
नई दिल्ली: अंतरिक्ष को दूर से देखने पर यह बेहद खूबसूरत और रहस्यमयी नजर आता है, लेकिन इंसान के लिए वहां का वातावरण बेहद खतरनाक है। अगर कोई व्यक्ति बिना स्पेस सूट के सीधे अंतरिक्ष के निर्वात में पहुंच जाए, तो क्या उसका शरीर तुरंत फट जाएगा? क्या वह कुछ ही सेकंड में जम जाएगा? हकीकत फिल्मों में दिखाई जाने वाली तस्वीर से काफी अलग है।
कुछ ही सेकंड में होश खो सकता है इंसान
अंतरिक्ष में सांस लेने के लिए हवा नहीं होती और बाहरी वायुमंडलीय दबाव भी लगभग शून्य होता है। ऐसे वातावरण में पहुंचते ही शरीर तेजी से ऑक्सीजन की कमी का सामना करने लगता है।
दिमाग तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचने के कारण व्यक्ति करीब 10 से 15 सेकंड के भीतर बेहोश हो सकता है। अगर उसे तुरंत सुरक्षित वातावरण और ऑक्सीजन उपलब्ध न कराई जाए तो कुछ ही समय में स्थिति जानलेवा हो जाती है।
सांस रोकना बन सकता है खतरनाक
अगर कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में अपनी सांस रोकने की कोशिश करे तो यह बेहद नुकसानदायक हो सकता है। कम दबाव वाले वातावरण में फेफड़ों के अंदर मौजूद हवा फैल सकती है और फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।
इसी वजह से अंतरिक्ष के निर्वात के संपर्क में आने पर सांस रोकने के बजाय फेफड़ों से हवा बाहर निकलने देना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है।
शरीर फूल सकता है, लेकिन फटेगा नहीं
अंतरिक्ष के बेहद कम दबाव के कारण शरीर के कुछ तरल पदार्थों में बदलाव आने लगता है। कम दबाव की वजह से शरीर के सतही हिस्सों में मौजूद नमी वाष्प बनने की प्रक्रिया शुरू कर सकती है। इससे शरीर में सूजन आ सकती है। इस स्थिति को वैज्ञानिक तौर पर इबुलिज्म से जोड़ा जाता है।
हालांकि, इंसान का शरीर गुब्बारे की तरह फट नहीं जाता। त्वचा और शरीर के ऊतक कुछ हद तक आंतरिक दबाव को संभाल सकते हैं।
क्या इंसान तुरंत जम जाएगा?
यह भी फिल्मों में दिखाई जाने वाली आम गलतफहमी है कि अंतरिक्ष में जाते ही शरीर बर्फ में बदल जाएगा। वास्तव में ऐसा तुरंत नहीं होता।
अंतरिक्ष में तापमान की स्थिति इस बात पर निर्भर करती है कि शरीर सीधे सूर्य के प्रकाश में है या छाया में। शरीर की गर्मी के बाहर निकलने की प्रक्रिया भी पृथ्वी के वातावरण जैसी नहीं होती। इसलिए व्यक्ति कुछ ही सेकंड में बर्फ की तरह नहीं जमता।
सूर्य की किरणें भी बन सकती हैं खतरा
अंतरिक्ष में पृथ्वी जैसा वातावरण और ओजोन परत मौजूद नहीं होती, जो सूर्य की कुछ हानिकारक विकिरणों को रोकती है। सीधे सूर्य के संपर्क में आने पर त्वचा को तेज पराबैंगनी विकिरण का नुकसान हो सकता है।
लेकिन तत्काल सबसे बड़ा खतरा यूवी किरणें नहीं, बल्कि ऑक्सीजन की कमी और बेहद कम दबाव होता है।
बचने के लिए कितना समय मिलेगा?
बिना सुरक्षा के अंतरिक्ष के निर्वात में इंसान के पास बेहद कम समय होता है। कुछ सेकंड में चेतना जा सकती है और लंबे समय तक ऑक्सीजन की कमी रहने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंग गंभीर रूप से प्रभावित होने लगते हैं।
अगर व्यक्ति को बहुत जल्दी दबाव वाले वातावरण में वापस लाया जाए और ऑक्सीजन उपलब्ध कराई जाए, तो बचने की संभावना हो सकती है। इसलिए यह कहना कि हर स्थिति में 1-2 मिनट में निश्चित रूप से मौत हो जाएगी, बहुत ज्यादा निश्चित दावा होगा।
फिल्मों जैसा नहीं होता शरीर का हाल
साइंस फिक्शन फिल्मों में अक्सर दिखाया जाता है कि अंतरिक्ष में पहुंचते ही इंसान का शरीर धमाके के साथ फट जाता है या वह तुरंत बर्फ की मूर्ति बन जाता है। वास्तविकता इससे अलग है।
बिना स्पेस सूट के अंतरिक्ष में जाना निश्चित रूप से जानलेवा स्थिति है, लेकिन शरीर तुरंत टुकड़ों में नहीं बिखरता। असली खतरा वैक्यूम, ऑक्सीजन की कमी और शरीर पर पड़ने वाले कम दबाव के प्रभाव से पैदा होता है।



