
अयोध्या/नई दिल्ली, अमृत विचार: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अयोध्या स्थित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में चंदे और चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों की जांच कर रही विशेष जांच टीम ने अपनी जांच का अधिकांश काम पूरा कर लिया है। सरकार के मुताबिक, जांच की बाकी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अगले दो दिनों में सक्षम अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले चंदे और चढ़ावे के प्रबंधन में कथित वित्तीय अनियमितताओं की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई है।
सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि मामले की स्टेटस रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दाखिल कर दी गई है। उन्होंने बताया कि चार्जशीट दाखिल करने की समयसीमा 25 सितंबर को समाप्त हो रही है और अगले दो दिनों में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी।
सरकार की ओर से बताया गया कि जांच का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। बाकी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद सक्षम अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस जानकारी को रिकॉर्ड पर लेते हुए संबंधित सेशन जज को कानून के मुताबिक उचित आदेश पारित करने की अनुमति दे दी।
सीसीटीवी में दान चोरी की 105 घटनाएं
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष रखी गई स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया कि एसआईटी ने सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपियों की पहचान की। इसके साथ ही मंदिर में दान और चढ़ावे से संबंधित रिकॉर्ड की भी जांच की गई। रिपोर्ट के मुताबिक, सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण में मंदिर में दान की चोरी से जुड़ी 105 घटनाएं सामने आईं। एसआईटी ने इन घटनाओं से संबंधित फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
कीमती चढ़ावे की रसीदें सॉफ्टवेयर से, SBI लॉकर में रखे जाते हैं
स्टेटस रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया गया कि चढ़ावे के तौर पर प्राप्त कीमती वस्तुओं की रसीदें सॉफ्टवेयर के माध्यम से तैयार की जाती हैं। ऐसी कीमती वस्तुओं को भारतीय स्टेट बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर SIT का हुआ था पुनर्गठन
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को मामले की जांच कर रही एसआईटी का पुनर्गठन करने और निष्पक्ष, त्वरित व गुणवत्तापूर्ण जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रदेश सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया था कि वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को शामिल करते हुए एसआईटी का पुनर्गठन कर दिया गया है और टीम ने जांच की जिम्मेदारी संभाल ली है। पुनर्गठित एसआईटी की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक किरण एस. कर रहे हैं। अयोध्या के डीआईजी सोमेन वर्मा और एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर इसके सदस्य हैं।



