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​टाटा संस IPO… शेयर बाजार में लिस्टिंग से बचने का नया दांव, बोर्ड ने मांगी लीगल एडवाइस

देश के सबसे बड़े कारोबारी घरानों में शुमार टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के मामले में एक बड़ा मोड़ आ गया है. टाटा संस के बोर्ड ने टाटा ट्रस्ट्स की ओर से भेजे गए रीस्ट्रक्चरिंग प्रस्ताव पर कानूनी राय मांगी है. सूत्रों के अनुसार, बोर्ड फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार करने के लिए किसी औपचारिक बैठक के मूड में नहीं दिख रहा है. इस पूरे फेरबदल का मकसद टाटा संस को अनिवार्य लिस्टिंग यानी IPO के दायरे से बाहर रखना है.

​टाटा संस IPO… शेयर बाजार में लिस्टिंग से बचने का नया दांव, बोर्ड ने मांगी लीगल एडवाइस

कानूनी राय मांगने के पीछे की असली वजह

टाटा संस के बोर्ड का मानना है कि टाटा ट्रस्ट्स की तरफ से आया ये प्रस्ताव अभी शेयरधारकों का औपचारिक फैसला नहीं माना जा सकता. इसकी मुख्य वजह ये है कि इस प्रस्ताव को दो प्रमुख शेयरधारक ट्रस्ट्स—सर रतन टाटा ट्रस्ट व सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट ने किसी औपचारिक प्रस्ताव के जरिए पास करके साइन नहीं किया है.

भारतीय रिजर्व बैंक ने टाटा संस को ‘अपर लेयर’ नॉनबैंकिंग फाइनेंस कंपनी के नियमों का पालन करने का सख्त निर्देश दिया था. इन्हीं नियमों के तहत कंपनी के लिए शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी हो गया है. होल्डिंग कंपनी पहले से ही RBI के इस निर्देश का पालन करने की तैयारी शुरू कर चुकी है. मामले से जुड़े एक जानकार ने बताया कि शेयरधारकों के किसी वैकल्पिक प्रस्ताव से RBI का फैसला अपने आप नहीं बदल सकता. नियामक खुद स्वतंत्र रूप से ये जांचेगा कि प्रस्तावित रीस्ट्रक्चरिंग उसकी शर्तों पर खरी उतरती है या नहीं.

दो कंपनियों का मर्जर, लिस्टिंग रोकने का फॉर्मूला

टाटा संस को एक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के रूप में बनाए रखने के लिए टाटा ट्रस्ट्स ने एक खास योजना तैयार की है. ट्रस्ट्स ने बोर्ड को सुझाव दिया है कि ग्रुप की दो ऑपरेटिंग कंपनियों—टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम्स सॉल्यूशंस व टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स का मर्जर टाटा संस में कर दिया जाए.

ट्रस्ट्स का तर्क है कि इस रीस्ट्रक्चरिंग से टाटा संस को पर्याप्त ऑपरेटिंग इनकम मिलने लगेगी. इससे कंपनी NBFC के मुख्य बिजनेस वाले दायरे से बाहर आ जाएगी. साथ ही ग्रुप की अन्य कंपनियों में उसके निवेश का अनुपात भी कम हो जाएगा, जिससे वो कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी की परिभाषा में नहीं आएगी. बता दें कि टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी है. इसमें से 51.54 फीसदी की बड़ी हिस्सेदारी अकेले SDTT व SRTT के पास है.

ट्रस्ट का नजरिया, आर्टिकल 121A का नियम

टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के करीबी एक सीनियर एग्जीक्यूटिव ने इस पूरे मामले पर अपनी बात रखी है. उनका कहना है कि ये प्रस्ताव टाटा संस के सामने सिर्फ एक विकल्प के तौर पर रखा गया है, ताकि कंपनी इसका मूल्यांकन कर सके व जरूरत पड़ने पर इसमें बदलाव कर सके.

सूत्र के मुताबिक, पिछली बोर्ड बैठक में टाटा संस ने खुद आरबीआई के निर्देशों का पालन करने के रास्ते तलाशने के लिए टाटा ट्रस्ट्स से मदद मांगी थी. इसी संदर्भ में ये प्रस्ताव तैयार किया गया था. अधिकारी ने ये भी साफ किया कि नियमों का पालन करने या आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के आर्टिकल 121A के तहत शेयरहोल्डिंग में कोई भी बदलाव करने के लिए शेयरधारकों की मंजूरी जरूरी होगी. इसलिए ट्रस्ट्स ने लिस्टिंग से बचने का ये दूसरा रास्ता सुझाया था. ये प्रस्ताव आरबीआई को भी भेजा गया है.

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