
डिजिटल डेस्क, अमृत विचार। राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर प्रशासन को और व्यवस्थित एवं पेशेवर बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को अपना पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त किया है। भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख रह चुके जितेंद्र मिश्रा ने ऑपरेशन सिंदूर और कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई है। वह मूल रूप से देवरिया के रहने वाले हैं और 30 अप्रैल 2026 को वायुसेना से सेवानिवृत्त हुए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संभाली वेस्टर्न कमांड की कमान
जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना की पश्चिमी कमान के प्रमुख रह चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भी उन्होंने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाली। सैन्य सेवा के दौरान उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया जा चुका है।करीब 38 साल से अधिक लंबे सैन्य करियर में जितेंद्र मिश्रा ने 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया। उन्होंने 18 से ज्यादा प्रकार के फाइटर, ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं।
कारगिल युद्ध में भी निभाई थी अहम भूमिका
जितेंद्र मिश्रा नेशनल डिफेंस एकेडमी, खड़कवासला और एयर फोर्स एकेडमी, डुंडीगल के पूर्व छात्र हैं। वह एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज, मोंटगोमरी, अलबामा और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज से भी प्रशिक्षण ले चुके हैं। स्क्वाड्रन लीडर के तौर पर वह उस टीम का हिस्सा थे, जिसने कारगिल युद्ध के शुरुआती दौर में मिराज2000 विमानों पर लेजर गाइडेड बमों को ऑपरेशनल बनाया था। इन हथियारों का इस्तेमाल बाद में ऑपरेशन सफेद सागर के दौरान टाइगर हिल और मुंथो ढालो पर किए गए महत्वपूर्ण हमलों में हुआ था।
देवरिया के भोपतपुरा गांव से है नाता
पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा मूल रूप से उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के बनकटा ब्लॉक के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। उनके पिता का नाम नथुनी मिश्र है। साधारण ग्रामीण परिवेश से निकलकर उन्होंने भारतीय वायुसेना में करीब 40 साल का लंबा और गौरवपूर्ण करियर बनाया। बचपन से ही उन्हें विमान उड़ाने का शौक था। यही रुचि आगे चलकर उनके सैन्य करियर की पहचान बन गई और उन्होंने भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में अपनी अलग पहचान बनाई।
1986 में शुरू हुआ वायुसेना का सफर
जितेंद्र मिश्रा 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में पायलट ऑफिसर के रूप में कमीशन हुए। वह एयर फोर्स अकादमी के 138वें कोर्स से जुड़े थे। उनकी सेवा संख्या 18575 F रही। वह राष्ट्रीय रक्षा अकादमी , पुणे के 69 NDA कोर्स के पूर्व छात्र हैं। इसके बाद उन्होंने एयर फोर्स टेस्ट पायलट स्कूल, बेंगलुरु से प्रशिक्षण लिया। उन्होंने अमेरिका के Air Command and Staff College और ब्रिटेन के Royal College of Defence Studies से भी प्रशिक्षण प्राप्त किया।
3000 घंटे से ज्यादा उड़ान, 18 से अधिक विमान उड़ाए
जितेंद्र मिश्रा केवल फाइटर पायलट ही नहीं रहे, बल्कि फाइटर कॉम्बैट लीडर और एक्सपेरिमेंटल टेस्ट पायलट के तौर पर भी काम किया। उनके पास 3000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। उन्होंने 18 से अधिक प्रकार के लड़ाकू विमान, परिवहन विमान और हेलीकॉप्टर उड़ाए हैं। स्क्वाड्रन लीडर और विंग कमांडर के तौर पर उन्होंने मिग21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाली। वह तेजपुर के MOFTU Braveheart Squadron में भी तैनात रहे।
चीफ टेस्ट पायलट से लेकर Su30 MKI तक संभाली जिम्मेदारी
कारगिल के बाद जितेंद्र मिश्रा ने चीफ टेस्ट पायलट के तौर पर भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के नासिक डिवीजन और Aircraft and Systems Testing Establishment , बेंगलुरु में चीफ टेस्ट पायलट रहे। इसके अलावा पुणे स्थित Su30 MKI ऑपरेटिंग एयरबेस में उन्होंने चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर की जिम्मेदारी भी संभाली।
एयर कमोडोर के पद पर रहते हुए वह एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में बरेली की 15 विंग और पठानकोट की 18 विंग की कमान भी संभाल चुके हैं। उनके करियर में एयर स्टाफ रिक्वायरमेंट्स, ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप और असिस्टेंट चीफ ऑफ एयर स्टाफ जैसी अहम स्टाफ नियुक्तियां भी रहीं। वह ASTE के कमांडेंट भी रहे।
डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ भी रहे
जितेंद्र मिश्रा एयर मार्शल के पद तक पहुंचे और डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ की जिम्मेदारी संभाली। इस दौरान उन्होंने Doctrine, Organisation and Training के साथसाथ Operations से जुड़े महत्वपूर्ण काम देखे। उनके सैन्य करियर की सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक भारतीय वायुसेना की वेस्टर्न एयर कमांड के AOCinC का पद रहा।
फ्रांस में एक्सरसाइज गरुड़ IV में किया भारतीय दल का नेतृत्व
जितेंद्र मिश्रा ने वर्ष 2010 में फ्रांस में आयोजित बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास गरुड़ IV में भारतीय वायुसेना के दल का नेतृत्व भी किया था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय वायुसेना की क्षमताओं के प्रदर्शन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
VSM, AVSM और SYSM से हुए सम्मानित
लंबे सैन्य करियर के दौरान जितेंद्र मिश्रा को कई प्रतिष्ठित सैन्य सम्मान मिले। वर्ष 2013 में उन्हें विशिष्ट सेवा मेडल प्रदान किया गया। वर्ष 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। वहीं ऑपरेशन सिंदूर में योगदान के लिए वर्ष 2025 में उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल मिला।
40 साल की देशसेवा के बाद अब राम मंदिर की नई जिम्मेदारी
जितेंद्र मिश्रा ने 6 दिसंबर 1986 से 30 अप्रैल 2026 तक भारतीय वायुसेना में सेवा दी। करीब चार दशक के सैन्य करियर के बाद वह वेस्टर्न एयर कमांड के AOCinC पद से सेवानिवृत्त हुए। अब रिटायरमेंट के करीब चार महीने बाद उनकी नई पारी शुरू होने जा रही है। जिस अधिकारी ने दशकों तक देश की सीमाओं की सुरक्षा से जुड़ी अहम जिम्मेदारियां संभालीं, अब वही पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा अयोध्या में राम मंदिर के प्रशासनिक संचालन की कमान संभालेंगे।


