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​क्या स्ट्रेस की वजह से निकलते हैं एक्ने-पिंपल? एक्सपर्ट से समझें इसके पीछे का साइंस

एक्ने या मुंहासे किसी भी उम्र के इंसान को हो सकते हैं, लेकिन टीनएज और युवाओं में त्वचा की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली समस्या है. अक्सर इससे छुटकारा पाने के लिए लोग सीरम से लेकर कई तरह की क्रीम, DIY टिप्स और घरेलू नुस्खों का सहारा भी लेते हैं. खानपान में बदलाव करके भी मुंहासों को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन आपको ये पता लगाना बहुत जरूरी है कि कहीं ये पिंपल्स या एक्ने ज्यादा तनाव लेने की वजह से तो नहीं हो रहे हैं.

​क्या स्ट्रेस की वजह से निकलते हैं एक्ने-पिंपल? एक्सपर्ट से समझें इसके पीछे का साइंस

दरअसल इसपर कई रिसर्च भी हैं और एक्सपर्ट भी कहते हैं कि आपको स्ट्रेस की वजह से पिंपल्स और एक्ने की समस्या हो सकती है. इस आर्टिकल में जानेंगे एक्ने और पिंपल्स का क्या है स्ट्रेस से कनेक्शन, जान लेते हैं इसके पीछे की साइंस.

क्या कहती है रिसर्च?

में छपी एक रिसर्च के मुताबिक, किंग अब्दुलअजीज विश्वविद्यालय के चिकित्सा संकाय में पढ़ रही 22 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 144 छठे वर्ष की महिला चिकित्सा छात्राओं के बीच एक क्रॉससेक्शनल अध्ययन किया गया. इसमें तनाव के संबंध में मुंहासे की गंभीरता का आकलन करने के लिए ग्लोबल एक्ने ग्रेडिंग सिस्टम का उपयोग किया गया, जिसके लिए परसीव्ड स्ट्रेस स्केल का प्रयोग किया गया। प्रश्नावली में मुंहासे की गंभीरता को प्रभावित करने वाले कुछ कारकों को भी शामिल किया गया था. इसके परिणामों से पता चलता है कि तनाव ज्यादा होने और मुंहासे निकलने में वृद्धि होने का गहरा संबंध है. इसमें पाया गया कि ज्यादा स्ट्रेस होने से मुंहासे हो सकते हैं.

इसी तरह की एक और जिसमें कुल मिलाकर, 11 अध्ययनों ने समावेशन मानदंडों को पूरा किया, जिनमें 3,063 प्रतिभागी शामिल थे. ये भी मेडिकल छात्रों पर किया गया अध्ययन था, जिसके निष्कर्ष कहते हैं कि नौ अध्ययनों में तनाव और मुंहासे की गंभीरता के बीच सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण संबंध पाया गया. हालांकि इसके अलावा भी कई फैक्टर्स सामने आए जैसे मेडिकल छात्रों में उच्च ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले खाद्य पदार्थों और फास्ट फूड का सेवन, गर्मी और आर्द्रता जैसे पर्यावरणीय कारक और नींद की कमी जैसी जीवनशैली संबंधी आदतें शामिल हैं.

क्यों होते हैं स्ट्रेस से मुहांसे?

दरअसल मुंहासे एक ऐसी समस्या है जो सभी आयु वर्ग के तकरीबन 9.38% लोगों को प्रभावित करती है. इसे लेकर कई तरह के सामने आए हैं. दरअसल कॉर्टिकॉट्रोपिनरिलीजिंग हार्मोन रिसेप्टर्स के स्राव के कारण, त्वचा तनावपूर्ण स्थितियों के जवाब में मुहांसे पैदा करती है. कोरियाई अस्पतालों को शामिल करने वाले एक बहुकेंद्रीय अध्ययन में बताया गया कि 82% प्रतिभागियों को मनोवैज्ञानिक तनाव के कारण मुंहासे हुए थे. इसी तरह से और भी स्टडी की गई हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट?

दिल्ली के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल में सीनियर कंसलटेंट डर्मेटोलॉजी डॉक्टर संदीप अरोड़ा ने बताया था कि चेहरे के अलगअलग जगहों पर निकलने वाले मुंहासे आपकी सेहत के बारे में बताते हैं, जैसे माथे पर ज्यादा पिंपल्स आपके डाइजेशन की समस्या खासकर लिवर और गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल इंबैलेंस की वजह से हो सकते हैं. इसमें डाइट में सुधार करना चाहिए, क्योंकि शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाएं तो ये त्वचा की समस्या बन सकते हैं. इसके अलावा नाक के आसपास पिंपल्स ज्यादा होना ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल लेवल सही न रहने की तरफ इशारा करते हैं. यहां के पिंपल नर्वस सिस्टम के अलावा ब्लड सर्कुलेशन से भी जुड़े होते हैं. ऐसे में ध्यान देना जरूरी होता है. ठुड्डी के आसपास पिंपल्स बने रहना हार्मोनल इंबैलेंस हो सकता है तो वहीं गालों पर ज्यादा पिंपल्स आपकी रेस्पिरेटरी सिस्टम से जुड़ी समस्या की वजह से हो सकते है.

ये भी हैं पिंपल्स की वजहें

  • पॉल्यूशन और धूलमिट्टी के ज्यादा संपर्क में रहना.
  • त्वचा की साफसफाई का ध्यान सही से न रखना.
  • खाने की किसी खास चीज से एलर्जी हो जाना.
  • स्किन का बहुत ज्यादा ऑयली होने की वजह से पोर्स का बंद होना.
  • ज्यादा तलीभुनी और मसालेदार चीजें खाने से डाइजेशन खराब होना.
  • ये अनुवांशिक भी हो सकते हैं जैसे पेरेंट्स में से किसी को पिंपल्स की समस्या हो.

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