नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद तेज हो गया है। चुनाव आयोग के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्टों के मुताबिक, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में 13.37 करोड़ नाम बाहर रह गए हैं। यह संख्या एसआईआर से पहले के मतदाता आधार की तुलना में करीब 14.1% है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे को लेकर चुनाव आयोग और भाजपा पर निशाना साधा है। 24 सितंबर को दिए बयान में उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाया जाना लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के लिए गंभीर मामला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग भी की। ये प्रियंका गांधी के आरोप हैं; इन्हें अदालत द्वारा स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा गया है।
क्या 13 करोड़ लोगों के वोट स्थायी रूप से खत्म हो गए?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। 13.37 करोड़ का आंकड़ा ड्राफ्ट मतदाता सूचियों में बाहर रह गए नामों का है, न कि यह प्रमाण कि सभी लोगों के नाम स्थायी रूप से मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। एसआईआर की प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया जाता है।
चुनाव आयोग की मतदाता सेवा वेबसाइट पर एसआईआर2026 के लिए नाम खोजने, नोटिस के जवाब में दस्तावेज जमा करने और संबंधित फॉर्म भरने की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।
प्रियंका गांधी ने क्या कहा?
प्रियंका गांधी ने मतदाता सूची में कथित बड़े पैमाने पर बदलाव को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया में किसी भी तरह का हस्तक्षेप लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है और जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
एसआईआर को लेकर राजनीतिक विवाद के साथसाथ चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया पर भी रिपोर्टें सामने आई हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि दो चुनाव आयुक्तों ने कुछ फैसलों और मतदाता नामों को जोड़नेहटाने की प्रक्रिया पर आपत्तियां दर्ज की थीं। हालांकि, आयोग की ओर से इन फैसलों को लेकर पूर्ण आयोग की सहमति का पक्ष सामने आया है।
इस पूरे मामले में ड्राफ्ट सूची और अंतिम मतदाता सूची के बीच अंतर महत्वपूर्ण है। जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, उनके लिए संबंधित राज्य की निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दाखिल करने का रास्ता मौजूद है।



