लालबागचा राजा के ये 2017 के दर्शन हैं, जिसमें बप्पा को सुंदर हरे रंग की पोशाक में देखा जा सकता है. एक तस्वीर में उनके चरण दर्शन की झलक भी है. धोती के किनारे वल पारंपरिक चिह्न जैसे स्वास्तिक और कलश बनाए गए हैं.

2018 में भी लालबागचा राजा का भव्य पंडाल सजाया गया था और बप्पा का दिव्य, विराट स्वरूप मन मोहने वाला था. इस साल 3D प्रोजेक्शन और ग्राफिक्स का यूज भी किया गया था जो पंडाल का अट्रैक्शन पॉइंट था.
2019 में लालबागचा राजा के पंडाल में चंद्रयान की थीम रखी गई थी. ये ‘चंद्रयान2’ की सफलता से इंस्पायर था. इस साल पूरे पंडाल में अंतरिक्ष की थीम पर डेकोरेशन की गई थी. बप्पा का स्वरूप भी हर बार की तरह मनमोहक था.
2020 में कोविड की वजह से पहली बार ऐसा हुआ कि लालबागचा राजा का पंडाल नहीं सजाया गया था. इसके अगले साल 2021 में लालबागचा राजा भगवान विष्णु के अवतार में नजर आए थे. उन्हें शेषनाग पर विराजित दिखाया गया था. इस साल भी आयोजन काफी सादा रखा गया था.
2 साल के अंतराल के बाद 2022 में एक बार फिर से बप्पा का भव्य पंडाल लगाया गया और पूरे धूमधाम से गणेश उत्सव सेलिब्रेट किया गया. इस बार भगवान राम के अयोध्या दरबार की थीम पर डेकोरेशन की गई थी.
2023 में लालबागचा राजा का दरबार की डेकोरेशन की थीम छत्रपति शिवाजी महाराज के राज्याभिषेक के 350वें वर्ष पर बेस्ड रखी गई थी. इसके प्रवेश द्वार को रायगढ़ किले के विशाल मुख्य द्वार की तरह बनाया गया था.
2024 में लालबागचा राजा को मैरून रंग की सुंदर पोशाक में तैयार किया गया था. बप्पा की प्रतिमा 12 फीट ऊंची थी. इस बार भी पंडाल अपनी भव्यता और गणपति जी के बेहद सुंदर स्वरूप के कारण आकर्षण का केंद्र रहा.
साल 2025 में लालबागचा राजा के मंडप को खासतौर पर तिरुपति बालाजी की मुकुट थीम पर तैयार किया गया था. पूरा पंडाल किसी भव्य राजमहल की तरह डेकोरेट किया गया ता और स्वर्ण की सिंहासन पर बप्पा की विशाल प्रतिमा दिल को गदगद कर देने वाली थी.
2026 की लालबागचा राजा की पहली झलक भी सामने आ चुकी है. इस बार की पंडाल की डेकोरेशन उज्जैन के महाकाल से इंस्पायर है. हर बार की तरह इस बार भी बप्पा का दिव्य स्वरूप आंखों में समा गया है.


