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​​​​​संतान की चाह में शुरू हुआ खेल, फिर एक ऐसा सच सामने आया जिसने रिश्तों पर खड़े कर दिए सवाल​​​​

​​​​​संतान की चाह में शुरू हुआ खेल, फिर एक ऐसा सच सामने आया जिसने रिश्तों पर खड़े कर दिए सवाल​​​​

भिंड, मध्य प्रदेश: नर्सिंग की पढ़ाई करने बिहार से मध्य प्रदेश आई एक युवती की जिंदगी में प्यार, भरोसे और भविष्य के सपनों ने ऐसी जगह बना ली कि उसका अंत एक गंभीर आपराधिक मामले में हुआ। युवती की पहचान सीमा (बदला हुआ नाम) के रूप में सामने आई। पुलिस के मुताबिक, वह एक युवक के संपर्क में आई, जिसने अपनी पहचान और वैवाहिक स्थिति को लेकर उसे कथित तौर पर गुमराह किया। दोनों साथ रहने लगे और उनके एक बेटा भी हुआ। लेकिन बच्चे के जन्म के बाद रिश्ते में तनाव बढ़ा और युवती अचानक लापता हो गई।

मामले में पुलिस ने युवक और उसके दो साथियों को हिरासत में लेकर जांच की। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान युवती की हत्या की बात सामने आई, जबकि उसका शव बरामद करने के प्रयास किए गए। इस मामले ने परिवार के भरोसे, घरेलू हिंसा और रिश्ते में धोखे से जुड़े कई गंभीर सवाल खड़े किए।

पढ़ाई के लिए बिहार से आई थी युवती

सीमा बिहार के नालंदा जिले के एक गांव की रहने वाली थी। उसका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन वह नर्सिंग की पढ़ाई करके आत्मनिर्भर बनना चाहती थी। परिवार ने उसकी पढ़ाई के लिए कर्ज लेकर उसे मध्य प्रदेश के भिंड स्थित एक नर्सिंग कॉलेज में दाखिला दिलाया था। वर्ष 2023 में वह पढ़ाई के लिए भिंड पहुंची और किराये के कमरे में रहने लगी।

कॉलेज में सत्यप्रकाश उर्फ बादशाह जाटव नाम का युवक काम करता था। वह दाखिले और प्रचार-प्रसार से जुड़े काम देखता था। पुलिस के अनुसार, सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा था और उसकी पहली शादी से कोई संतान नहीं थी।

आरोप है कि उसने सीमा से अपनी पहचान छिपाई और खुद को दूसरे नाम से परिचित कराया। नौकरी दिलाने में मदद का भरोसा देकर वह सीमा के करीब आया। बातचीत बढ़ी और धीरे-धीरे दोनों के बीच प्रेम संबंध बन गए।

शादी का भरोसा देकर साथ रहने का आरोप

कुछ समय बाद दोनों बिना कानूनी विवाह के साथ रहने लगे। सीमा को विश्वास था कि सत्यप्रकाश उससे शादी कर चुका है या उसे पत्नी के रूप में स्वीकार करेगा। उसने अपने परिवार को भी यही बताया था। जब सत्यप्रकाश उसके साथ बिहार स्थित उसके गांव गया, तो परिवार ने भी उसे दामाद की तरह स्वीकार किया।

बाद में सीमा को पता चला कि सत्यप्रकाश पहले से शादीशुदा है। इस बात को लेकर दोनों के बीच तनाव हुआ, लेकिन आरोप है कि सत्यप्रकाश ने उसे भरोसा दिलाया कि बच्चा होने के बाद वह उसे अपने परिवार में जगह देगा।

कुछ समय बाद सीमा गर्भवती हो गई। पुलिस के अनुसार, सत्यप्रकाश की पहली पत्नी से संतान नहीं थी और वह सीमा से होने वाले बच्चे को अपने परिवार में रखना चाहता था। इसी वजह से उसने अपनी पत्नी को भी सीमा के बारे में बताया। रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चे के जन्म के समय सत्यप्रकाश की पत्नी और उसकी मां ने सीमा की देखभाल में मदद की थी।

बेटे के जन्म के बाद बढ़ने लगा विवाद

करीब दस महीने पहले सीमा ने एक बेटे को जन्म दिया था। इसके बाद दोनों के बीच बच्चे की देखभाल और भविष्य को लेकर विवाद बढ़ने लगा। सीमा चाहती थी कि सत्यप्रकाश उसे पत्नी का दर्जा दे और उसके साथ रहने की जिम्मेदारी स्वीकार करे। दूसरी ओर, आरोप है कि सत्यप्रकाश बच्चे को अपनी पहली पत्नी के पास रखना चाहता था।

इस बीच सीमा भिंड के एक अस्पताल में नर्सिंग अधिकारी के रूप में काम करने लगी और अपने बेटे के साथ अलग रहने लगी। सत्यप्रकाश उससे मिलने आता था, लेकिन शादी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा था।

परिवार के अनुसार, अगस्त 2024 में सत्यप्रकाश ने सीमा के साथ मारपीट की थी, जिसमें उसके सिर पर चोट आई। सीमा ने महिला थाने में शिकायत भी दर्ज कराई थी। हालांकि, बाद में दोनों के बीच समझौता हो गया और वह फिर उसके संपर्क में रहने लगी।

अचानक बंद हो गया मोबाइल, परिवार को हुई चिंता

8 अक्टूबर 2024 की शाम सीमा ने अपने परिवार से फोन पर बात की थी। उस समय उसने बताया था कि वह ठीक है। इसके बाद उसका मोबाइल बंद हो गया। अगले दिन भी संपर्क नहीं होने पर परिवार परेशान हो गया।

जब सीमा के भाई ने सत्यप्रकाश से संपर्क किया, तो उसने पहले सीमा की तबीयत खराब होने की बात कही। बाद में उसने दावा किया कि सीमा की मौत हो गई है और अंतिम संस्कार भी कर दिया गया है। उसने यह भी कहा कि अस्थियां चंबल नदी में प्रवाहित कर दी गई हैं।

यह सुनकर परिवार को संदेह हुआ। उनका सवाल था कि यदि सीमा की मौत हो गई थी, तो उन्हें समय पर सूचना क्यों नहीं दी गई और अंतिम संस्कार इतनी जल्दबाजी में क्यों किया गया।

घूमने के बहाने ले जाने का आरोप

पुलिस की जांच के मुताबिक, 8 अक्टूबर की रात सत्यप्रकाश सीमा को कानपुर घुमाने और खरीदारी कराने के बहाने अपने साथ ले गया था। उसके साथ एंबुलेंस चालक राजवीर खन्ना और आशू नाम के एक अन्य व्यक्ति के भी होने की बात सामने आई।

जांच में आरोप लगाया गया कि यात्रा के दौरान अगले दिन सुबह उत्तर प्रदेश के इटावा जिले में पचनदा के आसपास सीमा की गला दबाकर हत्या कर दी गई। इसके बाद उसके शव को यमुना नदी में फेंकने की बात सामने आई। पचनदा वह क्षेत्र है जहां यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहूज नदियां मिलती हैं।

पुलिस के अनुसार, यह घटनाक्रम आरोपियों से पूछताछ में सामने आया था। मामले में शव बरामद नहीं होने के कारण जांचकर्ताओं के सामने घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पुष्टि करना एक बड़ी चुनौती थी।

गुमशुदगी की रिपोर्ट से पुलिस को हुआ शक

सीमा के लापता होने के बाद सत्यप्रकाश ने 13 अक्टूबर को भिंड के कोतवाली थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने उसकी तलाश के लिए पर्चे भी छपवाए थे। लेकिन सीमा के परिवार को उसकी बातों पर भरोसा नहीं हुआ। उसके पिता बिहार से भिंड पहुंचे और पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।

पुलिस ने जांच के दौरान मोबाइल लोकेशन, उपलब्ध सीसीटीवी रिकॉर्ड और सीमा की सहेली से मिली जानकारी की पड़ताल की। सहेली ने बताया था कि सीमा ने उसे कानपुर जाने की बात कही थी। पुलिस के मुताबिक, जांच में मिले तथ्यों और पूछताछ के बाद सत्यप्रकाश ने हत्या की बात स्वीकार की।

हालांकि, किसी भी आरोपी के कथित कबूलनामे को अपने आप अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता। आरोपों की पुष्टि अदालत में पेश किए जाने वाले साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर होगी।

नदी में तलाश, लेकिन नहीं मिला शव

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर इटावा जिले के पचनदा क्षेत्र में सीमा के शव की तलाश शुरू की। तलाशी अभियान में गोताखोरों और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल की टीम की मदद ली गई। नदी का तेज बहाव और गहराई अभियान में बड़ी बाधा बने। रिपोर्ट के मुताबिक, कई किलोमीटर के क्षेत्र में तलाश के बावजूद शव नहीं मिला था।

सीमा के परिवार के लोग भी नदी किनारे पहुंचे और अपनी बेटी के बारे में जानकारी मिलने की प्रतीक्षा करते रहे। उनके लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक थी, क्योंकि एक ओर बेटी की मौत की खबर थी और दूसरी ओर अंतिम संस्कार के लिए उसका शव भी उपलब्ध नहीं था।

पुलिस ने मामले में सत्यप्रकाश के साथ राजवीर और आशू की भूमिका की भी जांच की। यह पता लगाने का प्रयास किया गया कि उन्हें कथित योजना की जानकारी थी या उन्होंने घटना के बाद शव को ठिकाने लगाने में मदद की थी।

बच्चे के भविष्य को लेकर भी उठे सवाल

सीमा का बेटा अभी बहुत छोटा था और रिपोर्ट के अनुसार, वह सत्यप्रकाश की पहली पत्नी के पास रह रहा था। इस परिस्थिति ने बच्चे की देखभाल और भविष्य को लेकर भी सवाल खड़े किए। पुलिस की जांच में यह पहलू भी शामिल था कि सत्यप्रकाश की पहली पत्नी को कथित अपराध की जानकारी थी या नहीं। इस संबंध में किसी व्यक्ति की भूमिका को बिना प्रमाण के दोषपूर्ण नहीं माना जा सकता।

सीमा के परिवार ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उनका आरोप था कि सत्यप्रकाश ने शादी का भरोसा देकर सीमा को अपने साथ रखा और बाद में उसे धोखा दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही थी और कथित सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल भी जारी थी।

सीमा की कहानी में सबसे दुखद पहलू यह है कि पढ़ाई करके आत्मनिर्भर बनने का सपना लेकर घर से निकली युवती एक गंभीर आपराधिक मामले का शिकार बनी। इस घटना ने रिश्तों में ईमानदारी, घरेलू हिंसा की शिकायतों को गंभीरता से लेने और किसी भी तरह के दबाव या धमकी की स्थिति में सहायता पाने की जरूरत को फिर सामने रखा।

सत्‍य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख उपलब्ध समाचार सामग्री और पुलिस जांच से जुड़े विवरणों पर आधारित है। मामले में लगाए गए आरोपों को अदालत द्वारा सिद्ध किए जाने तक आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

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