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अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड: से बढ़ सकता है दिल की बीमारी और डायबिटीज का जोखिम, 88 लाख से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी में सामने आई अहम बात.

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड: से बढ़ सकता है दिल की बीमारी और डायबिटीज का जोखिम, 88 लाख से ज्यादा लोगों पर हुई स्टडी में सामने आई अहम बात.

पैकेट वाले चिप्स, कुकीज, मीठे ड्रिंक, इंस्टेंट नूडल्स और रेडी-टू-ईट फूड आज हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं। ये खाने में आसान होते हैं और समय भी बचाते हैं, लेकिन इनका जरूरत से ज्यादा सेवन सेहत पर बुरा असर डाल सकता है। Family Medicine and Community Health जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड (UPF) के सेवन और दिल की बीमारियों, कैंसर, डायबिटीज सहित कई स्वास्थ्य जोखिमों के बीच संबंध पाया गया है।

शोधकर्ताओं ने अमेरिका, यूरोप, एशिया और ओशिनिया के वयस्कों से जुड़े 51 अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। इन अध्ययनों में कुल करीब 88 लाख 19 हजार लोगों के आंकड़े शामिल थे और प्रतिभागियों पर 2 से 32 साल तक नजर रखी गई। शोध में हृदय संबंधी घटनाओं, कैंसर, मोटापे, डायबिटीज, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और समय से पहले मौत जैसे परिणामों का आकलन किया गया।

रोज 100 ग्राम ज्यादा UPF खाने से दिल के जोखिम में 14% का अंतर

अध्ययन में पाया गया कि रोजाना अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड की मात्रा में हर 100 ग्राम की बढ़ोतरी हृदय संबंधी घटनाओं के करीब 14 प्रतिशत अधिक जोखिम से जुड़ी थी। इन घटनाओं में हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हृदय रोग से संबंधित अन्य गंभीर परिणाम शामिल हो सकते हैं।

हालांकि, इस आंकड़े को समझना जरूरी है। इसका मतलब यह नहीं है कि 100 ग्राम अतिरिक्त पैकेट वाला खाना खाते ही किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आ जाएगा। यह प्रतिशत अध्ययन में देखे गए जोखिम के अंतर को दर्शाता है, न कि किसी व्यक्ति के बीमार होने की निश्चित संभावना को।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि शोधकर्ताओं ने पहले से प्रकाशित अध्ययनों के आंकड़ों का विश्लेषण किया। ऐसे अवलोकन-आधारित शोध से किसी संबंध का पता लगाया जा सकता है, लेकिन यह अपने आप साबित नहीं करता कि बीमारी का कारण सिर्फ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड ही है।

कैंसर और डायबिटीज के जोखिम से भी मिला संबंध

अध्ययन में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के सेवन और कुछ अन्य स्वास्थ्य परिणामों के बीच भी संबंध सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार, अधिक सेवन के साथ:

  • कैंसर के जोखिम में करीब 4 प्रतिशत का अंतर पाया गया।
  • किसी भी कारण से होने वाली मौत के जोखिम में करीब 3 प्रतिशत का अंतर देखा गया।
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम या डायबिटीज के जोखिम में करीब 2 प्रतिशत का अंतर सामने आया।

ये आंकड़े अध्ययन में दर्ज संबंधों को दर्शाते हैं। इन्हें हर व्यक्ति पर लागू होने वाली निश्चित भविष्यवाणी या बीमारी होने की गारंटी नहीं समझना चाहिए। स्वास्थ्य पर उम्र, आनुवंशिकता, शारीरिक गतिविधि, धूम्रपान, नींद और संपूर्ण खानपान जैसी कई चीजों का प्रभाव पड़ता है।

कौन-से खाद्य पदार्थ अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड में आते हैं?

हर पैकेट में मिलने वाला या किसी भी तरह से प्रोसेस किया गया खाना अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड नहीं होता। खाद्य पदार्थों को तैयार करने और सुरक्षित रखने की अलग-अलग प्रक्रियाएं होती हैं। इसलिए केवल पैकेट देखकर किसी चीज को UPF मान लेना सही नहीं है।

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के आम उदाहरणों में शामिल हो सकते हैं:

  • पैकेट वाले चिप्स और कुछ नमकीन स्नैक्स
  • कुकीज, कैंडी और कई तरह की कन्फेक्शनरी
  • अतिरिक्त चीनी वाले सॉफ्ट ड्रिंक
  • इंस्टेंट नूडल्स और कुछ रेडी-टू-ईट भोजन
  • कुछ प्रोसेस्ड मीट उत्पाद
  • औद्योगिक तरीके से बने कई पैकेज्ड बेकरी उत्पाद

दूसरी ओर, दूध का पाश्चराइजेशन, फ्रोजन सब्जियां और डिब्बाबंद बीन्स जैसी चीजें प्रोसेस्ड हो सकती हैं, लेकिन जरूरी नहीं कि वे अल्ट्रा-प्रोसेस्ड श्रेणी में आएं। साबुत अनाज की ब्रेड भी अपनी सामग्री और बनाने की प्रक्रिया के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में आ सकती है।

दिल की सेहत पर कैसे पड़ सकता है असर?

कई अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में नमक, अतिरिक्त चीनी और सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक हो सकती है। कुछ उत्पादों में फाइबर और अन्य जरूरी पोषक तत्व कम होते हैं। ऐसे खाद्य पदार्थों को बार-बार और अधिक मात्रा में खाने से जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेना आसान हो सकता है।

समय के साथ असंतुलित खानपान वजन बढ़ने, हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी समस्याओं में योगदान दे सकता है। ये सभी कारक हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं। हालांकि, हर अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पाद की पोषण गुणवत्ता एक जैसी नहीं होती और किसी खाद्य पदार्थ का असर उसकी सामग्री तथा कुल डाइट पर भी निर्भर करता है।

रोजमर्रा के खानपान में क्या बदलाव करें?

सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए हर पैकेट वाले खाद्य पदार्थ को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। इसके बजाय खानपान में संतुलन और खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर ध्यान देना अधिक व्यावहारिक हो सकता है।

  • रोज के भोजन में फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज शामिल करें।
  • पैकेट वाले खाद्य पदार्थ खरीदते समय पोषण संबंधी जानकारी पढ़ें।
  • अतिरिक्त चीनी और सोडियम की अधिक मात्रा वाले उत्पादों का सेवन सीमित रखें।
  • मीठे ड्रिंक की जगह सामान्य पानी को प्राथमिकता दें।
  • चिप्स, कुकीज और रेडी-टू-ईट स्नैक्स को रोजमर्रा के भोजन का मुख्य हिस्सा न बनाएं।
  • घर पर तैयार किए गए संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष

अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और कई गंभीर बीमारियों के बीच संबंध पर सामने आए शोध ने रोजमर्रा के खानपान पर ध्यान देने की जरूरत को फिर रेखांकित किया है। हालांकि, किसी एक खाद्य पदार्थ को सभी बीमारियों का कारण मानना सही नहीं होगा। बेहतर स्वास्थ्य के लिए संपूर्ण आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और अन्य स्वस्थ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

डिस्क्लेमर: यह लेख प्रकाशित अध्ययन और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। अध्ययन में पाया गया संबंध अपने आप कारण साबित नहीं करता। किसी बीमारी की रोकथाम या इलाज के लिए डॉक्टर की सलाह लें।

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