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​Puffer Fishing: पहले खूब प्यार, फिर अचानक दूरी… क्या है डेटिंग की दुनिया का ‘पफर फिशिंग’ ट्रेंड?

​Puffer Fishing: पहले खूब प्यार, फिर अचानक दूरी… क्या है डेटिंग की दुनिया का ‘पफर फिशिंग’ ट्रेंड?

लखनऊः रिश्ते की शुरुआत अक्सर बेहद खूबसूरत होती है। लगातार बातचीत, एकदूसरे की पसंदनापसंद जानने की कोशिश, छोटीछोटी बातों की परवाह और हर वक्त साथ रहने की इच्छा… सब कुछ ऐसा लगता है जैसे सामने वाला व्यक्ति ही आपकी दुनिया का सबसे अहम हिस्सा बन गया हो, लेकिन कुछ समय बाद अचानक यही व्यक्ति बातचीत कम करने लगे, मिलने से बचने लगे और रिश्ते के भविष्य की बात आते ही पीछे हटने लगे, तो मन में कई सवाल उठना स्वाभाविक हैं।

आखिर ऐसा अचानक क्यों हुआ? क्या सामने वाले की भावनाएं बदल गईं या वह शुरुआत से ही रिश्ते को लेकर गंभीर नहीं था? डेटिंग की बदलती दुनिया में इस तरह के व्यवहार के लिए इन दिनों ‘पफर फिशिंग’ शब्द का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसमें व्यक्ति शुरुआत में रिश्ते में जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी और अपनापन दिखाता है, लेकिन जैसे ही उसे रिश्ता गंभीर होता महसूस होता है, वह भावनात्मक रूप से पीछे हटने लगता है।

क्या है पफर फिशिंग

आसान भाषा में कहें, तो पफर फिशिंग उस व्यवहार को कहा जा सकता है, जिसमें कोई व्यक्ति डेटिंग के शुरुआती दौर में बेहद उत्साहित और जुड़ा हुआ दिखाई देता है। वह घंटों बातचीत करता है, अपनी निजी बातें साझा करता है, लगातार मैसेज करता है और सामने वाले के साथ भविष्य की संभावनाओं को लेकर भी उत्साह दिखा सकता है। शुरुआत में ऐसा लगता है कि दोनों के बीच रिश्ता तेजी से मजबूत हो रहा है, लेकिन जैसेजैसे नजदीकियां बढ़ती हैं और रिश्ता कमिटमेंट की ओर बढ़ने लगता है, वही व्यक्ति अचानक बदलने लगता है। बातचीत कम हो जाती है, जवाब आने में ज्यादा समय लगने लगता है और पहले जैसा उत्साह दिखाई नहीं देता। कई बार वह रिश्ते के भविष्य पर बात करने से भी बचने लगता है। यह बदलाव दूसरे व्यक्ति के लिए काफी उलझन पैदा कर सकता है, क्योंकि उसे समझ नहीं आता कि आखिर ऐसा क्या क्या बदल गया।

क्यों पड़ा पफर फिशिंग नाम

इस शब्द का संबंध समुद्र में पाई जाने वाली पफर फिश यानी गुब्बारा मछली के सुरक्षात्मक व्यवहार से जोड़ा जाता है। खतरा महसूस होने पर यह मछली अपने शरीर में पानी भरकर खुद को फुला लेती है। इसके शरीर के कांटे भी उभर आते हैं, जिससे वह संभावित खतरे से खुद को बचा सके। रिश्तों में इसी व्यवहार को एक रूपक की तरह देखा जाता है, जब किसी व्यक्ति को लगता है कि रिश्ता जरूरत से ज्यादा करीब या गंभीर होता जा रहा है,तो वह खुद को भावनात्मक रूप से सुरक्षित रखने के लिए पीछे हटने लगता है। हालांकि हर बार दूरी बनाने को पफर फिशिंग मान लेना भी सही नहीं है। इसके पीछे व्यक्ति की परिस्थितियां व मानसिक स्थिति अलगअलग हो सकती हैं।

क्यों करते हैं लोग ऐसा

पफर फिशिंग के पीछे एक नहीं, कई वजहें हो सकती हैं। कुछ लोग शुरुआत में भावनात्मक जुड़ाव तो चाहते हैं, लेकिन गंभीर रिश्ते या कमिटमेंट के लिए तैयार नहीं होते। जब उन्हें महसूस होता है कि सामने वाला व्यक्ति रिश्ते को लेकर गंभीर हो रहा है, तो वे दूरी बनाने लगते हैं। कई बार इसके पीछे पिछले रिश्ते का खराब अनुभव भी हो सकता है। धोखा, भावनात्मक चोट या किसी रिश्ते का दर्दनाक अंत व्यक्ति के भीतर दोबारा चोट खाने का डर पैदा कर सकता है। ऐसे में वह किसी नए व्यक्ति के करीब तो आना चाहता है, लेकिन जैसे ही रिश्ता गंभीर होने लगता है, पुराना डर उसे पीछे खींचने लगता है।

कैसे पहचानें संकेत

इस व्यवहार को पहचानने के लिए किसी एक घटना के बजाय पार्टनर के व्यवहार में लगातार दिखाई देने वाले बदलावों पर ध्यान देना चाहिए।

शुरुआत में जरूरत से ज्यादा जुड़ाव इसका एक संकेत हो सकता है। पार्टनर लगातार बात करना चाहता है, हर छोटीबड़ी बात साझा करना और आपके साथ ज्यादा से ज्यादा समय बिताने की कोशिश करता है।

इसके बाद रिश्ता गंभीर होते ही दूरी बढ़ने लगती है। कमिटमेंट, भविष्य या रिश्ते की दिशा को लेकर बातचीत शुरू होते ही उसका उत्साह कम हो सकता है।

मैसेज और बातचीत में कमी भी ध्यान देने योग्य संकेत है, जो व्यक्ति पहले तुरंत जवाब देता था, वह अब घंटों या दिनों तक जवाब न दे और बातचीत का प्रयास भी कम कर दे, तो इस बदलाव को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

एक और संकेत है भविष्य की बातचीत से बचना। साथ रहने, शादी या लंबे समय तक रिश्ते को आगे बढ़ाने जैसे सवालों पर वह बारबार विषय बदलने लगे, तो उसके मन में चल रही असमंजस की स्थिति को समझना जरूरी है।

कभीकभी नजदीकी के तुरंत बाद दूरी भी दिखाई दे सकती है। भावनात्मक या रोमांटिक रूप से करीब आने के बाद अचानक ठंडा व्यवहार करना सामने वाले को खासा भ्रमित कर सकता है।

क्या है समाधान

अगर आपको लगता है कि आपका पार्टनर बारबार करीब आने और दूर जाने का व्यवहार कर रहा है, तो सबसे पहले जल्दबाजी में कोई निष्कर्ष न निकालें। हर दूरी पफर फिशिंग नहीं होती। काम का तनाव, पारिवारिक जिम्मेदारियां, व्यक्तिगत परेशानियां या पुराने रिश्ते का असर भी किसी के व्यवहार में बदलाव की वजह हो सकता है। ऐसे में सबसे बेहतर रास्ता है खुलकर बातचीत करना। आरोप लगाने के बजाय अपनी भावनाओं के बारे में बताएं। सामने वाले से पूछें कि वह रिश्ते को किस नजरिए से देखता है और उसकी अपेक्षाएं क्या हैं? किसी भी रिश्ते में प्यार और आकर्षण के साथ स्पष्टता भी जरूरी है। अगर एक व्यक्ति रिश्ते को गंभीरता से लेना चाहता है और दूसरा लगातार उससे बच रहा है, तो इस अंतर को समझना जरूरी है। स्वस्थ रिश्ता वही है, जिसमें दोनों अपनी भावनाएं व्यक्त कर सकें, एकदूसरे की सीमाओं का सम्मान करें और रिश्ते की दिशा को लेकर स्पष्ट हों। आखिरकार, रिश्ते में हर बदलाव को किसी ट्रेंड का नाम देना जरूरी नहीं। महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने अनुभव को समझें, अपनी भावनाओं को महत्व दें और जरूरत पड़ने पर स्पष्ट संवाद करें। प्यार में नजदीकी जितनी जरूरी है, उतना ही जरूरी है भरोसा, सम्मान और भावनात्मक सुरक्षा।

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