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भालू​​​ जैसा दिखता है, लेकिन है कंगारू का रिश्तेदार! दिन में 20 घंटे सोता है यह अनोखा जीव, जानिए कोआला के 15 रोचक तथ्य

भालू​​​ जैसा दिखता है, लेकिन है कंगारू का रिश्तेदार! दिन में 20 घंटे सोता है यह अनोखा जीव, जानिए कोआला के 15 रोचक तथ्य

कोआला को आपने तस्वीरों में पेड़ों से चिपके हुए या आराम से सोते हुए जरूर देखा होगा। गोल चेहरा, बड़ी नाक और घने बालों की वजह से यह बिल्कुल छोटे भालू जैसा दिखाई देता है। यही कारण है कि इसे आमतौर पर कोआला भालू कहा जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि कोआला असल में भालू है ही नहीं? यह कंगारू की तरह एक मारसूपियल जीव है, जो अपने बच्चे को पेट पर बनी थैली में पालता है।

ऑस्ट्रेलिया में पाया जाने वाला यह अनोखा जानवर अपना ज्यादातर जीवन यूकेलिप्टस के पेड़ों पर बिताता है। इसकी नींद, भोजन और रहने का तरीका दूसरे जानवरों से काफी अलग है। आइए जानते हैं कोआला से जुड़े 15 रोचक तथ्य।

1. कोआला भालू नहीं, मारसूपियल है

कोआला को अक्सर कोआला भालू कहा जाता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह भालुओं के परिवार से संबंधित नहीं है। यह मारसूपियल प्राणी है। इस समूह में कंगारू भी शामिल हैं। मारसूपियल जीवों की खासियत यह होती है कि मादा अपने नवजात बच्चे को पेट के पास बनी थैली में रखकर उसका पालन-पोषण करती है।

2. सिर्फ ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं कोआला

कोआला मुख्य रूप से ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में पाए जाते हैं। इनमें क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स, विक्टोरिया और दक्षिण ऑस्ट्रेलिया के कुछ इलाके शामिल हैं। ये ऐसे जंगलों में रहना पसंद करते हैं, जहां यूकेलिप्टस के पेड़ बड़ी संख्या में मौजूद हों।

3. दिन में 18 से 20 घंटे तक सोते हैं

कोआला की सबसे हैरान करने वाली आदत उनकी लंबी नींद है। ये एक दिन में लगभग 18 से 20 घंटे तक सो सकते हैं। इसकी एक बड़ी वजह उनका भोजन है। यूकेलिप्टस की पत्तियों में पोषण और ऊर्जा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए कोआला अपनी ऊर्जा बचाने के लिए ज्यादा समय आराम करते हुए बिताते हैं।

4. यूकेलिप्टस की पत्तियां ही है इनका मुख्य भोजन

कोआला शाकाहारी जीव हैं और मुख्य रूप से यूकेलिप्टस की पत्तियां खाते हैं। ये पेड़ की पत्तियों को चुनकर खाते हैं और इनके शरीर का पाचन तंत्र इस खास भोजन के अनुकूल होता है। यूकेलिप्टस की पत्तियों में मौजूद कुछ रासायनिक तत्व दूसरे जानवरों के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं, लेकिन कोआला का शरीर इन्हें सीमित मात्रा में पचाने के लिए अनुकूलित है।

5. पानी भी पीते हैं कोआला

आमतौर पर माना जाता है कि कोआला कभी पानी नहीं पीते, लेकिन यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। इन्हें अपनी जरूरत का काफी पानी यूकेलिप्टस की पत्तियों से मिल जाता है। हालांकि, गर्मी और सूखे के दौरान ये पेड़ों से नीचे उतरकर सीधे पानी भी पी सकते हैं।

6. ज्यादातर समय पेड़ों पर ही बिताते हैं

कोआला का जीवन पेड़ों के आसपास ही गुजरता है। इनके मजबूत पंजे और नुकीले नाखून इन्हें पेड़ों की टहनियों को मजबूती से पकड़ने में मदद करते हैं। ये पेड़ों पर चढ़ने और लंबे समय तक टहनियों से चिपके रहने में माहिर होते हैं।

7. इंसानों जैसी होती हैं इनकी उंगलियों की छाप

कोआला की एक बेहद दिलचस्प विशेषता उनकी फिंगरप्रिंट है। इनके पंजों की उंगलियों पर मौजूद रेखाओं का पैटर्न इंसानों के फिंगरप्रिंट से काफी मिलता-जुलता होता है। यह विशेषता इन्हें दूसरे जानवरों से अलग बनाती है।

8. रात में ज्यादा सक्रिय होते हैं

कोआला ज्यादातर रात के समय सक्रिय रहते हैं। दिन में वे पेड़ों पर आराम करते हैं और रात होने पर भोजन की तलाश में एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक जाते हैं। हालांकि, उनकी गतिविधियां मौसम और आसपास के वातावरण के अनुसार बदल सकती हैं।

9. अलग-अलग इलाकों में अलग दिखते हैं

ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी हिस्सों में रहने वाले कोआला आमतौर पर आकार में बड़े और घने बालों वाले होते हैं। वहीं उत्तरी क्षेत्रों में पाए जाने वाले कोआला अपेक्षाकृत छोटे और हल्के रंग के हो सकते हैं। ठंडे इलाकों में घने बाल उन्हें तापमान से बचाने में मदद करते हैं।

10. मादा कोआला एक बच्चे को जन्म देती है

कोआला के बच्चे को जॉय कहा जाता है। जन्म के समय बच्चा बहुत छोटा और पूरी तरह विकसित नहीं होता। जन्म के बाद वह मां की थैली में पहुंच जाता है, जहां कई महीनों तक उसका विकास होता है। बाद में वह धीरे-धीरे थैली से बाहर निकलकर मां के साथ रहने लगता है।

11. जंगल में 10 से 15 साल तक जी सकते हैं

कोआला की उम्र उनके रहने के वातावरण और स्वास्थ्य पर निर्भर करती है। जंगल में ये आमतौर पर 10 से 15 साल तक जीवित रह सकते हैं। कुछ मादा कोआला इससे अधिक उम्र तक भी जी सकती हैं।

12. इनके प्राकृतिक दुश्मन भी हैं

जंगल में डिंगो, बड़े शिकारी पक्षी और अजगर जैसे जीव कोआला के लिए खतरा बन सकते हैं। खासकर छोटे कोआला इन शिकारियों के निशाने पर आ सकते हैं। हालांकि, आज इनके अस्तित्व के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में प्राकृतिक आवास का नष्ट होना और बीमारियां शामिल हैं।

13. जंगलों की कटाई से घट रहा है इनका आवास

कोआला के जीवन के लिए यूकेलिप्टस के जंगल बेहद जरूरी हैं। जंगलों की कटाई, शहरी विस्तार, सड़क निर्माण और जंगलों में लगने वाली आग की वजह से इनके रहने और भोजन की जगह लगातार प्रभावित हो रही है। इसके अलावा सड़क दुर्घटनाएं और पालतू कुत्तों के हमले भी इनके लिए खतरा हैं।

14. 1920 के दशक में बड़े पैमाने पर हुआ था शिकार

इतिहास में कोआला की खाल के लिए बड़े पैमाने पर शिकार किया गया था। खासकर 1920 के दशक में इस शिकार के कारण कई क्षेत्रों में इनकी संख्या तेजी से घट गई। इसके खिलाफ लोगों ने आवाज उठाई और बाद में इनके शिकार पर रोक लगाई गई। इसके बावजूद इनकी आबादी को पुराने स्तर पर पहुंचाना आसान नहीं रहा।

15. विलुप्त होने का खतरा झेल रहे हैं कोआला

कोआला की स्थिति को लेकर संरक्षण विशेषज्ञ चिंतित हैं। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (IUCN) की रेड लिस्ट में इन्हें Vulnerable यानी असुरक्षित श्रेणी में रखा गया है। वहीं ऑस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड, न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी में इनकी आबादी को फरवरी 2022 में Endangered घोषित किया गया था।

जलवायु परिवर्तन, जंगलों में आग, बीमारियां और प्राकृतिक आवास का नुकसान इनके अस्तित्व के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं।

कोआला से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

क्या कोआला वास्तव में भालू है?

नहीं, कोआला भालू नहीं है। यह मारसूपियल जीव है और कंगारू की तरह अपने बच्चे को थैली में पालता है।

कोआला दिन में कितने घंटे सोता है?

कोआला आमतौर पर दिन में लगभग 18 से 20 घंटे तक आराम या नींद में बिताता है।

कोआला क्या खाते हैं?

इनका मुख्य भोजन यूकेलिप्टस की पत्तियां हैं। ये पूरी तरह शाकाहारी होते हैं।

क्या कोआला पानी पीते हैं?

हां, इन्हें ज्यादातर पानी पत्तियों से मिलता है, लेकिन गर्मी और सूखे के दौरान ये सीधे पानी भी पीते हैं।

कोआला की उम्र कितनी होती है?

जंगल में कोआला आमतौर पर 10 से 15 साल तक जीवित रह सकते हैं।

कोआला अपनी अनोखी आदतों और प्यारे रूप के कारण दुनिया भर में लोकप्रिय हैं। लेकिन जंगलों के खत्म होने और बदलते पर्यावरण ने इनके अस्तित्व पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इनके प्राकृतिक आवासों को बचाना ही इस अनोखे जीव के संरक्षण की दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है।

Satya Report डिस्क्लेमर: वन्यजीवों से जुड़े आंकड़े और संरक्षण की स्थिति समय के साथ बदल सकते हैं। यहां दी गई जानकारी उपलब्ध सामान्य तथ्यों और संरक्षण संबंधी विवरणों पर आधारित है।

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