
नई दिल्ली: देश की सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक होने के मामले में जांच एजेंसियों की पड़ताल लगातार आगे बढ़ रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, इस मामले में नौसेना से जुड़े करीब 13 लोगों की गतिविधियां जांच के दायरे में आई हैं। जांच में पाकिस्तान से जुड़े संभावित जासूसी नेटवर्क और हनीट्रैप एंगल को भी खंगाला जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संवेदनशील सैन्य जानकारी तक पहुंच कैसे बनी और क्या किसी बाहरी नेटवर्क ने नौसैनिकों को अपने जाल में फंसाकर जानकारी हासिल करने की कोशिश की।
13 नौसैनिक जांच के दायरे में क्यों?
जांच एजेंसियां कथित तौर पर 13 नौसैनिकों से जुड़े संपर्क, डिजिटल गतिविधियों और संदिग्ध संचार की पड़ताल कर रही हैं। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या इन लोगों ने किसी अनजान व्यक्ति या संदिग्ध नेटवर्क के साथ ऐसी जानकारी साझा की, जिसका इस्तेमाल भारत की सुरक्षा के खिलाफ किया जा सकता था।
फिलहाल जांच का दायरा बड़ा है और केवल जांच में नाम आने का मतलब यह नहीं है कि सभी लोग दोषी हैं। एजेंसियां सबूतों और डिजिटल रिकॉर्ड के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रही हैं।
पाकिस्तान से जुड़े नेटवर्क का शक
जांच में पाकिस्तान से जुड़े संभावित जासूसी नेटवर्क की भूमिका भी देखी जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या दूसरे डिजिटल माध्यमों के जरिए सैन्यकर्मियों से संपर्क तो नहीं साधा गया था।
ऐसे मामलों में अक्सर पहले सामान्य बातचीत के जरिए संपर्क बनाया जाता है और बाद में संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की जाती है।
हनीट्रैप एंगल ने बढ़ाई चिंता
इस मामले में हनीट्रैप की आशंका भी जांच का अहम हिस्सा बताई जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या किसी नौसैनिक को निजी संबंध या भावनात्मक जुड़ाव के जरिए प्रभावित कर जानकारी हासिल करने की कोशिश हुई।
सुरक्षा से जुड़े मामलों में हनीट्रैप को एक गंभीर खतरे के रूप में देखा जाता है, क्योंकि इसमें व्यक्ति की निजी कमजोरियों का फायदा उठाकर संवेदनशील जानकारी हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है।
जांच में डिजिटल सबूत अहम
जांच एजेंसियां कथित तौर पर मोबाइल फोन, ऑनलाइन संपर्क, चैट और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर रही हैं। इनसे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि संदिग्ध संपर्क कब और किस माध्यम से स्थापित हुए थे।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। किसी भी व्यक्ति को केवल शक या जांच के दायरे में आने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता।



