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चाय पीते ही गैस और एसिडिटी क्यों बढ़ती है? कप में ये 2 चीजें डालकर पिएं, पेट को मिल सकती है राहत.​​​​​​

सुबह की शुरुआत चाय के बिना अधूरी लगती है। किसी को अदरक वाली चाय पसंद है तो कोई इलायची या मसाला चाय का शौकीन होता है। दिन में थकान महसूस हो तो एक कप चाय और शाम होते ही चाय का दूसरा दौर। लेकिन क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि चाय पीने के कुछ देर बाद पेट में गैस, भारीपन, खट्टी डकार या सीने में जलन शुरू हो जाती है?

अगर हां, तो इसकी वजह सिर्फ चाय नहीं बल्कि चाय पीने का समय, मात्रा, उसमें मौजूद कैफीन और आपकी व्यक्तिगत संवेदनशीलता भी हो सकती है। खासकर जिन लोगों को पहले से एसिडिटी या एसिड रिफ्लक्स की समस्या रहती है, उनमें कैफीन वाली चाय कुछ परिस्थितियों में लक्षण बढ़ा सकती है।

आयुर्वेद एवं यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार चाय को सही समय और सीमित मात्रा में लेना ज्यादा बेहतर है। चाय में अदरक या थोड़ी सी दालचीनी जैसे मसालों का इस्तेमाल स्वाद के साथ-साथ पाचन को सपोर्ट करने के लिए किया जा सकता है। हालांकि, इन्हें किसी बीमारी की दवा नहीं माना जाना चाहिए।

खाली पेट चाय पीने से क्यों बढ़ सकती है एसिडिटी?

सुबह उठते ही खाली पेट चाय पीना कई लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। चाय में मौजूद कैफीन कुछ लोगों में पेट से जुड़ी असहजता या एसिड रिफ्लक्स के लक्षणों को बढ़ा सकता है।

अगर चाय पीने के बाद आपको बार-बार सीने में जलन, खट्टी डकार, पेट में जलन या मितली महसूस होती है तो खाली पेट चाय पीने से बचना बेहतर है।

सुबह सबसे पहले पानी पीने की आदत डालें और संभव हो तो हल्का नाश्ता करने के बाद चाय लें। अगर इसके बावजूद परेशानी बनी रहती है तो चाय की मात्रा कम करके देखें।

चाय में डालें अदरक, पाचन को मिल सकता है सपोर्ट

अदरक का इस्तेमाल भारतीय रसोई में सदियों से किया जाता रहा है। इसमें जिंजरोल जैसे सक्रिय यौगिक पाए जाते हैं और इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं।

अदरक वाली चाय कुछ लोगों में अपच, मतली और पेट की सामान्य असहजता को कम करने में मदद कर सकती है। यही वजह है कि भारी भोजन के बाद या ठंड के मौसम में अदरक वाली चाय काफी पसंद की जाती है।

लेकिन ध्यान रखें कि अदरक हर व्यक्ति में एसिडिटी कम करे, ऐसा जरूरी नहीं है। अगर आपको पहले से सीने में जलन या एसिड रिफ्लक्स की समस्या है और अदरक लेने के बाद लक्षण बढ़ते हैं, तो इसका सेवन कम करें या बंद कर दें।

दालचीनी भी हो सकती है चाय का अच्छा साथी

चाय में थोड़ी मात्रा में दालचीनी मिलाने से स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं। दालचीनी में पॉलीफेनॉल और अन्य एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं।

कुछ शोधों में दालचीनी और ब्लड शुगर नियंत्रण के बीच संभावित संबंध देखा गया है, लेकिन इसे डायबिटीज की दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता।

अगर दालचीनी का नियमित सेवन करना चाहते हैं तो सीलोन दालचीनी एक विकल्प हो सकती है। सामान्य कैसिया दालचीनी में क्यूमरिन की मात्रा ज्यादा हो सकती है, जिसका बहुत अधिक और लंबे समय तक सेवन कुछ लोगों के लिए उचित नहीं माना जाता।

इसलिए दालचीनी को भी कम मात्रा में ही इस्तेमाल करना बेहतर है।

खाने के तुरंत बाद चाय पीना क्यों सही नहीं?

अगर आप खाना खत्म करते ही चाय पीने के आदी हैं तो इस आदत पर थोड़ा ध्यान देना जरूरी है।

चाय में मौजूद पॉलीफेनॉल और टैनिन भोजन से मिलने वाले गैर-हीम आयरन के अवशोषण को कम कर सकते हैं। खासकर जिन लोगों में पहले से आयरन की कमी है, उनके लिए भोजन के साथ या तुरंत बाद चाय पीना उचित नहीं हो सकता।

इसलिए मुख्य भोजन और चाय के बीच कुछ अंतर रखना बेहतर है। अगर आपको आयरन की कमी या एनीमिया है तो डॉक्टर या डाइटिशियन से अपनी चाय की टाइमिंग को लेकर सलाह लें।

ज्यादा चीनी वाली चाय भी बढ़ा सकती है परेशानी

कई लोगों को लगता है कि चाय खराब है, जबकि असली समस्या उसमें डाली जाने वाली ज्यादा चीनी होती है।

मान लीजिए कोई व्यक्ति दिन में 3 कप चाय पीता है और हर कप में 2 चम्मच चीनी डालता है। इस तरह सिर्फ चाय के जरिए दिनभर में करीब 6 चम्मच अतिरिक्त चीनी ली जा सकती है।

लंबे समय तक ज्यादा चीनी का सेवन वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। इसलिए चाय में चीनी धीरे-धीरे कम करने की कोशिश करें।

गुड़ को भी पूरी तरह शुगर-फ्री या हेल्दी विकल्प समझना सही नहीं है। गुड़ में भी शुगर और कैलोरी होती हैं, इसलिए इसका इस्तेमाल भी सीमित मात्रा में ही करें।

दिन में कितनी चाय पीना ठीक है?

चाय की कोई एक मात्रा हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होती। इसका असर आपकी उम्र, कैफीन के प्रति संवेदनशीलता, नींद, स्वास्थ्य और कुल कैफीन सेवन पर निर्भर करता है।

अगर चाय पीने से धड़कन तेज होना, बेचैनी, नींद खराब होना, गैस या एसिडिटी बढ़ना जैसी समस्या होती है तो इसकी मात्रा कम करना बेहतर है।

खासतौर पर शाम और रात में ज्यादा कैफीन लेने से नींद प्रभावित हो सकती है।

बार-बार उबाली गई चाय से क्यों बचें?

चाय को जरूरत से ज्यादा देर तक उबालने से उसका स्वाद कड़वा हो सकता है और टैनिन जैसे यौगिकों की मात्रा बढ़ सकती है। कुछ संवेदनशील लोगों में ऐसी गाढ़ी चाय पेट में असहजता पैदा कर सकती है।

इसलिए चाय को जरूरत भर ही पकाएं और बहुत ज्यादा गाढ़ी चाय पीने से बचें।

अगर चाय से लगातार एसिडिटी होती है तो क्या करें?

अगर हर बार चाय पीने के बाद पेट में जलन, खट्टी डकार या गैस होती है तो सिर्फ अदरक या दालचीनी डालकर समस्या को दबाने की कोशिश न करें।

सबसे पहले इन बातों पर ध्यान दें:

  • खाली पेट चाय पीना बंद करके देखें।
  • चाय की मात्रा कम करें।
  • बहुत ज्यादा गाढ़ी चाय से बचें।
  • चाय में चीनी कम करें।
  • भोजन के तुरंत बाद चाय न पिएं।
  • रात में कैफीन वाली चाय लेने से बचें।
  • देखें कि दूध वाली चाय से ज्यादा परेशानी होती है या बिना दूध वाली चाय से।
  • पर्याप्त पानी पिएं।

अगर इन बदलावों के बाद भी लगातार एसिडिटी रहती है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है, क्योंकि बार-बार एसिडिटी केवल चाय की वजह से नहीं होती।

निष्कर्ष

चाय को पूरी तरह छोड़ना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। समस्या अक्सर इसकी मात्रा, समय, ज्यादा चीनी और व्यक्ति की अपनी संवेदनशीलता से जुड़ी हो सकती है। अदरक या थोड़ी दालचीनी चाय को स्वादिष्ट बनाने के साथ कुछ लोगों के पाचन को सपोर्ट कर सकती है, लेकिन इन्हें गैस या एसिडिटी का पक्का इलाज नहीं माना जाना चाहिए।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। चाय, अदरक या दालचीनी का असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है। अगर आपको लगातार एसिडिटी, सीने में दर्द या जलन, निगलने में परेशानी, बार-बार उल्टी, काला मल या बिना वजह वजन कम होने जैसी समस्या है तो डॉक्टर से संपर्क करें। किसी बीमारी या नियमित दवा की स्थिति में डाइट में बदलाव करने से पहले योग्य चिकित्सक या डाइटिशियन की सलाह लें।

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