
बच्चों के बड़े होने के साथ उनकी भावनाओं और पसंद में भी बदलाव आने लगते हैं। किशोरावस्था में किसी की दोस्ती अच्छी लगना, किसी खास व्यक्ति से बात करने का मन करना या उसके प्रति आकर्षण महसूस करना सामान्य बात है। लेकिन जब माता-पिता को इस बारे में पता चलता है, तो कई बार वे चिंता में आकर बच्चे को डांटने लगते हैं या उस पर सख्त पाबंदियां लगा देते हैं।
ऐसा करने से बच्चा अपनी भावनाएं साझा करने के बजाय बातें छिपाने लग सकता है। इसलिए इस उम्र में माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे गुस्सा करने के बजाय बच्चे की बात समझें और उसे सही दिशा दिखाएं। आइए जानते हैं कि ऐसी स्थिति में माता-पिता को किन पांच बातों का ध्यान रखना चाहिए।
1. सबसे पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनें
यदि आपको पता चलता है कि आपका बच्चा किसी को पसंद करता है, तो तुरंत नाराज होने या सवालों की बौछार करने से बचें। उसके साथ शांत माहौल में बातचीत करें और यह समझने की कोशिश करें कि वह क्या महसूस कर रहा है।
बच्चे की बात बीच में काटना, उसका मजाक उड़ाना या उसकी भावनाओं को बेकार बताना उसके मन में झिझक पैदा कर सकता है। इसके बजाय उसे भरोसा दिलाएं कि वह अपनी बात आपके साथ साझा कर सकता है।
जब बच्चे को लगता है कि माता-पिता उसकी बात समझने की कोशिश करते हैं, तो उसके लिए अपनी परेशानी या किसी गलत अनुभव के बारे में बताना भी आसान हो सकता है।
2. प्यार को लेकर बच्चे को शर्मिंदा न करें
किशोरावस्था में किसी के प्रति आकर्षण महसूस होना अपने आप में गलत नहीं है। इसलिए बच्चे को इस बात के लिए शर्मिंदा करने या दूसरों के सामने उसकी भावनाओं का मजाक उड़ाने से बचें।
उसे समझाएं कि किसी को पसंद करना स्वाभाविक है, लेकिन भावनाओं के साथ जिम्मेदारी और समझदारी भी जरूरी है। इस उम्र में अपनी पढ़ाई, स्वास्थ्य, दोस्तों और दूसरी रुचियों के लिए भी पर्याप्त समय निकालना महत्वपूर्ण है।
माता-पिता का उद्देश्य बच्चे की भावनाओं को दबाना नहीं, बल्कि उसे अपनी भावनाओं को समझने और संतुलित निर्णय लेने में मदद करना होना चाहिए।
3. रिश्तों में सम्मान, सहमति और सुरक्षा का महत्व बताएं
बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि किसी भी रिश्ते में दोनों लोगों की भावनाओं और सीमाओं का सम्मान होना चाहिए। किसी को पसंद करने का मतलब यह नहीं है कि वह व्यक्ति हर बात मानने या हर जानकारी साझा करने के लिए बाध्य है।
बच्चे को कुछ जरूरी बातें स्पष्ट रूप से समझाएं:
- किसी के दबाव में आकर कोई फैसला न लें।
- निजी तस्वीरें, पासवर्ड, ओटीपी या संवेदनशील जानकारी साझा न करें।
- यदि कोई डराता है, धमकी देता है या ब्लैकमेल करता है, तो तुरंत किसी भरोसेमंद वयस्क को बताएं।
- किसी भी रिश्ते में अपनी और दूसरे व्यक्ति की सहमति का सम्मान करें।
बच्चे को यह भरोसा भी दिलाएं कि यदि उससे कोई गलती हो जाए या वह किसी परेशानी में फंस जाए, तो मदद मांगने पर उसे अपमानित नहीं किया जाएगा।
4. पढ़ाई और दिनचर्या में संतुलन बनाना सिखाएं
यदि बच्चा किसी खास व्यक्ति के बारे में बहुत ज्यादा सोचने लगा है और उसकी पढ़ाई, नींद या रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो उसे डांटने के बजाय संतुलित दिनचर्या बनाने में मदद करें।
पढ़ाई, खेलकूद, परिवार के साथ समय और पसंदीदा गतिविधियों के लिए उचित समय तय किया जा सकता है। मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर भी नियम बनाएं, लेकिन बेहतर होगा कि इन नियमों पर बच्चे के साथ बातचीत की जाए।
ध्यान रखें कि किसी को पसंद करने का मतलब यह नहीं कि बच्चा अपनी जिम्मेदारियां निभाने में असमर्थ है। उसकी वास्तविक परेशानी को समझकर ही उचित कदम उठाना चाहिए।
5. बच्चे के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखें
माता-पिता की चिंता स्वाभाविक है, लेकिन हर समय पूछताछ करना, बिना स्पष्ट कारण के फोन की जांच करना या बच्चे की निजी बातों पर जरूरत से ज्यादा नजर रखना उसके मन में दूरी पैदा कर सकता है।
इसका मतलब यह नहीं कि सुरक्षा से जुड़े मामलों को नजरअंदाज किया जाए। यदि ऑनलाइन संपर्क, उम्र के अंतर, दबाव, धमकी या किसी अन्य जोखिम को लेकर चिंता है, तो बच्चे से खुलकर बात करें और उसकी सुरक्षा के लिए उचित कदम उठाएं।
यदि बच्चा लगातार उदास रहता है, बहुत ज्यादा तनाव में है या उसके व्यवहार में बड़ा बदलाव दिखाई देता है, तो उससे संवेदनशीलता के साथ बात करें। जरूरत पड़ने पर योग्य काउंसलर की मदद भी ली जा सकती है।
बच्चे को डांटने से ज्यादा जरूरी है उसे समझना
किशोरावस्था में भावनाओं में बदलाव आना और किसी के प्रति आकर्षण महसूस करना जीवन का सामान्य हिस्सा हो सकता है। ऐसे समय में माता-पिता का व्यवहार बच्चे के साथ उसके रिश्ते को प्रभावित कर सकता है।
बच्चे को सही-गलत समझाना जरूरी है, लेकिन यह काम डर या शर्मिंदगी के बजाय बातचीत, भरोसे और स्पष्ट सीमाओं के जरिए करना अधिक उपयोगी हो सकता है।
याद रखें, बच्चा अपनी भावनाओं के बारे में आपसे खुलकर बात कर सके, तो आप उसे बेहतर तरीके से मार्गदर्शन और जरूरत पड़ने पर सुरक्षा भी दे सकते हैं।
सत्य रिपोर्ट डिस्क्लेमर: यह लेख किशोरावस्था और पेरेंटिंग से जुड़ी सामान्य जानकारी पर आधारित है। हर बच्चे की उम्र, परिस्थिति और जरूरत अलग होती है।



