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​​​​​धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा? खून की जांच से मिल सकता है अहम संकेत​​​​

​​​​​धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों को कितना नुकसान पहुंचा? खून की जांच से मिल सकता है अहम संकेत​​​​

धूम्रपान का असर धीरे-धीरे फेफड़ों की सेहत पर पड़ सकता है। कई बार अंदरूनी नुकसान बढ़ने के बावजूद शुरुआती दौर में इसके लक्षण स्पष्ट नहीं होते। ऐसे में वैज्ञानिक एक ऐसी तकनीक पर काम कर रहे हैं, जिसमें रक्त की जांच से फेफड़ों में होने वाली क्षति के संकेत मिल सकते हैं। हालांकि, यह जांच अभी नियमित चिकित्सा जांच का स्थापित विकल्प नहीं है।

खून में मौजूद सूक्ष्म कणों से मिल सकते हैं संकेत

वैज्ञानिकों के अध्ययन में एंडोथेलियल माइक्रोपार्टिकल्स नाम के बेहद छोटे कणों पर ध्यान दिया गया है। ये रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत की कोशिकाओं से निकल सकते हैं। रक्त में इनकी मात्रा बढ़ना रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने का संकेत हो सकता है।

शोधकर्ताओं के मुताबिक, धूम्रपान करने वाले लोगों में इन कणों की मात्रा और फेफड़ों की क्षति के बीच संबंध का अध्ययन किया जा रहा है। भविष्य में इस तरह के रक्त परीक्षण से फेफड़ों में होने वाले बदलावों को समझने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, केवल इन कणों की मात्रा के आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं बताया जा सकता कि किसी व्यक्ति के फेफड़े कितने खराब हो चुके हैं। इसके लिए अन्य चिकित्सकीय जांचों और लक्षणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

क्या है एम्फाइजिमा, जो फेफड़ों को पहुंचाती है नुकसान?

एम्फाइजिमा फेफड़ों की एक बीमारी है, जिसमें हवा की छोटी थैलियों यानी एल्वियोली की दीवारें क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे फेफड़ों की हवा बाहर निकालने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और सांस लेने में परेशानी होने लगती है। यह क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) का एक प्रमुख रूप है।

लंबे समय तक धूम्रपान करना एम्फाइजिमा का एक प्रमुख जोखिम कारक है। बीमारी बढ़ने पर व्यक्ति को चलने, सीढ़ियां चढ़ने या सामान्य गतिविधियां करने के दौरान भी सांस फूलने की समस्या हो सकती है।

इस बीमारी से फेफड़ों में हो चुका नुकसान आमतौर पर पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। हालांकि, धूम्रपान छोड़ने और उचित इलाज से बीमारी की प्रगति धीमी करने तथा लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

क्या अभी खून की जांच से पता चल सकता है फेफड़ों का नुकसान?

इस तरह के रक्त परीक्षण को लेकर शोध जारी है। इसे नियमित चिकित्सा में इस्तेमाल करने से पहले इसकी सटीकता, विश्वसनीयता और उपयोगिता की पुष्टि जरूरी है।

फिलहाल फेफड़ों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर स्पाइरोमेट्री जैसी जांच का इस्तेमाल कर सकते हैं। जरूरत के अनुसार अन्य जांचें भी कराई जा सकती हैं। लंबे समय से खांसी, लगातार बलगम, सांस फूलने या सीने में परेशानी होने पर चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है।

फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें?

  • धूम्रपान छोड़ें और तंबाकू के धुएं से दूर रहें।
  • घर और कार्यस्थल पर धूल, धुएं तथा प्रदूषण के संपर्क को कम करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें, अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम अपनाएं।
  • लगातार खांसी या सांस फूलने जैसे लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से फेफड़ों की जांच कराएं।

सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। रक्त में माइक्रोपार्टिकल्स की जांच को फेफड़ों की क्षति मापने का नियमित, प्रमाणित परीक्षण नहीं माना जाना चाहिए। व्यक्तिगत स्वास्थ्य संबंधी सलाह के लिए योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

contact.satyareport@gmail.com

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