
नदी, तालाब या झील के किनारे किसी पेड़ की डाल पर बैठा चमकीले नीले और नारंगी रंग का एक छोटा-सा पक्षी आपने जरूर देखा होगा। अचानक यह पानी की तरफ तेजी से झपटता है और कुछ ही पलों में मछली पकड़कर वापस अपनी जगह पर आ जाता है। इस खूबसूरत शिकारी पक्षी को किंगफिशर (Kingfisher) या किलकिला कहा जाता है।
किंगफिशर अपनी शानदार रंगत, तेज नजर और मछली पकड़ने की अनोखी कला के लिए मशहूर है। हालांकि, इसकी सबसे दिलचस्प बात यह है कि इसकी सभी प्रजातियां मछलियां नहीं खातीं। कुछ किंगफिशर जमीन पर कीड़े-मकोड़ों और छोटे जीवों का शिकार करना पसंद करते हैं। आइए जानते हैं इस अद्भुत पक्षी से जुड़े 20 रोचक तथ्य।
किंगफिशर पक्षी के बारे में 20 रोचक तथ्य
1. दुनिया में किंगफिशर की लगभग 90 प्रजातियां हैं
किंगफिशर कोई एक पक्षी नहीं, बल्कि पक्षियों का एक बड़ा समूह है। इसकी दुनिया भर में लगभग 90 प्रजातियां पाई जाती हैं। ये आकार, रंग और भोजन की आदतों के मामले में एक-दूसरे से काफी अलग होती हैं।
2. भारत में भी मिलती हैं किंगफिशर की कई प्रजातियां
भारत में किंगफिशर की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें कॉमन किंगफिशर, व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर, पाइड किंगफिशर, ब्लू-ईयर्ड किंगफिशर और ओरिएंटल ड्वार्फ किंगफिशर प्रमुख हैं। इनमें व्हाइट-थ्रोटेड किंगफिशर को भारत के कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में आसानी से देखा जा सकता है।
3. किंगफिशर का वैज्ञानिक परिवार Alcedinidae है
किंगफिशर पक्षी Coraciiformes गण से संबंधित हैं। इनके परिवार को Alcedinidae कहा जाता है। वहीं कॉमन किंगफिशर का वैज्ञानिक नाम Alcedo atthis है। इसकी पहचान चमकीले नीले ऊपरी हिस्से और नारंगी रंग के निचले शरीर से होती है।
4. सभी किंगफिशर मछलियां नहीं खाते
किंगफिशर का नाम सुनते ही मन में मछली पकड़ने वाले पक्षी की तस्वीर आती है, लेकिन इसकी सभी प्रजातियों का भोजन मछली नहीं होता। ट्री किंगफिशर की कई प्रजातियां पेड़ों और जमीन के आसपास कीड़े-मकोड़े, छिपकलियां और दूसरे छोटे जीव पकड़कर खाती हैं। कुछ प्रजातियां पानी से दूर जंगलों में भी रहती हैं।
5. अफ्रीकी बौना किंगफिशर बेहद छोटा होता है
अफ्रीकी बौना किंगफिशर (African Dwarf Kingfisher) किंगफिशर समूह की सबसे छोटी प्रजातियों में से एक है। इसका शरीर लगभग 10-13 सेंटीमीटर तक लंबा हो सकता है। छोटे आकार के बावजूद यह एक कुशल शिकारी होता है।
6. जायंट किंगफिशर का आकार काफी बड़ा होता है
अफ्रीका में पाया जाने वाला जायंट किंगफिशर (Giant Kingfisher) इस समूह की बड़ी प्रजातियों में शामिल है। इसकी लंबाई लगभग 40-45 सेंटीमीटर तक हो सकती है। इसके शरीर पर सफेद और काले रंग की धारियां होती हैं और इसकी चोंच भी काफी मजबूत होती है।
7. कॉमन किंगफिशर आकार में छोटा लेकिन बेहद फुर्तीला होता है
भारत में मिलने वाला कॉमन किंगफिशर लगभग 16-17 सेंटीमीटर लंबा होता है। इसके सिर और पीठ पर चमकीला नीला रंग दिखाई देता है, जबकि गले और पेट के आसपास नारंगी रंग होता है। छोटी चोंच और तेज नजर इसे मछली पकड़ने में मदद करती है।
8. किंगफिशर की नजर बेहद तेज होती है
मछली पकड़ने के लिए किंगफिशर को पानी के अंदर मौजूद शिकार की सही जगह का अंदाजा लगाना पड़ता है। पानी की सतह पर रोशनी मुड़ने के कारण मछली की वास्तविक स्थिति दिखाई देने वाली जगह से अलग हो सकती है। किंगफिशर की आंखें इस चुनौती से निपटने के लिए अनुकूलित होती हैं, जिससे वह शिकार पर सही निशाना लगाने में मदद पाता है।
9. इसकी चोंच मछली पकड़ने के लिए खास होती है
किंगफिशर की चोंच लंबी, नुकीली और मजबूत होती है। यह पानी में तेजी से गोता लगाकर मछली को अपनी चोंच में पकड़ सकता है। इसकी चोंच का आकार और शरीर की बनावट शिकार करने के तरीके के अनुसार विकसित हुई है।
10. नदी किनारे सुरंग बनाकर घोंसला तैयार करता है
किंगफिशर की कई प्रजातियां नदी या तालाब के किनारे मिट्टी की ऊंची दीवारों में सुरंग जैसी जगह बनाकर घोंसला तैयार करती हैं। यह सुरंग कई फीट लंबी हो सकती है। इसके आखिर में एक छोटा-सा कक्ष होता है, जहां मादा अंडे देती है।
11. किंगफिशर के अंडे सफेद रंग के होते हैं
किंगफिशर के अंडे आमतौर पर सफेद और चमकदार होते हैं। प्रजाति के अनुसार इनकी संख्या अलग-अलग हो सकती है। कई प्रजातियों में नर और मादा दोनों मिलकर अंडों को सेने और बच्चों की देखभाल करने का काम करते हैं।
12. इसका भोजन केवल मछली तक सीमित नहीं है
मछली किंगफिशर का पसंदीदा भोजन हो सकती है, लेकिन यह मेंढक, केकड़े, घोंघे, कीड़े-मकोड़े, मकड़ियां और छोटे सरीसृप भी खाता है। इसका भोजन इस बात पर निर्भर करता है कि वह किस प्रजाति का है और उसके आसपास किस तरह के जीव उपलब्ध हैं।
13. एक दिन में कितनी मछलियां खाता है किंगफिशर?
किंगफिशर को अपनी ऊर्जा बनाए रखने के लिए नियमित रूप से भोजन की जरूरत होती है। मछली खाने वाली कुछ प्रजातियां एक दिन में कई छोटी मछलियां पकड़ सकती हैं। सर्दियों में भोजन की जरूरत बढ़ सकती है। हालांकि, रोजाना कितनी मछलियां खाता है, इसका कोई एक निश्चित आंकड़ा सभी प्रजातियों पर लागू नहीं होता।
14. कुछ किंगफिशर लंबी दूरी तक प्रवास करते हैं
किंगफिशर की कुछ प्रजातियां मौसम बदलने पर एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाती हैं। ठंड बढ़ने और पानी जमने से भोजन की उपलब्धता कम हो सकती है, इसलिए वे अनुकूल क्षेत्रों की ओर चले जाते हैं। प्रवास की दूरी प्रजाति और उसके रहने वाले क्षेत्र पर निर्भर करती है।
15. किंगफिशर कभी अपना निशाना नहीं चूकता, क्या यह सच है?
किंगफिशर को लेकर यह धारणा काफी मशहूर है कि वह मछली पकड़ने में कभी असफल नहीं होता। लेकिन यह सच नहीं है। किंगफिशर एक कुशल शिकारी जरूर है, लेकिन हर बार उसका निशाना सफल नहीं होता।
पानी की सफाई, रोशनी, मछली की गति और गोता लगाने के सही कोण जैसी चीजें उसकी सफलता को प्रभावित करती हैं। कई बार उसे एक ही मछली पकड़ने के लिए बार-बार कोशिश करनी पड़ती है।
16. पाइड किंगफिशर हवा में एक जगह रुक सकता है
पाइड किंगफिशर (Pied Kingfisher) की एक खासियत है कि यह पानी के ऊपर हवा में लगभग एक ही जगह पर पंख फड़फड़ाते हुए रुक सकता है। इसे होवरिंग (Hovering) कहा जाता है। इस दौरान यह पानी के अंदर मौजूद मछली पर नजर रखता है और मौका मिलते ही नीचे गोता लगा देता है।
17. किंगफिशर की उड़ान काफी तेज होती है
किंगफिशर आमतौर पर पानी या जमीन की सतह के पास तेजी से उड़ता है। इसकी उड़ान सीधी और फुर्तीली होती है। शिकार दिखाई देने पर यह अचानक दिशा बदलकर पानी में गोता लगा सकता है।
18. इसके पैरों की बनावट भी खास होती है
किंगफिशर के पैरों की उंगलियों की बनावट उसे शाखाओं पर बैठने और पकड़ बनाने में मदद करती है। कुछ उंगलियां आपस में जुड़ी होती हैं, जिसे सिंडैक्टिल (Syndactyl) बनावट कहा जाता है। यह विशेषता किंगफिशर समूह के पक्षियों में देखने को मिलती है।
19. किंगफिशर की आवाज सीटी जैसी होती है
किंगफिशर आमतौर पर दूसरे गाने वाले पक्षियों की तरह मधुर गीत नहीं गाता। इसकी कई प्रजातियां तेज और तीखी सीटी जैसी आवाज निकालती हैं। ये आवाजें आपसी संपर्क और अपने क्षेत्र की मौजूदगी जताने में काम आती हैं।
20. किंगफिशर की कुछ प्रजातियां खतरे में हैं
किंगफिशर की कई प्रजातियों की स्थिति फिलहाल अच्छी मानी जाती है, लेकिन कुछ प्रजातियां गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही हैं। जंगलों की कटाई, प्राकृतिक आवास का नष्ट होना, प्रदूषण और बाहरी शिकारी जीवों के कारण कुछ प्रजातियों की संख्या घट रही है। गुआम किंगफिशर और तुआमोटू किंगफिशर जैसी प्रजातियों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
किंगफिशर पक्षी से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
किंगफिशर का वैज्ञानिक नाम क्या है?
किंगफिशर पक्षियों का एक समूह है। कॉमन किंगफिशर का वैज्ञानिक नाम Alcedo atthis है, जबकि इनके परिवार को Alcedinidae कहा जाता है।
भारत में किंगफिशर की कितनी प्रजातियां पाई जाती हैं?
भारत में किंगफिशर की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। इनकी संख्या अलग-अलग पक्षी सूचियों और वर्गीकरण के अनुसार बदल सकती है।
क्या किंगफिशर केवल मछली खाता है?
नहीं, किंगफिशर की कई प्रजातियां कीड़े-मकोड़े, मेंढक, केकड़े, छिपकलियां और दूसरे छोटे जीव भी खाती हैं। ट्री किंगफिशर की कई प्रजातियां मछली पर निर्भर नहीं होतीं।
क्या किंगफिशर हर बार मछली पकड़ने में सफल होता है?
नहीं, यह एक कुशल शिकारी है, लेकिन इसका हर शिकार सफल नहीं होता। पानी की स्थिति और मछली की गति जैसे कई कारण इसकी सफलता को प्रभावित करते हैं।
किंगफिशर अपना घोंसला कहां बनाता है?
किंगफिशर की कई प्रजातियां नदी या तालाब के किनारे मिट्टी में सुरंग बनाकर घोंसला तैयार करती हैं। हालांकि, कुछ प्रजातियां पेड़ों के खोखलों और दूसरी प्राकृतिक जगहों पर भी घोंसला बनाती हैं।
किंगफिशर छोटा जरूर है, लेकिन इसकी शिकार करने की कला, तेज नजर और रंगीन बनावट इसे दुनिया के सबसे दिलचस्प पक्षियों में शामिल करती है। अगली बार नदी या तालाब के किनारे आपको नीले-नारंगी रंग का यह पक्षी दिखाई दे, तो कुछ देर रुककर इसकी फुर्ती और शिकार करने का अंदाज जरूर देखिए।
— Satya Report



