UP Election 2027 : में 2027 से पहले अपने संगठन और सहयोगी दलों के बीच तालमेल मजबूत करने में जुटी है। पार्टी की कोशिश उन नेताओं और सहयोगियों से दूरी कम करने की है, जो किसी न किसी मुद्दे पर नाराज बताए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ने की विधायक अदिति सिंह से मुलाकात की, वहीं के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े गोरखपुर पहुंचकर निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद से मिले।

अदिति सिंह से CM योगी की मुलाकात
ने अदिति सिंह से मुलाकात की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। दोनों नेताओं की इस मुलाकात को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। अदिति सिंह रायबरेली से बीजेपी की विधायक हैं और पिछले कुछ समय से उनके रुख को लेकर राजनीतिक चर्चाएं होती रही हैं।
संजय निषाद के घर पहुंचे विनोद तावड़े
दूसरी ओर, पूर्वांचल दौरे पर पहुंचे बीजेपी के प्रदेश प्रभारी विनोद तावड़े स्थित निषाद पार्टी के कार्यालय पहुंचे और संजय निषाद से मुलाकात की। इस दौरान संजय निषाद की पत्नी, उनके बेटे प्रवीण निषाद, विधायक बेटे सरवन निषाद और परिवार के अन्य सदस्यों ने तावड़े का स्वागत किया। मुलाकात के दौरान संजय निषाद के परिवार की ओर से विनोद तावड़े को लकड़ी की नाव का प्रतीक चिन्ह भी भेंट किया गया। बीजेपी और निषाद पार्टी के बीच आगामी चुनाव को लेकर बेहतर तालमेल की कोशिशों के बीच इस मुलाकात को अहम माना जा रहा है।
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क्या नाराज नेताओं को साधने में जुटी BJP?
से पहले बीजेपी के सामने अपने सहयोगियों और नेताओं के बीच बेहतर समन्वय बनाए रखने की चुनौती है। संजय निषाद लंबे समय से गठबंधन में सीटों के बंटवारे और निषाद आरक्षण जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखते रहे हैं। उनकी मांग है कि आगामी चुनाव में उनकी पार्टी को गठबंधन में उचित हिस्सेदारी मिले और निषाद आरक्षण के मुद्दे पर सरकार ठोस पहल करे। विनोद तावड़े की संजय निषाद से मुलाकात से यह संकेत जरूर मिला है कि बीजेपी गठबंधन के भीतर संवाद बनाए रखने पर जोर दे रही है। इससे पहले बीजेपी के संगठन महामंत्री भी संजय निषाद से मुलाकात कर चुके हैं।
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कौशल किशोर ने भी दिए नरमी के संकेत
इसी बीच पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर की ओर से भी बीजेपी के साथ बने रहने के संकेत मिले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर कौशल किशोर ने अपनी पत्नी के साथ दीप जलाकर उन्हें शुभकामनाएं दीं और तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की। कौशल किशोर की इस पोस्ट को भी बीजेपी से उनकी दूरी कम होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। ऐसे में 2027 से पहले पार्टी एक ओर संगठन को मजबूत करने में जुटी है, तो दूसरी ओर नाराज नेताओं और सहयोगी दलों के साथ संवाद बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
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