इंडोनेशिया के जंगलों में आग लगी है. धुएं ने लोगों को परेशान कर दिया है. धुआं तेजी से फैल रहा है. इंडोनेशिया के जावा द्वीप पर लगी आग से जूझते हुए चार लोगों की मौत हो गई है. आग से निकलने वाला जहरीला धुआं दक्षिणपूर्व एशिया में फैल रहा है, जिसके कारण स्कूलों को बंद करना पड़ा है. पूरे क्षेत्र में सांस से जुड़े मामलों में बढ़ोतरी हुई है. इसका असर फिलीपींस, मलेशिया और सिंगापुर तक हो रहा है. इससे निपटने के लिए हवाई जहाज से ड्राई आइस गिराने की योजना बनाई गई है.

इससे पहले क्लाउड सीडिंग और वॉटर बॉम्बिंग जैसे तरीके आजमाए गए थे और अब राष्ट्रपति प्रबोवो ने ड्राई आइस का इस्तेमाल करने की मंजूरी दी. जानें क्या है ड्राई आइस, यह कैसे काम करती है और क्या पूरी तरह से राहत दे पाएगी.
क्या है ड्राई आइस?
ड्राई आइस असल में ठोस रूप में जमी हुई कार्बन डाइऑक्साइड है. इसका तापमान करीब 78.5 डिग्री सेल्सियस होता है. यह सामान्य बर्फ की तरह पिघलकर पानी नहीं बनती, बल्कि सीधे गैस में बदल जाती है. इस प्रक्रिया को ‘सब्लिमेशन’ कहते हैं. यही कारण है कि इसे ‘ड्राई’ आइस कहा जाता है. आइसक्रीम, खानेपीने की चीजों की कोल्ड चेन, वैक्सीन की ढुलाई और स्टेज पर धुएं जैसे इफेक्ट में इसका खूब इस्तेमाल होता है.
ड्राई आइस.
यह कोई नई तकनीक नहीं है. ड्राई आइस का इस्तेमाल 1946 से शुरू हुआ, जब अमेरिकी शोधकर्ता विंसेंट शेफर ने पाया कि यह बादलों में बर्फ के कण बनवा सकती है. 1947 में अमेरिकी सेना ने एक तूफान में कुचली हुई ड्राई आइस गिराने का प्रयोग किया. उसी साल ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों ने भी इस विधि से बारिश कराने की कोशिश की.
धुआं हटाने में कैसे काम करेगी?
इंडोनेशिया में यह आग नहीं, धुएं को हटाने का काम करेगी. कई बार जमीन के पास की ठंडी हवा के ऊपर गर्म हवा की परत बन जाती है। इसे ‘टेम्परेचर इन्वर्जन’ कहते हैं. यह परत ढक्कन की तरह काम करती है और धुआं जमीन के पास ही फंसा रहता है. सिद्धांत यह है कि ड्राई आइस आसपास की हवा को तेजी से ठंडा करेगी, इन्वर्जन टूटेगा और प्रदूषण फैलकर छंट सकेगा. यह तरीका पारंपरिक क्लाउड सीडिंग से अलग है, क्योंकि इसमें पहले से बादल होना जरूरी नहीं और इसका मकसद बारिश कराना नहीं है.
इंडोनेशिया में आग के बाद हर तरफ धुआं ही धुआं.
क्या आग बुझाने के लिए यह काफी है?
जवाब है, नहीं. आग के असली स्रोत पर ड्राई आइस का कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा. इंडोनेशिया के जंगल और पीटलैंड की आग जमीन के नीचे तक सुलगती है और ऐसी आग को बुझाने के लिए पानी, बारिश और जमीन पर एक्शन लेना जरूरी है. स्थानीय अधिकारियों ने भी माना है कि जंगल की आग के धुएं पर उष्णकटिबंधीय हालात में इस तकनीक का असर अभी साबित नहीं हुआ है.वैसे भी दक्षिण सुमात्रा में ही अब तक 70 से ज्यादा मौसमपरिवर्तन ऑपरेशन हो चुके हैं, फिर भी घना धुआं छाया हुआ है.
क्यों बेकाबू है आग?
इंडोनेशिया सालों के सबसे खराब फायर सीजन से जूझ रहा है. लंबे सूखे और ताकतवर अलनीनो ने ऐसे हालात बनाए हैं कि जमीन साफ करने के लिए लगाई गई आग बेकाबू हो गई और सुमात्रा व बोर्नियो के बड़े हिस्से घने धुएं में डूब गए. ज्यादातर आग पीटलैंड में है. पीटलैंड में आंशिक रूप से सड़े हुए जैविक पदार्थ की परतें सूखने पर जल्दी जलने लगती हैं, इसलिए आग बुझाना मुश्किल होता है.
इंडाेनेशिया मेंआग से निकलने वाला जहरीला धुआं दक्षिणपूर्व एशिया में फैल रहा है. फोटो: Getty Images
सिंगापुर, मलेशिया और फिलीपींस तक पहुंचा धुआं
इस धुएं का असर सीमाओं के पार दिख रहा है.सिंगापुर और मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर हाल के हफ्तों में दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित बड़े शहरों में शामिल रहे. मलेशिया की एयरलाइन फायरफ्लाई ने कम विजिबिलिटी के चलते कुआलालंपुर और सिंगापुर के बीच अपनी उड़ानें रद्द कीं. सिंगापुर सरकार ने 2015 के बाद पहली बार धुएं से जुड़ी बीमारियों के लिए सब्सिडी वाला इलाज फिर शुरू किया है. मलेशिया ने कई राज्यों में स्कूल बंद कराए और अब तक 11 क्लाउड सीडिंग मिशन चलाए हैं. वहीं, फिलीपींस में सितंबर में एक हफ्ते तक यहां PM 2.5 का स्तर गंभीर श्रेणी में रहा. कई शहरों और प्रांतों में स्कूल बंद करने पड़े.
सिंगापुर तक असर
Singapore leader vows to take action against companies found responsible for fires in Indonesia that have plunged the region into an air pollution crisis.
Smoke from the fires has blanketed parts of Southeast Asia, closing schools and fuelling a surge in respiratory complaints
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— AFP News Agency October 16, 2026
अब आगे क्या?
मलेशिया के एक मंत्री ने कहा है कि आसियान के पास प्राकृतिक आपदाओं के लिए तंत्र तो है, लेकिन धुएं को आपदा की श्रेणी में नहीं रखा गया है. फिलीपींस इस साल आसियान का अध्यक्ष है और उसने पुष्टि की है कि यह मुद्दा एजेंडे में रहेगा. उधर इंडोनेशिया के पर्यावरण मंत्री का दावा है कि जंगल की आग एक महीने के भीतर बुझा ली जाएगी.
फिलहाल ड्राई आइस के प्रयोग को ‘रामबाण’ मानना जल्दबाजी होगी. यह धुएं को छांटकर राहत जरूर दे सकती है, लेकिन असली राहत तभी मिलेगी जब आग काबू में आए और बारिश का मौसम शुरू हो.



