जब बात डाइजेशन की होती है, तो हमारा ध्यान प्रोटीन, कैलोरी या सप्लीमेंट्स पर चला जाता है. फाइबर को अक्सर इग्नोर कर दिया जाता है. हालांकि, फाइबर भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि यह पेट साफ रखने, गट हेल्थ सुधारने और ब्लड शुगर व कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करने में मदद करता है.

एमएस ऋचा शर्मा बताती हैं कि सबसे बड़ी गलती है रोजाना पर्याप्त फाइबर न खाना. कई भारतीयों की डाइट में सफेद चावल, मैदा वाली चीजें और पैकेज्ड स्नैक्स तो काफी होते हैं, लेकिन दाल, सब्जियां, फल और साबुत अनाज कम होते हैं.
दूसरी गलती है यह सोचना कि फाइबर सिर्फ सलाद से मिलता है. असल में दाल, चना, राजमा, ओट्स, मिलेट्स, आटा, नट्स, बीज और फल भी फाइबर के अच्छे सोर्स हैं.
कुछ लोग कब्ज होने के बाद अचानक बहुत ज्यादा फाइबर खाना शुरू कर देते हैं. इससे गैस, ब्लोटिंग और पेट में परेशानी बढ़ सकती है. इसलिए फाइबर धीरे धीरे बढ़ाएं और साथ में पर्याप्त पानी भी पिएं.
एक और गलती है फलों और सब्जियों के छिलके बेवजह हटा देना, क्योंकि इनमें भी फाइबर होता है. इसके अलावा, साबुत अनाज की जगह रिफाइंड अनाज खाने से फाइबर कम हो जाता है.
इसलिए अपनी प्लेट में सब्जियां रखें, रोज एक या दो फल खाएं, साबुत अनाज चुनें और दाल या बीन्स को डाइट का हिस्सा बनाएं. अगर कब्ज, ब्लोटिंग या बाउल हैबिट्स में लगातार बदलाव हो रहा है, तो खुद इलाज करने के बजाय डॉक्टर से चेक करवाएं.



