाजिक उत्थान के मूल में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सोच भी यही है कि मातृशक्ति को सशक्त बनाया जाए और लोकमाता अहिल्याबाई मातृशक्ति यात्रा योजना इसी की एक कड़ी है.

लखनऊ में बुधवार को जब मुख्यमंत्री योगी ने इस योजना का का शुभारंभ किया तो यह एक तरह से अपने न्यायप्रिय शासन, करुणा और अपने संकल्प के लिए जानी जाने वाली देवी अहिल्याबाई होलकर को नमन था. योगी सरकार ने 60 वर्ष और उससे अधिक आयु की माताओंबहनों को निःशुल्क बस यात्रा की सुविधा देकर देवी अहिल्याबाई को समाज की वरिष्ठ और बुजुर्ग महिलाओं के सम्मान का प्रतीक बना दिया है.
मातृशक्ति सम्मान की यात्रा के और भी पड़ाव
योगी सरकार की मातृशक्ति सम्मान की यात्रा के और भी पड़ाव हैं. रक्षाबंधन जैसे पवित्र पर्व के अवसर पर, 27 से 29 अगस्त तक, माताएंबहनें अपने सहयात्री के साथ निःशुल्क यात्रा कर सकेंगी. योगी सरकार महिलाओं को रक्षाबंधन पर यह सुविधा पहले से देती रही है तो इसके पीछे इस पर्व के प्रति उसका सम्मान भाव है. रक्षाबंधन का धागा भाईबहन के स्नेह का प्रतीक है. सरकार ने उसी धागे में सुरक्षा और सुविधा को पिरो दिया है.
कल्पना कीजिए उस वृद्धा का चेहरा, जो वर्षों से किसी पर्व पर अपने भाई के घर इसलिए नहीं जा पाती थी क्योंकि किराया एक बोझ था. अब वही यात्रा उसके लिए स्वाभिमान के साथ संभव है. यह नीति केवल बस के टिकट की छूट नहीं देती, यह बुजुर्ग महिलाओं को यह अहसास कराती है कि राज्य उनकी गरिमा का भागीदार है.
महिलाओं के साथ सेल्फी
मातृशक्ति योजना के शुभारंभ अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब महिलाओं को स्मार्ट कार्ड, बैग, साड़ी और मिठाई भेंट की, तो यह दृश्य आत्मीय था. यह वह भारतीय संस्कार है, जहां देने वाला झुककर देता है और पाने वाला सम्मानित होकर लेता है. विशेष बसों को हरी झंडी दिखाकर, खुद बस में चढ़कर महिलाओं के साथ सेल्फी लेते मुख्यमंत्री की छवि इस बात का प्रमाण है कि यह योजना फाइलों में नहीं, जमीन पर जीवंत है. नेतृत्व जब जनता के बीच जाकर उसकी खुशी में शामिल होता है, तभी शासन और समाज के बीच की दूरी सचमुच मिटती है.
50 हजार बेटियों को दी जाएगी स्कूटी
इसी क्रम में सीएम योगी की यह घोषणा भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसमें उन्होंने कहा कि स्नातक में पढ़ने वाली 50 हजार बेटियों को अक्टूबरनवंबर में स्कूटी दी जाएगी. यह योजना केवल एक वाहन देने की बात नहीं है, यह बेटियों की स्वतंत्र गतिशीलता, उनकी शिक्षा तक निर्बाध पहुंच और उनके आत्मविश्वास की कहानी है. जो बेटी कभी दूर के कॉलेज जाने से इसलिए हिचकती थी क्योंकि रास्ता सुरक्षित नहीं लगता था या साधन उपलब्ध नहीं था, अब वह अपनी स्कूटी पर सवार होकर अपने सपनों की दिशा में निकल सकेगी. शिक्षा से आत्मनिर्भरता तक की यह दूरी, यह योजना पाटने का प्रयास करती है.
सम्मान की सच्ची कसौटी यह है कि हम नारी को कितना अवसर, कितनी सुरक्षा और कितनी स्वतंत्रता प्रदान करते हैं. बिना सामर्थ्य के सम्मान खोखला रह जाता है. जब स्त्री आर्थिक रूप से सक्षम होती है, उसका सम्मान स्वाभाविक रूप से सुदृढ़ होता है, क्योंकि निर्भरता सम्मान को कमजोर करती है और स्वावलंबन उसे मजबूत करता है.
महिलाओं में चेतना जागृत करने का प्रयास
योगी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही महिलाओं में यह चेतना जागृत करने का प्रयास किया है कि वे सक्षम हैं. इसी का परिणाम है कि महिलाएं अब चूल्हे से चेक तक, चेक से कारोबार तक और कारोबार से टेक्नोलॉजी तक में भागीदारी निभा रही हैं. यह यात्रा उस दिन से शुरू होती है जब एक महिला पहली बार बैंक खाता खुलवाती है, आगे बढ़ती है जब वह स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अपना छोटा व्यवसाय शुरू करती है और समाज के सामने आदर्श बनती है.
डिजिटल भुगतान करती, ऑनलाइन मार्केटिंग सीखती और तकनीक की भाषा बोलती महिला इस यात्रा का हिस्सा है. उत्तर प्रदेश, जहां लगभग साढ़े 12 करोड़ की जनसंख्या आधी आबादी यानी महिलाओं की है, का स्वरूप अब बदला हुआ है और इसे स्पष्ट देखा जा सकता है.
सुविधा, सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और नेतृत्व की यात्रा
सुविधा, सुरक्षा, सम्मान, स्वावलंबन और नेतृत्व की यह यात्रा हमारे मनीषियों के दर्शन को आत्मसात करती है. पंडित दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानववाद यह कहता है कि परिवार और समाज की समग्र उन्नति तभी संभव है जब उसकी हर इकाई, विशेषकर नारी, सशक्त और आत्मनिर्भर हो. हमें स्मरण रखना होगा कि सशक्तीकरण केवल आर्थिक सहायता से नहीं आता, वह गरिमा और अवसर के सम्मिलन से जन्म लेता है.
स्वरोजगार की योजनाओं से खुला समृद्धि का द्वार
जब एक वृद्ध महिला बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने परिवार से मिलने जा सकती है, जब एक युवा बेटी अपने कॉलेज तक खुद की सवारी पर पहुंच सकती है, तब यह केवल सुविधा नहीं, स्वाभिमान की पुनर्स्थापना है. भारतीय परंपरा में नारी को शक्ति, लक्ष्मी और सरस्वती का प्रतिरूप माना गया है, मतलब शक्ति, समृद्धि और ज्ञान की त्रिवेणी. यह योजनाएं उसी त्रिवेणी को यथार्थ के धरातल पर उतारने का प्रयास हैं. बस यात्रा से बुजुर्ग महिला को शक्ति मिलती है, स्कूटी से बेटी को ज्ञान तक पहुंचने का साधन मिलता है, और स्वरोजगार की योजनाओं से समृद्धि का द्वार खुलता है.
सुधा मोदी, समाजसेविका और उद्यमी



