
लखनऊ, अमृत विचार। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कानपुर के गैंगस्टर विकास दुबे से जुड़ी कथित मुठभेड़ की तरफ इशारा करते हुए तंज किया कि उनकी पार्टी अगर उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आती है तो वह ‘रिमोट सेंसिंग’ विभाग से ‘कार पलटने’ वाली घटना की जांच कराएंगे।
कानपुर देहात के बिकरू इलाके में दोतीन जुलाई 2020 की रात को आठ पुलिसकर्मियों की घात लगाकर छत से गोलियां चलाते हुए हत्या किये जाने की वारदात के मुख्य आरोपी गैंगस्टर विकास दुबे की 10 जुलाई को उज्जैन से कानपुर लाते समय पुलिस की गाड़ी कथित रूप से दुर्घटनाग्रस्त होकर ‘पलट’ गयी थी और पुलिस का दावा है कि हादसे के बाद भागने की कोशिश में दुबे पुलिस से हुई मुठभेड़ में मारा गया था।
सपा प्रमुख ने लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि रिमोट सेंसिंग के साथसाथ सभी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल मुख्य रूप से किसानों के फायदे के लिए और साथ ही स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और कृषि के क्षेत्रों में किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने किसी का नाम लिये बगैर गैंगस्टर विकास दुबे की कथित मुठभेड़ में हुई मौत की ओर इशारा करते हुए कहा, ”रिमोट सेंसिंग विभाग एक बहुत पुराना विभाग है। हम निश्चित रूप से इस विभाग को उस घटना की जांच का काम सौंपेंगे कि आखिर गाड़ी कैसे पलटी थी।” उन्होंने कहा, ”हम उन्हें अलग से फंड देंगे… चाहे वह 50 करोड़ रुपये हो या 100 करोड़ रुपये… और उन्हें उन गाड़ियों की आवाजाही का पता लगाने का निर्देश देंगे कि वे कहां से चली थी और उस जगह तक कैसे पहुंचीं? इसके अलावा, हम अपराध से निपटने के लिए रिमोट सेंसिंग और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का इस्तेमाल करेंगे, जिससे फर्जी एनकाउंटर जैसी घटनाओं पर भी रोशनी डालने में मदद मिलेगी।”
एनकाउंटर पर पहले भी अखिलेश उठा चुके हैं सवाल
सपा प्रमुख ने गैंगस्टर विकास दुबे के मुठभेड़ में मारे जाने पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि कार पलटी नहीं थी, बल्कि यह सरकार को गिरने से बचाने की कोशिश थी ताकि ‘सच’ सामने न आए। पुलिस ने दावा किया था कि उज्जैन से कानपुर ले जाई जा रही पुलिस की गाड़ी के 10 जुलाई को दुर्घटनाग्रस्त होने और विकास दुबे के मौके से भागने की कोशिश करने के बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया था।


