राजधानी दिल्ली में जब शराब की दुकानें बंद होती हैं, तो इसका असर केवल जाम छलकाने वालों की जेब या उनकी शाम पर ही नहीं पड़ता, बल्कि सीधे तौर पर सरकार के खजाने पर पड़ता है. आबकारी विभाग ने 9 और 10 अक्टूबर 2026 को पूरी दिल्ली में शराब की बिक्री पर मुकम्मल रोक लगा दी है. दिल्ली में शराब सिर्फ एक उत्पाद नहीं, बल्कि सरकारी कमाई का सबसे बड़ा जरिया है. ऐसे में 48 घंटे के लिए शराब के शटर गिर जाने का सीधा मतलब है कि करोड़ों रुपये का लेनदेन एक झटके में थम जाएगा. आइए समझते हैं कि दिल्ली में रोजाना शराब का कितना कारोबार होता है, लोग कितनी बोतलें खरीद लेते हैं और इस दो दिन की पाबंदी से सरकार को कितने भारी वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ेगा.

दिल्ली में शराब का भारी कारोबार
आबकारी विभाग के आंकड़ों और बिक्री के ट्रेंड पर नजर डालें तो सामान्य दिनों में दिल्ली में हर रोज औसतन 13 से 14 लाख शराब और बीयर की बोतलें बिक जाती हैं. वीकेंड या त्योहारों के मौके पर ये आंकड़ा 1517 लाख के पार भी पहुंच जाता है.
अगर इस भारी खपत को रुपयों में आंका जाए, तो दिल्ली में रोजाना करीब 30 से 40 करोड़ रुपये की शराब काउंटर से बिकती है. शहर भर में फैले सैकड़ों ठेकों पर सुबह से रात तक ग्राहकों की कतारें लगी रहती हैं. जब दो दिनों के लिए पूरी दिल्ली में शराब की बिक्री पर रोक रहेगी, तो इसका हिसाब ये है कि इन दो दिनों में करीब 25 से 30 लाख बोतलों की बिक्री पूरी तरह रुक जाएगी. खुदरा बाजार के लिहाज से देखें तो शराब विक्रेताओं का लगभग 60 से 80 करोड़ रुपये का ग्रॉस बिजनेस इन दो दिनों में पूरी तरह ठप पड़ जाएगा.
40 करोड़ के टैक्स का नुकसान
दिल्ली सरकार की कमाई का एक बहुत बड़ा हिस्सा शराब पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी और वैट से आता है. सरकार हर साल आबकारी से 6 हजार से 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का राजस्व जुटाती है. इसका सीधा मतलब ये हुआ कि सरकार की झोली में शराब की बिक्री से रोजाना करीब 18 से 20 करोड़ रुपये का टैक्स आता है.
अब जब 9 और 10 अक्टूबर को लगातार दो दिन दुकानें बंद रहेंगी, तो सरकार को मिलने वाला ये दैनिक राजस्व शून्य हो जाएगा. गणित साफ है कि महज दो दिन ठेके बंद रखने से दिल्ली सरकार के खजाने को सीधे 35 से 40 करोड़ रुपये के टैक्स का नुकसान उठाना पड़ेगा. ये वो रकम है जो सरकारी योजनाओं, वेतन और शहर के विकास कार्यों में इस्तेमाल होती है.
ये नुकसान केवल आम दुकानों तक सीमित नहीं है, क्योंकि आबकारी विभाग के आदेश के तहत हर कैटेगरी की दुकान बंद की गई है. सरकारी निगमों की L6 और L6FG दुकानों के साथसाथ L8 लाइसेंस वाली देशी शराब की दुकानें भी बंद रहेंगी. वहीं बड़े शॉपिंग मॉल्स में चलने वाली L10 लाइसेंस की प्रीमियम दुकानें और L14 लाइसेंस वाली दुकानें भी सील रहेंगी. महंगे ब्रांड्स की बिक्री रुकने से सरकार को मिलने वाला प्रीमियम टैक्स भी पूरी तरह रुक जाएगा.



