
लखनऊ: कैफे संचालक शिवा शर्मा हत्याकांड में फरार आरोपितों की गिरफ्तारी में देरी और पुलिस की कथित लापरवाही को लेकर विभाग में कार्रवाई का सिलसिला जारी है। पहले इंस्पेक्टर और डीसीपी को हटाया गया, अब एसीपी रजनीश वर्मा पर भी कार्रवाई की गई है। सोमवार दोपहर उन्हें भी पद से हटा दिया गया। वहीं, फरार आरोपितों पर घोषित इनाम की राशि बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी गई है।
फरार आरोपितों के पुलिस की पकड़ से बाहर रहने पर सवाल
इस मामले में श्रद्धा दुबे, रश्मि और तनवीर उर्फ दानिश फरार बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों के नेपाल से सोनौली सीमा के रास्ते भारत आने और लखनऊ पहुंचने की जानकारी सामने आई है। आरोप है कि श्रद्धा दुबे लखनऊ हाई कोर्ट परिसर में कुछ समय के लिए रुकी थी, जहां एक अधिवक्ता ने उससे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए। इसके बाद वह वहां से निकल गई।
बताया गया है कि श्रद्धा लखनऊ से आगरा होते हुए सहारनपुर पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली और फरार आरोपितों की तलाश में बरती गई सतर्कता पर सवाल उठने लगे।
पहले इंस्पेक्टर और DCP पर हुई कार्रवाई
आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने और मामले में कथित लापरवाही को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने कार्रवाई की। सबसे पहले हजरतगंज के इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को लाइन हाजिर किया गया। इसके बाद डीसीपी मध्य विक्रांत वीर को उनके पद से हटाकर मुख्यालय से संबद्ध कर दिया गया।
सोमवार को एसीपी रजनीश वर्मा को भी हटा दिया गया। इस तरह मामले में अब तक तीन पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि, इंस्पेक्टर विक्रम सिंह को आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए बनाई गई टीम में शामिल रखा गया है।
फरार आरोपितों पर इनाम बढ़ाकर 50 हजार रुपये
पुलिस ने फरार श्रद्धा दुबे, रश्मि और तनवीर उर्फ दानिश पर घोषित इनाम की राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दी है। इसके बावजूद आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं होने से जांच और पुलिस की कार्रवाई पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
शिवा शर्मा हत्याकांड में पुलिस की कार्रवाई अब विभागीय जवाबदेही और फरार आरोपितों की तलाश, दोनों मोर्चों पर केंद्रित है। आने वाले दिनों में आरोपितों की गिरफ्तारी और जांच से जुड़े घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। मामले से जुड़े आरोपों और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। आरोपितों के संबंध में अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होंगे।



