
टाइप-2 डायबिटीज अचानक नहीं होती, बल्कि इसकी शुरुआत सालों पहले ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ से हो जाती है। इंसुलिन एक हार्मोन है, जो पैंक्रियाज से बनता है और भोजन से मिलने वाले ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है,ताकि उसका इस्तेमाल ऊर्जा के लिए किया जा सके। जब शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन हार्मोन पर सही तरीके से प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो ब्लड शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है। Insulin Resistance के शुरुआती चरण में शरीर इसकी भरपाई करने के लिए पैंक्रियाज से ज्यादा इंसुलिन बनवा सकता है। इस वजह से कुछ समय तक ब्लड शुगर सामान्य सीमा में रह सकती है और व्यक्ति को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। यही कारण है कि Insulin Resistance कई सालों तक बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है। बाद में जब शरीर अतिरिक्त इंसुलिन बनाकर भी ब्लड शुगर को सामान्य रखने में कामयाब नहीं रहता, तब ब्लड शुगर बढ़ने लगती है और व्यक्ति प्री-डायबिटीज की स्थिति में पहुंच सकता है।
National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases(NIH) के मुताबिक इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की मांसपेशियों, लिवर और फैट की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं। इंसुलिन का काम ब्लड में मौजूद ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाना है, लेकिन इंसुलिन रेजिस्टेंस में कोशिकाएं इंसुलिन के संकेत को कम प्रभावी ढंग से स्वीकार करती हैं। इसकी भरपाई के लिए पैंक्रियाज अधिक इंसुलिन बनाने लगता है जिससे शुरुआत में ब्लड शुगर नॉर्मल रह सकता है और लम्बे समय तक बॉडी में इसके कोई लक्षण नहीं दिखते।
इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरुआती लक्षण
इंसुलिन रेजिस्टेंस की सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट या खास लक्षण नहीं होते। कई लोगों में यह स्थिति तब तक पता नहीं चलती, जब तक ब्लड शुगर बढ़कर प्री-डायबिटीज या डायबिटीज की स्थिति तक नहीं पहुंच जाती। फिर भी शरीर में कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
गर्दन या बगल की स्किन का काला और मोटा होना
इंसुलिन रेजिस्टेंस का एक महत्वपूर्ण दिखाई देने वाला संकेत Acanthosis Nigricans है। इसमें गर्दन के पीछे, बगल, जांघों के बीच या शरीर की दूसरी फोल्ड वाली जगहों पर स्किन काली, मोटी और मखमली जैसी दिखाई दे सकती है। कई लोग इसे गंदगी या टैनिंग समझते हैं, लेकिन यह केवल रगड़ने या साफ करने से दूर नहीं होती।
शरीर पर छोटे-छोटे मांस के उभार होना
गर्दन, बगल, पलकों या स्तनों के नीचे छोटे-छोटे नरम उभार यानी skin tags आम होते हैं और उनके कोई नुकसान भी नहीं होते। लेकिन अगर शरीर पर अचानक कई skin tags होने लगें, खासकर उनके साथ गर्दन या बगल की त्वचा काली और मोटी भी हो रही हो, तो डॉक्टर से ब्लड शुगर की जांच के बारे में बात की जा सकती है। सिर्फ एक-दो skin tags को इंसुलिन रेजिस्टेंस का लक्षण नहीं माना जा सकता। अगर शरीर पर अचानक बहुत सारे ऐसे उभार निकलने लगें, खासकर गर्दन की त्वचा काली और मोटी होने के साथ, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
पेट के आसपास चर्बी बढ़ना
कमर या पेट के आसपास लगातार फैट बढ़ना इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है। खासतौर पर visceral fat, यानी पेट के अंदर अंगों के आसपास जमा फैट, मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए केवल वजन देखना पर्याप्त नहीं है; कमर का साइज भी मायने रखता है।
खाना खाने के बाद ज्यादा थकान या नींद आना
खाने के बाद थोड़ी नींद या सुस्ती सामान्य हो सकती है, खासकर भारी भोजन करने के बाद। इसलिए सिर्फ खाना खाने के बाद नींद आना इंसुलिन रेजिस्टेंस का प्रमाण नहीं है, लेकिन अगर इसके साथ लगातार और बिना किसी स्पष्ट कारण के थकान रहती है और इसके साथ ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब आना या धुंधला दिखाई देने जैसे लक्षण भी हों, तो ब्लड शुगर की जांच कराना जरूरी है।
बार-बार भूख लगना और मीठा खाने की इच्छा
कुछ लोगों में बार-बार भूख लगना या खासकर मीठे और कार्बोहाइड्रेट वाले खाद्य पदार्थों की craving देखने को मिल सकती है। अगर डाइट से जुड़े इस बदलाव के साथ ही थकान और बाकी लक्षण भी बॉडी में दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।
महिलाओं में पीरियड्स का अनियमित होना
महिलाओं में इंसुलिन रेजिस्टेंस का संबंध PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) से हो सकता है। PCOS में पीरियड्स अनियमित या मिस हो सकते हैं और चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल, मुंहासे तथा वजन बढ़ने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। अगर बॉडी में इस तरह के कुछ बदलाव दिखें तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। हालांकि, अनियमित पीरियड्स के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं, इसलिए इसे अकेले इंसुलिन रेजिस्टेंस का लक्षण नहीं माना जा सकता।
बढ़ी हुई प्यास और बार-बार पेशाब आना
बहुत ज्यादा प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में, धुंधला दिखाई देना, बिना वजह थकान और घाव का देर से भरना आमतौर पर बढ़े हुए ब्लड शुगर से जुड़े संकेत हैं। ये शुरुआती इंसुलिन रेजिस्टेंस के बजाय तब दिखाई दे सकते हैं जब स्थिति प्री-डायबिटीज या डायबिटीज की ओर बढ़ चुकी हो।
ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल में बदलाव
इंसुलिन रेजिस्टेंस अक्सर अकेले नहीं होती। इसके साथ पेट की चर्बी बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, हाई ट्राइग्लिसराइड्स और HDL यानी ‘अच्छे’ कोलेस्ट्रॉल का कम होना जैसे मेटाबॉलिक बदलाव भी देखे जा सकते हैं। इसलिए केवल ब्लड शुगर नहीं, बल्कि ब्लड प्रेशर और लिपिड प्रोफाइल पर भी ध्यान देना जरूरी है।
किन टेस्ट की मदद से होती है इंसुलिन रेजिस्टेंस की पुष्टि?
सबसे जरूरी बात यह है कि सिर्फ लक्षण देखकर इंसुलिन रेजिस्टेंस की पुष्टि नहीं की जा सकती। डॉक्टर व्यक्ति की उम्र, वजन, कमर के साइज, फैमिली हिस्ट्री और दूसरे जोखिम कारकों को देखते हुए ब्लड टेस्ट की सलाह दे सकते हैं। कुछ टेस्ट जैसे
- Fasting Blood Glucose,
- HbA1c
- जरूरत पड़ने पर Oral Glucose Tolerance Test (OGTT) की मदद से प्री-डायबिटीज या डायबिटीज का पता किया जाता है।
- कुछ मामलों में डॉक्टर fasting insulin और HOMA-IR जैसे टेस्ट कराने का भी विचार करते हैं।
कब लेना चाहिए डॉक्टर से सलाह ?
अगर गर्दन या बगल में अचानक काली-मोटी त्वचा दिखाई दे, शरीर पर बहुत सारे skin tags विकसित हो रहे हों, कमर तेजी से बढ़ रही हो या परिवार में डायबिटीज का इतिहास हो, तो डॉक्टर से blood sugar screening के बारे में बात करना उचित है। वहीं बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब, धुंधला दिखना, अत्यधिक कमजोरी या बिना वजह वजन कम होने जैसे लक्षण हों तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इंसुलिन रेजिस्टेंस के बताए गए संकेत हर व्यक्ति में दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है और ये लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर इंसुलिन रेजिस्टेंस, प्री-डायबिटीज या डायबिटीज का निदान नहीं किया जा सकता। सही जांच और स्थिति के आकलन के लिए डॉक्टर से परामर्श लें।



