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​खाने की बर्बादी पर दुनिया के कितने देशों में सख्त कानून, इससे कितना नुकसान?

World Food Day 2026: दुनिया में कई करोड़ लोगों को रोज भर पेट भोजन नहीं मिलता तो इसी दुनिया में कई सैकड़ा टन भोजन बर्बाद हो रहा है. सड़कों पर फेंक दिया जा रहा है. खाने की बर्बादी का मतलब सिर्फ प्लेट में बचा भोजन नहीं है. खेत में न कट पाने वाली फसल, भंडारण में खराब हुआ अनाज, बाजार तक पहुंचने से पहले नष्ट हुई उपज और दुकानों या घरों में फेंका गया खाना भी इस समस्या का हिस्सा है. खाद्य नुकसान और खाद्य बर्बादी आपूर्ति शृंखला के अलगअलग चरणों में होती है. खाना बर्बादी से रोकने को कई देशों में कुछ नियमकानून भी बने हैं, लेकिन वे जागरूकता फैलाने के इरादे से हैं. सख्त सजा या जेल भेजने जैसा प्रावधान अभी दुनिया में नहीं है.

​खाने की बर्बादी पर दुनिया के कितने देशों में सख्त कानून, इससे कितना नुकसान?

आइए, विश्व खाद्य दिवस के मौके पर समझते हैं कि दुनिया के अनेक हिस्सों में खाना की बर्बादी रोकने के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं? कितना खाना बर्बाद हो रहा है? कौन देश इस मामले में टॉप पर है?

दुनिया में कितना खाना बर्बाद होता है?

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2022 में दुनिया भर में खुदरा बाजार, भोजन सेवा और घरों में करीब 1.05 अरब टन खाना बर्बाद हुआ. यह उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध भोजन का लगभग 19 प्रतिशत था. इसके अलावा, खेत से दुकान तक पहुंचने के दौरान दुनिया के करीब 13 प्रतिशत भोजन के नुकसान का अनुमान है. इन दोनों आंकड़ों को जोड़कर देखें तो समस्या और भी बड़ी दिखाई देती है.

औसतन हर व्यक्ति साल में करीब 79 किलो खाना बर्बाद करता है. फोटो: AI Generated

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक कुल बर्बादी में घरों की हिस्सेदारी सबसे अधिक थी. घरों में 631 मिलियन टन, भोजन सेवा क्षेत्र में 290 मिलियन टन और खुदरा दुकानों में 131 मिलियन टन खाना बर्बाद हुआ. मतलब यह हुआ कि हर दिन घरों में एक अरब से अधिक भोजन के बराबर खाना फेंका जाता है. औसतन हर व्यक्ति साल में करीब 79 किलो खाना बर्बाद करता है. यह समस्या केवल अमीर देशों तक सीमित नहीं है. UNEP के अनुसार अलगअलग आय वाले देशों में प्रति व्यक्ति घरेलू खाद्य बर्बादी का अंतर अपेक्षा से कम पाया गया है.

बर्बादी में कौनकौन देश आगे है?

कौन सा देश सबसे ज्यादा खाना बर्बाद करता है? इसका जवाब इस बात पर निर्भर करता है कि तुलना कुल मात्रा से हो रही है या प्रति व्यक्ति बर्बादी से. बड़ी आबादी वाले देश कुल मात्रा में ऊपर आ सकते हैं, जबकि छोटी आबादी वाले देश प्रति व्यक्ति आंकड़े में आगे दिख सकते हैं. देशों में आंकड़े जुटाने और मापने के तरीके एक जैसे नहीं हैं. इसलिए अलगअलग सूचियों में कुछ फर्क दिखाई डे सकता है.

चीन ने 2021 में खाद्य बर्बादी रोकने के लिए कानून लागू किया.

साल 2024 के देशवार अनुमान वाली एक सूची में चीन की कुल वार्षिक खाद्य बर्बादी करीब 10.9 करोड़ टन और भारत की करीब 7.8 करोड़ टन बताई गई है. उसी सूची में अमेरिका का अनुमान करीब 2.5 करोड़ टन और मिस्र का करीब 1.8 करोड़ टन है. यह तुलना कुल मात्रा की है, प्रति व्यक्ति बर्बादी की नहीं. प्रति व्यक्ति आंकड़े अलग तस्वीर दिखाते हैं. उसी सूची में मालदीव, सेशेल्स और सीरिया जैसे देशों के घरेलू खाद्य बर्बादी के अनुमान ऊंचे हैं. लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि इन आंकड़ों को हर देश के लिए एक समान नहीं समझने का सुझाव है. UNEP ने भी कहा है कि कई देशों में नियमित और भरोसेमंद राष्ट्रीय आंकड़ों की कमी है.

किन देशों में सख्त नियम हैं?

कुछ देशों ने खाना फेंकने को घटाने के लिए कानून बनाए हैं. इन नियमों का लक्ष्य हर जगह एक जैसा नहीं है. कहीं दुकानों को बचा हुआ सुरक्षित भोजन दान करना पड़ता है. कहीं खाद्य कचरे को अलग इकट्ठा करना जरूरी है. कुछ जगहों पर बड़ी मात्रा में खाना फेंकने पर जुर्माना भी हो सकता है. फ्रांस में 2016 के कानून के तहत बड़े खाद्य खुदरा विक्रेताओं को खाने योग्य बचा हुआ भोजन नष्ट करने के बजाय दान की दिशा में काम करना होता है. उन्हें खाद्य सहायता संगठनों के साथ समझौते करने होते हैं. नियम तोड़ने पर दंड का प्रावधान है. इस कानून का मकसद खाने योग्य भोजन को जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाना है.

कुछ देशों ने खाना फेंकने को घटाने के लिए कानून बनाए हैं.

दक्षिण कोरिया ने घरेलू और व्यावसायिक खाद्य कचरे को अलग इकट्ठा करने और पुनर्चक्रित करने की व्यवस्था बनाई है. कई जगह लोग जितना खाद्य कचरा निकालते हैं, उसके आधार पर शुल्क देते हैं. UNEP की रिपोर्ट में दक्षिण कोरिया की व्यवस्था को ऐसे उदाहरण के रूप में बताया गया है जिसमें नियमों के साथ जनजागरूकता और पुनर्चक्रण पर भी जोर है.

चीन ने 2021 में खाद्य बर्बादी रोकने के लिए कानून लागू किया. इसमें रेस्तरां को ग्राहकों को जरूरत से ज्यादा ऑर्डर करने से रोकने और भोजन की बर्बादी के प्रति जागरूक करने के उपाय करने होते हैं. कुछ मामलों में नियम तोड़ने वाले कारोबार पर जुर्माना लगाया जा सकता है. जापान में बड़े खाद्य कारोबारों के लिए खाद्य कचरे की रिपोर्टिंग और उसे घटाने के प्रयास जरूरी किए गए हैं. वहां कानून के साथ भोजन को पशु आहार या खाद के रूप में उपयोग करने और लोगों को जागरूक करने पर भी काम होता है.

सिंगापुर में बड़े खाद्य अपशिष्ट पैदा करने वाले कुछ व्यावसायिक परिसरों के लिए कचरे को अलग करना और उसके उपचार की व्यवस्था करना जरूरी है. नियम किन परिसरों पर लागू होते हैं, यह उनके आकार और गतिविधि पर निर्भर करता है. मतलब, यह स्पष्ट है कि अभी इस मामले में जीतने भी नियमकानून हैं, उनमें सख्त सजा या जेल भेजने जैसा कानून नहीं है.

2023 में दुनिया भर में लगभग 73.3 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे.

खाने की बर्बादी से नुकसान

जब खाना फेंका जाता है, तो उसे उगाने और पहुंचाने में लगे संसाधन भी व्यर्थ जाते हैं. खेतों में पानी और जमीन लगती है. खेती, पैकिंग, ठंडे भंडारण और परिवहन में ऊर्जा खर्च होती है. लैंडफिल में सड़ता जैविक कचरा मीथेन गैस भी छोड़ सकता है, जो जलवायु परिवर्तन में योगदान देती है. इस बर्बादी का मानवीय पहलू भी है. एक ओर बड़ी मात्रा में खाना फेंका जाता है. दूसरी ओर दुनिया के अनेक लोग पर्याप्त भोजन और पोषण से वंचित हैं. बचा हुआ सुरक्षित भोजन समय पर दान करना इस अंतर को कम करने का एक व्यावहारिक तरीका हो सकता है.

संयुक्त राष्ट्र की 2024 की खाद्य सुरक्षा और पोषण की स्थिति रिपोर्ट के अनुसार, 2023 में दुनिया भर में लगभग 73.3 करोड़ लोग भूख से प्रभावित थे. यह करीब हर 11 में से 1 व्यक्ति है. यह आंकड़ा उन लोगों का अनुमान है जिन्हें पर्याप्त भोजन नहीं मिल पाता. इसका अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि सभी लोग हर रोज भूखे सोते हैं.

हम क्या कर सकते हैं?

घर में भोजन की योजना बनाएं और जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें. फ्रिज में रखे खाने को समय पर इस्तेमाल करें. बचा हुआ भोजन सुरक्षित तरीके से रखें और अगली बार खाने में शामिल करें. तारीख के लेबल को समझें और खाने योग्य भोजन को केवल दिखावट के कारण न फेंकें. समारोहों और सामुदायिक भोज में मेहमानों की संख्या के हिसाब से भोजन बनाएं.

सुरक्षित बचा हुआ खाना स्थानीय भोजन सहायता समूहों तक पहुंचाने की व्यवस्था करें. विश्व खाद्य दिवस पर यह कहना उचित होगा कि भोजन की कद्र सिर्फ उसे उगाने से नहीं, उसे सही ढंग से इस्तेमाल करने से भी होती है. सरकारें, कारोबार, किसान और उपभोक्ता मिलकर भोजन की बर्बादी घटा सकते हैं. हमारी थाली में लिया गया हर निवाला और खरीदा गया हर सामान इस बदलाव का हिस्सा बन सकता है.

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