
लखनऊ। जमीन खरीदना जिंदगी के बड़े फैसलों में से एक होता है। ऐसे में सिर्फ विक्रेता की बात या खतौनी देखकर प्रॉपर्टी का सौदा करना जोखिम भरा हो सकता है। जमीन की पुरानी रजिस्ट्री, बैंक का बंधक और सरकारी प्रतिबंध जैसी जानकारी पहले ही जांच लेना जरूरी है। अच्छी बात यह है कि उत्तर प्रदेश में खरीदार घर बैठे मोबाइल से इन रिकॉर्ड की शुरुआती पड़ताल कर सकते हैं।
इसके लिए उत्तर प्रदेश स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के IGRSUP पोर्टल पर संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड खोजने की सुविधा उपलब्ध है।
पुरानी रजिस्ट्री की कहानी ऑनलाइन ऐसे जांचें
किसी जमीन का सौदा करने से पहले यह देखना जरूरी है कि उसके पुराने दस्तावेज क्या कहते हैं। IGRSUP पर उपलब्ध रिकॉर्ड के जरिए खरीदार पुरानी रजिस्ट्री और पंजीकृत दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी खोज सकते हैं।
इससे विक्रेता की ओर से दिखाए गए पुराने बैनामे की ऑनलाइन रिकॉर्ड में उपलब्ध जानकारी से तुलना करने में मदद मिल सकती है।
मोबाइल से ऐसे करें चेक
- सबसे पहले IGRSUP की आधिकारिक वेबसाइट खोलें।
- नागरिक ऑनलाइन सेवाएं सेक्शन में जाएं।
- यहां संपत्ति खोज का विकल्प देखें।
- उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित संपत्ति का रिकॉर्ड खोजें।
- नाम, पंजीकरण संख्या या खसरा आदि से उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच करें।
- पुराने बैनामे में दर्ज जानकारी का ऑनलाइन रिकॉर्ड से मिलान करें।
- जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेज की प्रमाणित प्रति के लिए आवेदन करें।
कहीं जमीन पर बैंक का कर्ज तो नहीं?
जमीन पर बैंक या किसी वित्तीय संस्था का बंधक भी हो सकता है। ऐसे में सिर्फ विक्रेता के भरोसे रहना ठीक नहीं है। संपत्ति पर दर्ज भार की जानकारी की भी जांच करनी चाहिए।
IGRSUP पर भार मुक्ति प्रमाणपत्र से संबंधित ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध है। उपलब्ध रिकॉर्ड और प्रमाणपत्र की जानकारी से खरीदार शुरुआती स्तर पर यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि संपत्ति पर कोई दर्ज भार तो नहीं है।
सरकारी रोक वाली जमीन तो नहीं?
जमीन खरीदने से पहले यह पता करना भी जरूरी है कि संबंधित संपत्ति किसी सरकारी प्रतिबंध के दायरे में तो नहीं आती। स्टांप एवं रजिस्ट्रेशन विभाग के पोर्टल पर निषिद्ध संपत्ति की खोज की सुविधा भी उपलब्ध है।
संबंधित जमीन की पहचान और उपलब्ध विवरण को इस रिकॉर्ड से मिलाने पर संभावित जोखिम की शुरुआती जानकारी मिल सकती है।
ऑनलाइन रिकॉर्ड देखकर तुरंत न करें सौदा
यह बात सबसे ज्यादा जरूरी है। ऑनलाइन रिकॉर्ड में किसी जानकारी का नहीं मिलना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि जमीन पूरी तरह विवादमुक्त है।
पुराने दस्तावेज, रिकॉर्ड अपडेट होने की स्थिति और अन्य संभावित दावों की भी जांच करनी चाहिए। बैनामा कराने से पहले संबंधित उप निबंधक कार्यालय में दस्तावेजों का सत्यापन कराना जरूरी है।
अगर जमीन का सौदा बड़ा है तो दस्तावेजों की कानूनी जांच के लिए अधिवक्ता की मदद लेना भी उचित रहेगा।
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