उत्तर प्रदेश में 2027 की चुनावी तैयारी के बीच बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन का दो दिन का पश्चिमी यूपी दौरा कई सियासी संदेश दे गया. संगठन को मजबूत करने की कवायद के बीच नितिन नबीन ने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एक साफ संदेश दिया है कि स्वागत के नाम पर शक्ति प्रदर्शन नहीं चाहिए. सूत्रों का कहना है कि नितिन नबीन ने बीजेपी नेताओं को एक लाईन में संदेश दिया कि न बुलडोजर से स्वागत होगा और न ही बड़े होर्डिंग लगेंगे.

दरअसल, पश्चिमी यूपी के दौरे के पहले दिन नितिन नबीन का बुलडोजर से स्वागत हुआ था. दूसरे दिन भी कई जगह पर बुलडोजर से स्वागत की तैयारी थी लेकिन नितिन नबीन का काफिला स्वागत स्थल पर रूका ही नहीं. इस दौरान हाथ में माला लेकर बीजेपी के बड़ेबड़े नेता खड़े रह गए और नितिन नबीन का काफिला आगे निकल गया. इसका एक वीडियो भी खूब वायरल हुआ था. इसके बाद नितिन नबीन ने बीजेपी नेताओं को नसीहत दी.
बताया जा रहा है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने साफ कहा कि उनके स्वागत में बुलडोजर से पुष्पवर्षा करने और बड़ेबड़े होर्डिंग लगाने की जरूरत नहीं है… इसके बजाय हर कार्यकर्ता अपने घर पर बीजेपी का झंडा लगाए और समर्थकों के घर पर झंडा लगवाए… यही उनका स्वागत होगा. आइए जानते हैं कि बुलडोजर को यूपी में बीजेपी की राजनीति का एक बड़ा प्रतीक बनाया गया… उसी बुलडोजर से पार्टी परहेज क्यों कर रही है?
स्वागत में था बुलडोजर… लेकिन मामला बिगड़ा
21 सितंबर को मेरठ आगमन पर भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन का काशी टोल प्लाजा पर कई बुलडोजरों से जोरदार स्वागत किया गया था. काशी टोल से लेकर सुभारती यूनिवर्सिटी तक चार स्थानों पर स्वागत के लिए स्टेज लगाए गए थे, अधिकतर स्थानों पर बुलडोजर खड़े थे, जिन पर फूलों की माला डाली गई थी. मेरठ में करीब 100 से अधिक बुलडोजरों के जरिए नबीन का स्वागत किया गया और फूलों की बारिश भी हुई. इस दिन नितिन नबीन ने मेरठ में रात्रि प्रवास किया था.
इसी दौरान मेरठ सेंट्रल मार्केट प्रकरण पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद बुलडोजर स्वागत पर प्रभावितों की तीखी प्रतिक्रिया आई थी. उनका सवाल था कि इस तरह स्वागत कर क्या हमें यह संदेश देने का प्रयास है कि यह हमारे मकानों और दुकानों पर भी एक दिन ये बुलडोजर आएंगे? प्रबुद्ध वर्ग के संवाद में भी सेंट्रल मार्केट प्रकरण उठा था. माना जा रहा है कि आम लोगों की नाराजगी को देखते हुए ही नितिन नबीन मंगलवार को सिवाया टोल प्लाजा पर बुलडोजर देख नहीं रुके.
पार्टी सूत्रों का कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बुलडोजर स्वागत पर पदाधिकारियों से नाराजगी भी जताई. नसीहत दी कि जनप्रतिनिधियों, कार्यकर्ताओं को जमीन पर उतरकर काम करना चाहिए. उनकी इस नाराजगी को देखते हुए इसके बाद सहारनपुर तक किसी भी स्वागत कार्यक्रम में बुलडोजर नहीं दिखा.
अयोध्या से लेकर मेरठ तक… बुलडोजर पर लगे कलंक
बीते दिनों अयोध्या में कई घरों को जमींदोज कर दिया गया था. इसको लेकर अखिलेश यादव ने बकायदा प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए योगी सरकार की बुलडोजर नीति की आलोचना की थी. इस बीच मेरठ के सेंट्रल मार्केट को लेकर मामला बढ़ गया. सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश के बाद अब करीब 17 हजार घरों पर बुलडोजर चलने की आशंका से ही लोगों में डर का माहौल है. इस वजह से लोग बुलडोजर से चिढ़े हुए हैं. अखिलेश भी बुलडोजर को गरीबों और PDA के ‘दमन’ का मुद्दा बना रहे हैं.
सड़क पर शक्ति प्रदर्शन से संगठन तक
नितिन नबीन का संदेश सिर्फ इतना नहीं है कि स्वागत छोटा रखिए… उनका संदेश ये भी है कि संगठन का प्रदर्शन सड़क पर नहीं, कार्यकर्ता के घर और बूथ पर दिखाई देना चाहिए. दरअसल नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा पूरी तरह संगठनात्मक बैठकों पर केंद्रित था. मेरठ में उन्होंने युवा सम्मेलन और शक्ति केंद्र सम्मेलन में हिस्सा लिया, जबकि पूर्व सांसदोंविधायकों और वर्तमान पदाधिकारियों के साथ भी अलगअलग बैठकें कीं.
आखिर बुलडोजर ही क्यों?
यूपी की राजनीति में बुलडोजर सिर्फ एक मशीन नहीं रहा. 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद अवैध कब्जों, निर्माण और अपराधियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई में बुलडोजर का इस्तेमाल लगातार चर्चा में रहा. इसके बाद 2022 के विधानसभा चुनाव तक बुलडोजर बीजेपी की चुनावी भाषा और राजनीतिक प्रतीकों में शामिल हो गया. बीजेपी समर्थकों ने योगी आदित्यनाथ को ‘बुलडोजर बाबा’ कहना शुरू किया और चुनावी रैलियों में बुलडोजर दिखाई देने लगे.
2022 के चुनाव नतीजों के दौरान भी बीजेपी कार्यकर्ता बुलडोजर पर चढ़कर जश्न मनाते दिखे. धीरेधीरे बुलडोजर को बीजेपी समर्थकों ने सख्त प्रशासन और कानूनव्यवस्था के प्रतीक के तौर पर पेश करना शुरू किया. विपक्ष ने इसी प्रतीक को ‘बुलडोजर राजनीति’ कहकर सरकार पर निशाना साधा. 2024 में भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और अखिलेश यादव के बीच बुलडोजर को लेकर सार्वजनिक बयानबाजी हुई.
नितिन नबीन के संदेश के पीछे ट्रैफिक भी बड़ा कारण
नितिन नबीन ने अपने नेताओं से कहा कि बड़े स्वागत कार्यक्रम से आम लोगों को परेशानी होती है. सड़क पर काफिला…सड़क किनारे कार्यकर्ताओं की भीड़… बड़ेबड़े होर्डिंग… बुलडोजर और फूलों की बारिश… इन सबके बीच ट्रैफिक प्रभावित होता है. बीजेपी के नेताओं के स्वागत के दौरान पहले भी ऐसी स्थितियां सामने आई हैं, जब सड़क पर लोगों को जाम से परेशानी हुई. इसीलिए जब प्रदेश प्रभारी बनने के बाद विनोद तावड़े यूपी पहुंचे थे, तब भी स्वागत के लिए बड़े होर्डिंग और काफिले से बचने का संदेश दिया गया था. इससे पहले बीजेपी के युवा मोर्चा प्रदेश अध्यक्ष रोहित मिश्रा और बीजेपी के महासचिव बने हरीश द्विवेदी के स्वागत को लेकर बीजेपी को खासी फजीहत झेलनी पड़ी थी.
मौजूदा सांसदविधायकों को पहले सुना
नितिन नबीन का दो दिन का दौरा कई मायनों में अहम रहा. उन्होंने संगठन के मौजूदा नेताओं के साथ बैठक की. मौजूदा सांसदों और विधायकों से पहले उनकी बात सुनी. यानी नितिन नबीन ने शुरुआत भाषण से नहीं… फीडबैक से की. इसके बाद नितिन नबीन ने पूर्व सांसदों और पूर्व विधायकों से भी बातचीत की. ये बैठक इसलिए अहम है क्योंकि बीजेपी अब 2027 से पहले सिर्फ मौजूदा जनप्रतिनिधियों की रिपोर्ट पर निर्भर नहीं रहना चाहती.
नबीन का संगठन फॉर्मूला
हारे हुए नेता… पूर्व जनप्रतिनिधि… पुराने संगठन के पदाधिकारी… सभी से जमीनी फीडबैक लेने की कवायद शुरू है. नितिन नबीन यूपी के हारे हुए सांसदों से भी मुलाकात करेंगे. यानी 2024 में जहां पार्टी को झटका लगा…वहां अब पार्टी नेतृत्व खुद जाकर कारण समझने की कोशिश कर रहा है.
‘विरोध किया था’ तो बैठक से बाहर नहीं
नितिन नबीन ने संगठन के भीतर एक और महत्वपूर्ण संदेश दिया है. कोई विधायक या सांसद सिर्फ इस आधार पर किसी नेता को बैठक से बाहर नहीं रखेगा कि उसने कभी उसका विरोध किया था. यानी पार्टी के अंदर पुराने मतभेद हैं तो उन्हें संगठन के काम में बाधा नहीं बनने दिया जाएगा. किसी नेता का किसी दूसरे नेता से विवाद रहा हो… किसी चुनाव में विरोध हुआ हो… या स्थानीय स्तर पर गुटबाजी रही हो… फिर भी पार्टी संगठन में संवाद का रास्ता बंद नहीं होगा.
पश्चिमी यूपी से पूरे यूपी का संदेश
नितिन नबीन का पश्चिमी यूपी दौरा ऐसे समय हुआ है जब बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव के लिए संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर जोर दे रही है. पश्चिमी यूपी में 137 विधानसभा सीटें हैं और बीजेपी के लिए यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है. पार्टी ने 2017 में यहां 110 सीटें जीती थीं, जबकि 2022 में उसका आंकड़ा 93 रहा. इसीलिए नितिन नबीन की बैठकों में संगठन, बूथ मैनेजमेंट, स्थानीय समीकरण और कार्यकर्ताओं से संवाद पर जोर रहा. साथ ही सहारनपुर में उनका दलित आउटरीच कार्यक्रम भी हुआ, जहां उन्होंने संत रविदास मंदिर में दर्शन किए और दलित परिवार के यहां भोजन किया.



