
एसीएस वित्त ने सभी अधिकारियों को भेजा शासनादेश, फिजूलखर्ची पर लगेगी लगाम
सभी शीर्ष अधिकारियों और विभागाध्यक्षों को 30 नवंबर तक वित्त विभाग को भेजने होंगे बजट अनुमान
70 फीसदी पूंजीगत बजट चालू कार्यों पर, नए कार्यों के लिए अधिकतम 30 फीसदी की सीमा
लखनऊ, अमृत विचार। प्रदेश सरकार ने वित्तीय वर्ष 202728 के बजट की तैयारियां शुरू कर दी हैं। वित्त विभाग ने सभी विभागों को बजट अनुमान तैयार करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसमें वास्तविक जरूरत के आधार पर प्रावधान करने, अनावश्यक और अनुपयोगी योजनाओं की समीक्षा करने और फिजूलखर्ची रोकने पर विशेष जोर दिया गया है। वित्त विभाग ने साफ किया है कि बजट में केवल उतनी ही धनराशि रखी जाए, जितनी वास्तव में जरूरी हो। विभागीय बजट अनुमान 30 नवंबर 2026 तक वित्त विभाग को भेजने होंगे।
मंगलवार को जारी शासनादेश के मुताबिक बजट अनुमान तैयार करते समय सरकार की प्राथमिकताओं और प्रतिबद्धताओं को ध्यान में रखते हुए जरूरत का सही आकलन किया जाए। ऐसे खर्च जिनसे बचा जा सकता है, उनके लिए बजट में प्रावधान करना वित्तीय अनियमितता माना जा सकता है और इसके लिए संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराए जा सकते हैं।
विभागों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि अनुमान वास्तविक खर्च के करीब हों। 202728 से केंद्र प्रायोजित योजनाओं के बजट में केंद्रांश और राज्यांश को एक साथ, संबंधित फंडिंग पैटर्न के साथ दर्शाना होगा। साथ ही संबंधित योजनाओं के कोड और स्टेट लिंक्ड स्कीम कोड भी प्रदर्शित किए जाएंगे। नई मांगों और नए खर्च से जुड़े प्रस्ताव तैयार होते ही वित्त विभाग को भेजने के निर्देश हैं, ताकि उनकी जांच के लिए पर्याप्त समय मिल सके। अंतिम समय सीमा 30 नवंबर रखी गई है।
इनसेट
अधूरे काम पहले, बाद में नए निर्माण
सरकार ने पूंजीगत कार्यों को लेकर भी स्पष्ट सीमा तय की है। विभागों को पहले पुराने और अधूरे निर्माण कार्यों के लिए पर्याप्त बजट सुनिश्चित करना होगा। इसके बाद ही नए पूंजीगत कार्यों पर विचार किया जाएगा। 202728 के बजट में पूंजीगत कार्यों के लिए कुल प्रावधान का कम से कम 70 फीसदी हिस्सा चालू पूंजीगत कार्यों के लिए और अधिकतम 30 फीसदी नए पूंजीगत कार्यों के लिए रखा जा सकेगा। नए भवनों, परिसंपत्तियों और अन्य निर्माण कार्यों के लिए भी चरणबद्ध बजट व्यवस्था पर जोर दिया गया है। वहीं, परिसंपत्ति सृजन के प्रस्ताव से पहले अधूरे निर्माण और मौजूदा परिसंपत्तियों के रखरखाव के लिए जरूरी बजट सुनिश्चित करना होगा।
जीरो बेस बजटिंग से योजनाओं की समीक्षा
वित्त विभाग ने विभागों को जीरो बेस बजटिंग के आधार पर योजनाओं की समीक्षा करने को कहा है। अनुपयोगी योजनाओं को समाप्त करने पर विचार होगा। खास तौर पर लगातार बढ़ रहे स्टाफ खर्च को देखते हुए प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन पर जोर दिया गया है। शतप्रतिशत राज्य पोषित अनुपयोगी योजनाओं को खत्म कर उनके स्थान पर जरूरी नई योजनाओं के प्रस्ताव देने वाले विभागों के प्रस्तावों पर प्राथमिकता से विचार किया जा सकता है। नई योजनाओं में भी सीधे बड़े पैमाने पर पद सृजन से बचने को कहा गया है। पद सृजन अपरिहार्य होने पर मौजूदा पदों को यथास्थिति रखने, स्थगित अथवा समाप्त करने के बाद न्यूनतम जरूरत के आधार पर नए पद प्रस्तावित किए जाएंगे। नई योजनाओं में एकमुश्त बजट प्रावधान सामान्यत: नहीं किया जाएगा।
नई गाड़ियों के प्रस्ताव सीधे बजट में नहीं
वित्त विभाग ने नई गाड़ियों की खरीद के प्रस्तावों पर भी रोक जैसी व्यवस्था की है। नई गाड़ियों की खरीद के लिए बजट में सीधे प्रस्ताव शामिल नहीं किए जाएंगे। जरूरत होने पर शासन की अनुमति लेकर अनुबंध पर वाहन उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा सकती है। यह व्यवस्था केंद्र सरकार की योजनाओं और बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाओं के तहत वाहनों की खरीद पर भी लागू होगी। राजस्व प्राप्तियों के अनुमान में पिछले तीन वर्षों की वसूली की प्रवृत्ति, बकाया राजस्व की विशेष अभियान से वसूली और कर अपवंचन रोकने से संभावित अतिरिक्त राजस्व को आधार बनाया जाएगा। राजस्व प्राप्तियों से जुड़े अनुमान 30 नवंबर तक भेजने के निर्देश हैं।
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