अभिनेत्री तिलोत्तमा शोम ने महिलाओं की सुरक्षा, डर और रोजमर्रा की जिंदगी में सतर्क रहने के साथसाथ दूसरों पर भरोसा करने की मुश्किल के बारे में बात की है। दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता के बीच उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक पोस्ट साझा की। यह चर्चा लेडी श्रीराम कॉलेज के पिछले गेट के पास आस्था कुंज पार्क में 17 साल की लड़की के साथ हुए गैंग रेप के बाद और तेज हुई है।

मुंबई की एक घटना ने तिलोत्तमा को सोचने पर किया मजबूर
तिलोत्तमा ने अपनी पोस्ट में मुंबई के जुहू में हुई एक सामान्यसी घटना का जिक्र किया। उन्होंने लिखा, “कल जुहू में एक ट्रैफिक सिग्नल पर मैंने फुटपाथ पर एक युवा लड़की को देखा, जो लोहे की रेलिंग से टिककर अपने फोन में व्यस्त थी।”
तिलोत्तमा ने बताया कि लड़की बिल्कुल सहज थी और उसके आसपास से कई पुरुष गुजर रहे थे। उन्होंने लिखा कि कुछ लोगों ने लड़की की तरफ देखा और कुछ की नजर थोड़ी देर तक उस पर टिकी रही, लेकिन उस समय कुछ भी आपत्तिजनक नहीं हुआ।
इसके बावजूद तिलोत्तमा को चिंता होने लगी। उन्होंने लिखा, “मैं उसे फोन से दूर रहने और सतर्क रहने के लिए कहना चाहती थी।” लेकिन साथ ही वह यह भी चाहती थीं कि वह लड़की उस पल की शांति का आनंद ले और बिना डर के अपनी जिंदगी जिए।
जब एक व्यक्ति लड़की के बहुत करीब से गुजरा तो तिलोत्तमा को अपनी कार से उतरकर उसके पास जाने का मन हुआ। हालांकि, उन्हें यह भी पता था कि उस समय कुछ हुआ नहीं था और शायद कभी होता भी नहीं। उन्होंने लिखा, “उस आदमी ने बस वहां से गुजर गया, कुछ नहीं हुआ।” इसके बाद उन्होंने खुद को समझाते हुए कहा, “यह बॉम्बे है, आराम करो, आराम करो।”
दिल्ली और एलएसआर से जुड़ी अपनी यादें भी कीं साझा
तिलोत्तमा की पोस्ट में दिल्ली का जिक्र भी खास है। वह लेडी श्रीराम कॉलेज की पूर्व छात्रा हैं और उन्होंने बताया कि दिल्ली में 17 साल रहने के दौरान उन्होंने सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल किया था।
उनकी यह पोस्ट ऐसे समय आई है जब आस्था कुंज की घटना के बाद एलएसआर की छात्राएं सुरक्षा को लेकर विरोध कर रही हैं। छात्राओं ने कॉलेज के पास करीब 500 मीटर लंबे उस रास्ते को लेकर चिंता जताई है, जहां अंधेरा होने के बाद आनाजाना मुश्किल हो जाता है।
डर के साथ जीने पर तिलोत्तमा ने उठाए सवाल
तिलोत्तमा ने अपनी पोस्ट में अस्पतालों में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने लिखा, “कुछ रात पहले मेरी जानपहचान का एक व्यक्ति अस्पताल में था। आज सुबह मैं एक बुरे सपने से उठी। क्या अस्पताल हमारे लिए सुरक्षित हैं? अस्पताल के बिस्तर पर बेहोश पड़ी महिला, क्या वह सुरक्षित है?”
यह सवाल पानीपत के सिविल अस्पताल से जुड़े अगस्त के एक मामले की पृष्ठभूमि में भी आया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने खुद संज्ञान लेते हुए उन आरोपों पर ध्यान दिया था, जिनमें 57 साल की एक महिला के साथ जांच के दौरान रेप किए जाने की बात कही गई थी। महिला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
तिलोत्तमा ने अपनी सोच में मौजूद विरोधाभास को भी स्वीकार किया। उन्होंने लिखा, “लेकिन कुछ हुआ नहीं।” इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भले ही यहां कुछ न हो, देश के किसी दूसरे हिस्से में किसी और के साथ ऐसा हो रहा होता है।
भरोसा बनाए रखने की उम्मीद भी जताई
अपनी पोस्ट के आखिर में तिलोत्तमा ने डर के बावजूद भरोसा बनाए रखने की बात कही। उन्होंने लिखा, “हम बारबार टूटते हैं और फिर बारबार एक साथ आते हैं, क्योंकि हम अब भी एक अविश्वसनीय भारत की उम्मीद कर सकते हैं।” तिलोत्तमा शोम को आखिरी बार सनी देओल की फिल्म ‘इक्का’ में देखा गया था।



