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​खुशी के पल में भी क्यों घेरता है डर? प्रेग्नेंसी में एंग्जायटी के पीछे हैं ये 3 कारण

प्रेग्नेंसी फेज में महिलाएं एक बड़े बदलाव से गुजर रही होती हैं. ऐसे में उन्हें कई तरह की समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है, जिसमें से एक है मूड में बदलाव होना. अक्सर देखने में आता है कि प्रेग्नेंसी में कुछ महिलाएं अचानक बहुत खुश तो बिना कारण भी कई बार चिड़चिड़ी हो जाती हैं. दरअसल सीधे तौर पर भले ही लगे कि बिना बात के क्यों तनाव हो रहा है, जबकि घर का माहौल भी खुशमिजाज है, लेकिन शरीर के अंदर जो बदलाव हो रहे होते हैं, वो इसके जिम्मेदार होते हैं.

​खुशी के पल में भी क्यों घेरता है डर? प्रेग्नेंसी में एंग्जायटी के पीछे हैं ये 3 कारण

अगर प्रेग्नेंसी में बस थोड़ी सी एक्स्ट्रा केयर रखी जाए तो इस दौरान होने वाली कई समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है. इससे आपके ये 9 महीने का फेज हंसीखुशी गुजरता है. ज्यादातर लोग इस समय बस डाइट पर ही ज्यादा फोकस करते हैं, जबकि कई और चीजों का भी ख्याल रखना होता है. चलिए जान लेते हैं प्रेग्नेंसी में बिना कारण होने वाली एंग्जायटी, स्ट्रेस की क्या हैं वजहें.

प्रेग्नेंसी में एंग्जायटी महसूस होना

MBBS, MS गायनेकोलॉजिस्ट डॉक्टर मीरा पाठक कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाएं अक्सर ये कहती हैं कि नॉर्मल लाइफ सिचुएशन होने के बावजूद अक्सर अब उनको तनाव ज्यादा महसूस होने लगा है. उन्होंने इसके तीन कारण बताए हैं.

पहला कारण हार्मोन

प्रेग्नेंसी के वक्त महिलाओं में फीमेल हार्मोन एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन काफी ज्यादा बढ़े हुए होते हैं. वहीं नॉर्मल दिनों में ये हार्मोन हमारे ब्रेन पर एक्ट करते हैं और न्यूरो हार्मोन्स के द्वारा एक इमोशनल रेग्युलेटर, मूड स्टेबलाइजर और स्ट्रेस रिस्पांडर की भूमिका निभाते हैं. जब प्रेग्नेंसी के दौरान ये हार्मोन बढ़ने लगते हैं तो इमोशनली डिसरेग्युलेटेड महसूस होने लगता है. मूड डिस्टेबलाइजर हो जाता है, इसलिए मूड स्विंग ज्यादा होती है. स्ट्रेस का रिस्पॉन्स ऐसा हो जाता है कि छोटीछोटी बातों में जल्दी मूड खराब हो जाता है और तनाव लंबे समय तक भी महसूस होता है.

प्रेग्नेंसी में ऐसे रखें अपना ख्याल

शारीरिक बदलाव भी है वजह

महिलाओं की बॉडी में प्रेग्नेंसी के दौरान काफी ज्यादा बदलाव आते हैं. भूख ज्यादा लगती है, वजन बढ़ने लगता है, थकान होने लगती है. उल्टी जैसा महसूस होता है या नींद कम आती है. इन सिचुएशन में महिलाओं के अंदर सवाल आते हैं कि क्या ये मेरा वजन बढ़ रहा है सही है. क्या मैं बाद में फिर से वजन कम कर पाउंगी, क्या ये चेंजेस नॉर्मल हैं. इन वजहों से भी मूड में बदलाव होता है. इसकी एक वजह ये भी है कि लंग्स और हार्ट पर प्रेशर पड़ता है तो ब्लड वॉल्यूम बढ़ जाता है. ऐसे में धड़कन ज्यादा महसूस होती है. सांस में समस्या होना जैसी महसूस होती है तो इस वजह से स्ट्रेस जैसी फीलिंग ज्यादा होने लगती है.

इमोशनल चेंजेस

प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में इससे जुड़े कई इमोशनल बदलाव भी आ रहे होते हैं, जैसे वो सोचने लगती हैं कि क्या मेरी प्रेग्नेंसी नॉर्मल है. क्या मेरे होने वाले बच्चे का हेल्थ नॉर्मल है. मैं इस प्रेग्नेंसी के वक्त जिम्मेदारियां कैसे संभाल पाउंगी, क्या डिलीवरी के बाद मैं बच्चे की देखभाल अच्छे से कर पाउंगी. क्या मुझे फैमिली का सपोर्ट मिलेगा. इस तरह के सवालों से भी स्ट्रेस काफी हद तक बढ़ जाता है.

कैसे रखें अपना ख्याल?

एक्सपर्ट कहती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान अपना ध्यान रखें, जैसे कम से कम दिन में 2 घंटे और रात 7 से 8 घंटे की बढ़िया नींद जरूर लें. दूसरी चीज है कि योग करें, ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें. ऐसा म्यूजिक सुनें जो रिलैक्स महसूस कराएं और डॉक्टर की सलाह से हल्कीफुल्की वॉक करें. इससे वो अपने स्ट्रेस को मैनेज कर सकती हैं और खुद को एनर्जेटिक महसूस कर सकती हैं.

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