
अक्टूबर का महीना आमतौर पर मानसून की विदाई और मौसम में बदलाव के लिए जाना जाता है। इस दौरान दिन की तेज गर्मी धीरे-धीरे कम होने लगती है और सुबह-शाम हल्की ठंडक महसूस होने लगती है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में मौसम के बदलते मिजाज ने इस सामान्य पैटर्न को काफी प्रभावित किया है।
मौसम विभाग के ऐतिहासिक आंकड़ों के मुताबिक, 2024 का अक्टूबर भारत के लिए बेहद गर्म रहा था। 1901 के बाद के उपलब्ध आंकड़ों में इसे देश के सबसे गर्म अक्टूबर महीनों में दर्ज किया गया। इस दौरान औसत तापमान सामान्य से काफी ऊपर रहा।
इतिहास में सबसे गर्म अक्टूबर कब रहा?
अगर किसी एक साल के अक्टूबर में दर्ज औसत अधिकतम तापमान की बात करें, तो 1951 का अक्टूबर खास तौर पर गर्म रहा था। उस दौरान दिल्ली के सफदरजंग मौसम केंद्र पर अक्टूबर का औसत अधिकतम तापमान करीब 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।
इसके अलावा 1941 में औसत अधिकतम तापमान करीब 35.8 डिग्री और 1907 में करीब 35.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। ये आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में असामान्य गर्मी कोई बिल्कुल नई घटना नहीं है, हालांकि हाल के वर्षों में तापमान और मौसम के पैटर्न में बदलाव को लेकर चिंता बढ़ी है।
वहीं, 2024 में देश के औसत अक्टूबर तापमान ने भी नया रिकॉर्ड बनाया और यह महीना लंबे समय के औसत की तुलना में काफी गर्म रहा।
फिर कब आती है गुलाबी ठंड?
अक्टूबर के दूसरे हिस्से में आमतौर पर उत्तर भारत के कई इलाकों में रात और सुबह के तापमान में धीरे-धीरे गिरावट शुरू हो जाती है। इसी हल्की ठंडक को आम बोलचाल में ‘गुलाबी ठंड’ कहा जाता है।
हालांकि इसकी कोई एक निश्चित तारीख नहीं होती। किसी साल अक्टूबर के मध्य में ही सुबह-शाम ठंडक महसूस होने लगती है, जबकि गर्म मौसम वाले वर्षों में नवंबर तक गर्मी बनी रह सकती है।
1951 या 2024 जैसे गर्म अक्टूबर को देखते हुए यह कहना सही नहीं होगा कि पूरे देश में एक ही तारीख को गुलाबी ठंड ने दस्तक दी थी। मौसम का बदलाव स्थान, हवाओं, बारिश और तापमान के हिसाब से अलग-अलग समय पर होता है।
अक्टूबर में गर्मी बढ़ने की क्या वजह होती है?
मानसून की वापसी के बाद भी अगर बारिश और बादल बने रहें तथा हवा में नमी ज्यादा हो, तो कई इलाकों में उमस बनी रह सकती है। दूसरी ओर, उत्तर भारत में ठंडी हवाओं की शुरुआत देर से होने पर तापमान लंबे समय तक सामान्य से ऊपर रह सकता है।
पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत के मौसम को प्रभावित करने वाली महत्वपूर्ण मौसमी प्रणालियों में शामिल हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश या बर्फबारी होने पर वहां से आने वाली ठंडी हवाएं मैदानी इलाकों के तापमान को प्रभावित कर सकती हैं।
इसके अलावा बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में बनने वाली मौसम प्रणालियां भी देश के अलग-अलग हिस्सों में नमी, बादल और बारिश के हालात बदल सकती हैं।
मौसम में बदलाव क्यों है चिंता की बात?
अक्टूबर में गर्मी बढ़ना सिर्फ असहज मौसम तक सीमित नहीं है। लंबे समय तक तापमान सामान्य से ऊपर रहने पर बिजली की मांग, फसलों, स्वास्थ्य और स्थानीय मौसम चक्र पर भी असर पड़ सकता है।
इसी तरह, ठंड की शुरुआत में देरी होने पर सर्दियों का सामान्य पैटर्न भी प्रभावित हो सकता है। हालांकि हर साल मौसम का व्यवहार अलग होता है, इसलिए किसी एक साल के रिकॉर्ड के आधार पर पूरे भविष्य के मौसम का अनुमान लगाना सही नहीं होगा।
इतिहास के आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर में अत्यधिक गर्मी पहले भी पड़ चुकी है, लेकिन बदलते जलवायु पैटर्न के बीच ऐसे असामान्य तापमान और उनके प्रभावों पर लगातार नजर रखना जरूरी है।



