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सीतामढ़ी: बच्चों के इलाज के नाम पर खतरनाक हरकत का आरोप, झाड़-फूंक के दौरान हवा में उछालने का मामला.

सीतामढ़ी: बच्चों के इलाज के नाम पर खतरनाक हरकत का आरोप, झाड़-फूंक के दौरान हवा में उछालने का मामला.

सीतामढ़ी के परिहार थाना क्षेत्र के महादेवपट्टी गांव से बच्चों के कथित इलाज के नाम पर अंधविश्वास और खतरनाक तरीके से उपचार किए जाने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वायरल वीडियो में एक व्यक्ति छोटे बच्चों को पकड़कर झकझोरता और हवा में उछालता नजर आ रहा है। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

श्मशान परिसर में जुटते थे लोग

बताया जा रहा है कि मामला गांव के श्मशान परिसर से जुड़ा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, यहां कथित तौर पर तंत्र-मंत्र और झाड़-फूंक के जरिए बच्चों की बीमारी और शारीरिक परेशानियां दूर करने का दावा किया जाता था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले करीब चार वर्षों से प्रत्येक सोमवार और शुक्रवार को यहां ऐसे कथित उपचार के लिए लोगों की भीड़ जुटती थी। दूर-दराज के इलाकों से परिवार बीमार या दिव्यांग बच्चों को लेकर यहां पहुंचते थे।

आरोप है कि खुद को भगत बताने वाला व्यक्ति बच्चों की बोलने, चलने और अन्य शारीरिक समस्याओं को तंत्र-मंत्र के जरिए ठीक करने का दावा करता था। हालांकि, सामने आए वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

वायरल वीडियो के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR

मामला सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस के संज्ञान में आया। पुलिस के मुताबिक, वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान श्रवण महतो के रूप में हुई है। परिहार थानाध्यक्ष पंकज यादव के बयान पर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के साथ किशोर न्याय संरक्षण अधिनियम, 2015 के तहत भी कार्रवाई की है। पुलिस के पहुंचने से पहले आरोपी के मौके से फरार होने की बात सामने आई है। अब उसके संभावित ठिकानों का पता लगाया जा रहा है।

बच्चों को इस तरह का इलाज कितना खतरनाक?

बीमारी ठीक करने के नाम पर छोटे बच्चों को जोर से झकझोरना, हवा में उछालना या जमीन पर पटकना गंभीर रूप से खतरनाक हो सकता है। इससे सिर, गर्दन, हड्डियों और शरीर के दूसरे हिस्सों में चोट लगने का खतरा रहता है।

बच्चों में बीमारी, बोलने-चलने में परेशानी या किसी अन्य शारीरिक समस्या के लिए योग्य डॉक्टर से जांच और प्रमाणित चिकित्सा लेना जरूरी है। झाड़-फूंक या किसी कथित चमत्कारी उपचार के भरोसे इलाज में देरी करना बच्चे की स्थिति को और गंभीर बना सकता है।

फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो, घटनास्थल और वहां आने वाले लोगों से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। जांच के आधार पर मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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