
अफ्रीकी देश केन्या से भारतीय उद्योग जगत की नामी कंपनी टाटा को बड़ा झटका लगा है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो ने टाटा समूह की दिग्गज इकाई ‘टाटा केमिकल्स मगाडी’ जो सोडा ऐश के उत्पादन से जुड़ी है और 100 साल पुरानी है उसे पूर्ण रूप से बंद कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रपति विलियम रुटो ने टाटा को देश छोड़कर जाने के भी निर्देश दिए हैं।
कुल मिलाकर दिखाया जाए तो राष्ट्रपति विलियम रुटो केन्या में टाटा को अपना कारोबार समेटने और देश छोड़ने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति विलियम रुटो को कहना है कि टाटा कंपनी केन्या के पिछले 100 साल से केन्या के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल भरपूर कर रही है, लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई विकास नहीं कर रही है। बल्कि भारत और ब्रिटेन को फायदा पहुंचा रही है।
सोडा ऐश क्या है ?
सोडा ऐश जिसे रासायनिक भाषा में सोडियम कार्बोनेट कहा जाता है, एक सफेद, बिना गंध वाला पाउडर या दानेदार केमिकल है। यह दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले औद्योगिक रसायनों में से एक है। इसका इस्तेमाल कांच बनाने से लेकर जल उपचार में पानी का PH स्तर संतुलित करने और उसे नरम बनाने के लिए किया जाता है ।
आखिर क्यों पैदा हुआ यह विवाद?
यह पूरा मामला केन्या के काजियाडो जिले में स्थित ‘लेक मगाडी’ से जुड़ा है। यह झील प्राकृतिक सोडा ऐश का एक बहुत बड़ा स्रोत है, जिसका इस्तेमाल कांच , डिटर्जेंट और रसायन बनाने में होता है। ब्रिटिश हुकूमत के दौर से ही इस झील से खनन का अधिकार एक स्थानीय कंपनी के पास था, जिसे साल 2005 में टाटा केमिकल्स ने खरीद लिया था। राष्ट्रपति विलियम रुटो का कहना है कि कंपनी पिछले 100 सालों अंग्रेजों के जमाने से लेकर अब तक यहां के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन उसने स्थानीय स्तर पर विकास के नाम पर कुछ खास नहीं किया।
केन्या सरकार के मुख्य आरोप :
कच्चे माल का निर्यात कंपनी केन्या से कच्चा माल निकालकर सीधे विदेशों में भेज देती है, जिससे केन्या को कोई बड़ा आर्थिक फायदा नहीं मिल रहा। प्रोसेसिंग प्लांट न लगाने पर राष्ट्रपति का तर्क है कि टाटा को केन्या के अंदर ही कांच या अन्य उत्पाद बनाने वाली बड़ी फैक्ट्रियां लगानी चाहिए थीं, ताकि स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता। सरकार अब अपनी प्राकृतिक संपदा को केवल कच्चे माल के रूप में बाहर भेजने के सख्त खिलाफ है।
टाटा केमिकल के प्रतिक्रिया
टाटा ने अपनी बात को आगे रखते हुए ये कहा है की उनकी कंपनी देश के सभी नियम कानून का पालन करते हुए आई है और आगे भी करेगी । इस कंपनी के वहज से कितने लोगों को वह रोजगार मिल रहा था ऐसा कदम उठाकर वह कंपनी के साथ साथ अपना भी नुकसान कर रहे है कंपनी का पक्ष है कि उनका मुख्य काम सोडा ऐश का निष्कर्षण और शुद्धिकरण करना है, फिनिश उत्पाद बनाना उनकी व्यावसायिक नीति का हिस्सा नहीं रहा है।कंपनी ने स्थानीय मासाई समुदाय के लिए सड़कें, अस्पताल, स्कूल और पीने के पानी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं।कंपनी केन्या सरकार के साथ इस मुद्दे पर कानूनी और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है।
अब आगे क्या परिस्थितियां बन रही हैं?
नई कंपनियों का प्रवेश केन्या सरकार का इरादा लेक मगाडी के खनन अधिकार नई कंपनियों को देने का है, जो वहीं पर मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने को तैयार हों इसलिए वह अब नई कंपनियों के लिए दरवाजे खोले जा रहे है । दूसरी तरफ इस खबर के आते ही भारतीय शेयर बाजार में टाटा केमिकल्स के शेयरों में गिरावट देखी गई,क्योंकि केन्या वाला प्लांट कंपनी के वैश्विक सोडा ऐश उत्पादन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है इस साल ये कंपनी भारत के निवेश कर्ताओ का लगभग 30% नुकसान करवा चुकी है ।
पिछले कुछ समय में केन्या में भारतीय कंपनियों के प्रोजेक्ट्स को लेकर सख्ती बढ़ी है। टाटा समूह जैसी साख वाली कंपनी पर ऐसा रुख अफ्रीका में भारतीय निवेश के लिए एक नई चुनौती पेश कर सकता है।



