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‘गहने दोगुने हो जाएंगे’… इसी लालच में महिलाओं को ले जाती थी सुनसान तालाब के पास, फिर करती थी कांड!

‘गहने दोगुने हो जाएंगे’… इसी लालच में महिलाओं को ले जाती थी सुनसान तालाब के पास, फिर करती थी कांड!

भारत के अपराध इतिहास में कई ऐसे मामले दर्ज हैं, जिनकी कहानी आज भी हैरान कर देती है। ऐसी ही एक खौफनाक कहानी 19वीं सदी के कलकत्ता की है, जहां त्रैलोक्य नाम की एक महिला पर महिलाओं को लालच देकर सुनसान जगहों पर ले जाने और उनकी हत्या करने के गंभीर आरोप लगे थे। ब्रिटिश दौर के पुलिस रिकॉर्ड और उस समय के चर्चित अपराध-वृत्तांतों में इस मामले का उल्लेख मिलता है।

आज जब भारत की महिला सीरियल किलर की बात होती है तो अक्सर ‘साइनाइड मल्लिका’ का नाम सामने आता है। लेकिन त्रैलोक्य की कहानी उससे कई दशक पुरानी बताई जाती है। कलकत्ता के काकुरगाछी, चित्पुर और मानिकतला इलाके से जुड़ी इस कहानी में ठगी, अंधविश्वास और हत्या का ऐसा सिलसिला सामने आया था, जिसने उस दौर की पुलिस को भी परेशान कर दिया था।

बाल विवाह के बाद सोनागाछी पहुंची त्रैलोक्य

बताया जाता है कि त्रैलोक्य का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। कम उम्र में ही उसका विवाह कर दिया गया, लेकिन जल्द ही वह विधवा हो गई। इसके बाद परिस्थितियों ने उसे कलकत्ता पहुंचा दिया, जहां वह सोनागाछी के रेड-लाइट इलाके में रहने लगी।

शुरुआती दौर में उसकी खूबसूरती और कम उम्र के कारण अच्छी कमाई होने लगी। समय के साथ उसने काफी पैसा जमा किया और कथित तौर पर संपत्ति तथा घोड़े-गाड़ी तक हासिल कर ली।

लेकिन उम्र बढ़ने के साथ उसकी आमदनी कम होने लगी। आर्थिक परेशानी बढ़ी तो उसके अपराध की दुनिया में उतरने की कहानी शुरू हुई।

प्रेमी के साथ मिलकर ठगी का जाल

बताया जाता है कि त्रैलोक्य ने काली बाबू नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर अमीर लोगों को निशाना बनाना शुरू किया। दोनों कथित तौर पर ऐसे युवकों को अपने जाल में फंसाते थे, जिनके पास पैसा और कीमती सामान होता था।

एक तरीके में शराब के साथ नशीली चीज मिलाकर व्यक्ति को बेहोश करने और उसके बाद सामान लूटने का आरोप था। बेहोश व्यक्ति को बाद में सड़क पर छोड़ दिया जाता था।

इसके अलावा उस दौर में प्रचलित सामाजिक कुरीतियों और शादी से जुड़े लालच का फायदा उठाकर भी ठगी किए जाने की बात सामने आती है। कथित तौर पर अमीर परिवारों को शादी का झांसा दिया जाता और गहने हासिल करने के बाद पूरी योजना को अंजाम देकर आरोपी गायब हो जाते थे।

जब ठगी से आगे बढ़ा अपराध

समय के साथ त्रैलोक्य पर सिर्फ ठगी तक सीमित रहने के बजाय हत्या की वारदातों में शामिल होने के आरोप भी लगे।

कहानी के मुताबिक, सोनागाछी की कुछ उम्रदराज महिलाएं अपने भविष्य और पैसों को लेकर परेशान थीं। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें एक ऐसे कथित तांत्रिक या साधु के बारे में बताया जाता था, जो पूजा-पाठ के जरिए उनके सोने के गहने दोगुने कर सकता था।

गहनों को दोगुना करने का लालच महिलाओं के लिए इतना बड़ा आकर्षण था कि वे इस कथित उपाय पर भरोसा कर बैठती थीं।

सुनसान तालाब के पास ले जाकर हत्या का आरोप

महिलाओं को कथित तौर पर मानिकतला के आसपास किसी सुनसान बाग या तालाब के पास ले जाया जाता था। वहां उनसे कहा जाता कि पूजा या धार्मिक प्रक्रिया के लिए उन्हें स्नान करना होगा।

स्नान के दौरान महिलाओं को अपने गहने उतारने पड़ते थे। आरोप है कि जैसे ही महिला पानी में उतरती, त्रैलोक्य पीछे से उसे पानी में दबोच लेती और तब तक पानी में दबाए रखती, जब तक उसकी मौत नहीं हो जाती।

इसके बाद उसके गहने लेकर वहां से निकल जाने की बात कही जाती है।

इस तरह लालच, अंधविश्वास और भरोसे का इस्तेमाल करके महिलाओं को कथित तौर पर निशाना बनाया गया। इसी वजह से त्रैलोक्य का नाम कलकत्ता के पुराने अपराध इतिहास में बेहद चर्चित हो गया।

राजकुमारी की हत्या ने बदल दी पूरी कहानी

कहा जाता है कि त्रैलोक्य ने एक समय पुलिस की कार्रवाई से बच निकलने में भी सफलता हासिल की थी। लेकिन बाद में उसके खिलाफ ऐसा मामला सामने आया, जिसने जांच की दिशा ही बदल दी।

उसके घर में रहने वाली

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