गाजियाबाद के साहिबाबाद क्षेत्र में 85 लाख रुपये की कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद होने और तीन लोगों की गिरफ्तारी के मामले में जांच अब क्राइम ब्रांच को सौंप दी गई है। पुलिस इस मामले में तस्करी के नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की पड़ताल करेगी।

13 अक्टूबर को पुलिस ने सीमापुरी क्षेत्र से कोडीन युक्त कफ सिरप बरामद कर तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। शुरुआती जांच में सामने आया कि कफ सिरप हिमाचल प्रदेश की निर्माता कंपनी से दिल्ली की एक फर्म मंगाती थी। हालांकि, माल दिल्ली ले जाने के बजाय गाजियाबाद में उतरवाया जाता था और फिर बिहार में नशे के लिए इसकी तस्करी की जाती थी।
जांच में यह भी पता चला कि सिरप मंगाने वाली कंपनी बिहार में रहने वाले भोला की थी। माल के परिवहन में इस्तेमाल होने वाली ट्रांसपोर्ट कंपनी भी बिहार की थी। पुलिस को आशंका है कि इस पूरे मामले में कई स्तरों पर तस्करी का नेटवर्क सक्रिय था।
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, सामान्य तौर पर दवा के रूप में इस्तेमाल होने वाला कफ सिरप अधिकतम खुदरा मूल्य पर बिकता है। इसके विपरीत, नशे के लिए इसकी तस्करी करने पर दोगुनी या उससे अधिक कीमत मिलती है। तस्करी के जरिए भेजी गई खेप की खपत भी निर्धारित समय से कम अवधि में हो जाती है।
पुलिस उपायुक्त ट्रांस हिंडन ऋजुल ने बताया कि कफ सिरप तस्करी से जुड़े पहले के मामले भी क्राइम ब्रांच के पास हैं। ऐसे में साहिबाबाद थाने में दर्ज इस मुकदमे की विवेचना भी क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित कर दी गई है।
क्राइम ब्रांच अब पूरे मामले की तह तक जाकर तस्करी के नेटवर्क में शामिल अन्य आरोपियों की पहचान करेगी। जांच का मुख्य उद्देश्य बरामद कफ सिरप की आपूर्ति, उसके परिवहन और बिहार तक पहुंचने की प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों का पता लगाना है, ताकि इस नेटवर्क में शामिल बाकी आरोपियों को बेनकाब किया जा सके।



