
नैनीताल, अमृत विचार : इस बार अधिकांश समय हुई हल्की हल्की से मध्यम बारिश प्राकृतिक जलश्रोतों को वरदान साबित हुई है। जिस कारण नगर के प्राकृतिक जल बैंक यानी भूमिगत जल लबालब भर गए हैं । साथ ही नैनी झील को बिन बरसात पानी मिल रहा है।
जलवायु परिवर्तन से नगर की मानसूनी वर्षा और बर्फबारी दोनों प्रभावित हुई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले करीब दो दशक में मानसूनी बारिश का व्यवहार बदला हुआ देखने को मिला है। थोड़ा समय में अधिक पानी बरसते देखा गया है। कम समय में अधिक पानी बरसने से जमीन की सिंचाई ठीक से नहीं हो पाती है और अधिकांश जल बह जाता है, जबकि हल्की धीमी बारिश का पानी पूरी तरह जमीन के भीतर तक घुसता है, जो भूमिगत जल के लिए उपयोगी होता है।
भूमिगत जल में हुई वृद्धि
पिछले सालों में देखा गया कि 24 घंटे में बारिश कुछ ही घंटे या मिनटों बहुत तेज हुई और बाकी के घंटे सूखे ही बीत गए। मगर इस बार मानसून की बारिश का व्यवहार दशकों पुराना जैसा रहा। हल्की से मध्यम बारिश कई कई घंटे या फिर दिन और पूरी रात देखने को मिली है। जिससे पानी जमीन के भीतर तक प्रवेश कर पाया और प्राकृतिक जलश्रोत पूरी तरह रिचार्ज हों गए। साथ ही भूमिगत जल की मात्रा में खासी वृद्धि हो गई।
भूमिगत जलवृद्धि से झील के जल स्तर को मिल रहा लाभ
प्राकृतिक जल बैंक
नैनीताल: सिंचाई विभाग झील नियंत्रण कक्ष के अवर अभियंता नीरज तिवारी का कहना है कि इस बार की वर्षा प्राकृतिक जलश्रोत को बेहतर तरीके से रिचार्ज कर गई हैं। इससे भूमिगत जल की मात्रा भी बढ़ी है। जिस कारण झील में बिना बरसात के आधा इंच से अधिक वृद्धि रोजाना हो रही है।
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह कहते हैं कि लम्बे समय से अनियमित बरसात और पानी की कमी से सूखते जलश्रोतों की चिंता झेल रहे नगर के लिए मानसून की लंबे समय तक हुई हल्की से मध्यम बारिश राहत दे गई है। पूर्व में यहां हल्की से मध्यम पानी बरसाना मानसून का मिजाज रहा है, जो इस बार देखने को मिला है। इससे नैनी झील को भी जल वृद्धि का लाभ मिल रहा है।


