PM Modi 76th Birthday: आज 17 सितंबर 2026 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज अपना 76वां जन्मदिन मना रहे हैं. देश के प्रधानमंत्री के तौर पर उन्होंने अपने कार्यकाल के 12 साल से ज्यादा का सफर भी पूरा कर लिया है. जब उन्होंने सत्ता की कमान संभाली थी, तब की आर्थिक स्थितियों से लेकर आज के भारत में एक बड़ा अंतर देखने को मिलता है. एक दौर वो भी था जब वैश्विक मंच पर भारतीय अर्थव्यवस्था को ‘फ्रैजाइल5’ यानी दुनिया की पांच सबसे कमजोर अर्थव्यवस्थाओं की श्रेणी में रखा जाता था. लेकिन आज हालात पूरी तरह से अलग हैं. भारत अब दुनिया की सबसे तेजी से दौड़ने वाली अर्थव्यवस्था का रुतबा हासिल कर चुका है. पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर हम उन 5 बड़े आंकड़ों के जरिए समझेंगे कि कैसे देश ने अर्थव्यवस्था, हर घर तक बैंकिंग, शानदार इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप की दुनिया में एक लंबी छलांग लगाई है.

1 जीडीपी में लगातार शानदार प्रदर्शन
किसी भी देश की आर्थिक मजबूती को उसकी जीडीपी ग्रोथ के पैमाने पर मापा जाता है. अगर हम भारत के हालिया आंकड़ों की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2027 की अप्रैलजून तिमाही में भारत की रियल जीडीपी में 7.8 फीसदी की दमदार बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस शानदार प्रदर्शन के पीछे मुख्य रूप से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के साथ सर्विस सेक्टर का सबसे बड़ा योगदान रहा है.
सरकार की तरफ से जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस दौरान रियल ग्रॉस वैल्यू एडेड में भी 8.2 फीसदी का इजाफा हुआ है. निवेश के मोर्चे पर 11.9 फीसदी की ग्रोथ देखी गई, जबकि घरेलू खपत 7.1 फीसदी बढ़ी. एक्सपोर्ट में 12 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है. इन सबके दम पर भारत की नॉमिनल जीडीपी का अनुमान लगभग 4.15 ट्रिलियन डॉलर लगाया जा रहा है. ये आंकड़े इसलिए भी खास हैं क्योंकि जब दुनिया भर में व्यापारिक अस्थिरता बनी हुई है, तब भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है.
2 विदेशी खजाने में डॉलर की रिकॉर्ड बारिश
देश की आर्थिक सुरक्षा के लिए विदेशी मुद्रा भंडार का मजबूत होना बहुत जरूरी होता है. इस मामले में भी भारत ने एक नया मुकाम हासिल कर लिया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नए डेटा के मुताबिक, 4 सितंबर 2026 को खत्म हुए हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 785.7 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया. इस ऐतिहासिक आंकड़े को छूने के साथ ही भारत अब पूरी दुनिया में विदेशी मुद्रा भंडार रखने के मामले में चौथा सबसे बड़ा देश बन चुका है.
आरबीआई के डेटा से ये भी पता चलता है कि देश के इस विदेशी खजाने में पिछले 10 हफ्तों से लगातार इजाफा हो रहा है. केवल इस 10 हफ्ते की अवधि में ही देश के भंडार में लगभग 120 अरब डॉलर की भारी भरकम रकम जुड़ी है. ये भारी भरकम भंडार किसी भी तरह के वैश्विक संकट की स्थिति में देश की इकोनॉमी को एक बड़ा सुरक्षा कवच प्रदान करता है.
3 जनधन योजना से वित्तीय क्रांति
देश के अंतिम व्यक्ति तक बैंकिंग सिस्टम को पहुंचाने के मकसद से लाई गई प्रधानमंत्री जनधन योजना ने जमीन पर बड़े बदलाव किए हैं. 2 सितंबर 2026 तक के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के लाभार्थियों की कुल संख्या बढ़कर 59.21 करोड़ के पार जा चुकी है. इन करोड़ों बैंक खातों में आम लोगों ने अपनी छोटीछोटी बचत से 3.17 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा की है.
इसके साथ ही लोगों की सहूलियत के लिए 41.39 करोड़ रुपे डेबिट कार्ड भी जारी किए गए हैं. इन आंकड़ों में सबसे खास बात महिलाओं की बढ़ती हिस्सेदारी है. कुल खुले खातों में से 32.98 करोड़ खाते देश की महिलाओं के नाम पर हैं. इतना ही नहीं, 46.03 करोड़ खाते ग्रामीण के साथ अर्धशहरी इलाकों के लोगों के हैं. ये साफ करता है कि वित्तीय समावेशन का फायदा देश के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रहा है.
4 देश में फैल रहा नेशनल हाईवे का जाल
देश के व्यापार को गति देने के लिए सड़कों का बेहतर होना सबसे बुनियादी जरूरत है. इंफ्रास्ट्रक्चर के मोर्चे पर पिछले एक दशक में नेशनल हाईवे नेटवर्क में बड़े स्तर पर काम हुआ है. वित्तीय वर्ष 2014 में देश के अंदर नेशनल हाईवे का कुल नेटवर्क सिर्फ 91,287 किलोमीटर तक फैला था. आज ये दायरा काफी बड़ा होकर 146,572 किलोमीटर तक पहुंच गया है. इसी साल की शुरुआत में पेश किए गए इकोनॉमिक सर्वे ने भी इसकी पुष्टि की थी.
सर्वे के मुताबिक, साल 2004 से लेकर 2014 के बीच हर साल औसतन 4,174 किलोमीटर नेशनल हाईवे का निर्माण किया जाता था. वहीं, 2014 से 2025 के बीच ये निर्माण की गति दोगुनी से भी ज्यादा हो गई. अब हर साल औसतन 9,704 किलोमीटर हाईवे का निर्माण किया जा रहा है. सड़कों का ये नेटवर्क देश के विकास को सीधे तौर पर रफ्तार दे रहा है.
5 स्टार्टअप इकोसिस्टम ने बनाया नया मुकाम
युवाओं के नए विचारों को बिजनेस में बदलने के लिए देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है. सरकारी आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2016 में डीपीआईआईटी द्वारा मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या महज 502 हुआ करती थी. अगस्त 2026 तक आतेआते ये संख्या 2.47 लाख के बड़े आंकड़े को पार कर गई है.
सरकार का भी ये कहना है कि भारत अब पूरी दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है. हाल ही में सरकार ने स्टार्टअप इंडिया के नियमों में कुछ अहम बदलाव भी किए हैं. इसके तहत अब स्टार्टअप के रूप में मान्यता पाने के लिए टर्नओवर की लिमिट को 100 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 200 करोड़ रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा, डीपटेक स्टार्टअप के लिए इस सीमा को 300 करोड़ रुपये तय किया गया है.



