जब हम डायनासोर का नाम सुनते हैं, तो दिमाग में खूंखार जानवर की तस्वीर बनती है, जैसे नुकीले दांतों वाला टायरानोसॉरस रेक्स, लेकिन वैज्ञानिकों ने अमेरिका में एक ऐसे डायनासोर की खोज की है, जो उसी T. rex के दौर में रहता था और शायद फल खाकर जीता था. इसका नाम है इन्फर्नोगैलस जेम्साई, जिसे दुनिया ‘हेल चिकन’ यानी ‘नरक का मुर्गा’ कह रही है.

‘इन्फर्नो’ लैटिन में ‘नरक’ को कहते हैं और ‘गैलस’ का मतलब ‘मुर्गा’ होता है. यह नाम इसकी खोज की जगह से जुड़ा है. इसका जीवाश्म अमेरिका के मोंटाना राज्य की हेल क्रीक फॉर्मेशन में मिला, जो डायनासोर के जीवाश्मों के लिए दुनियाभर में मशहूर है. प्रजाति का नाम ‘जेम्साई’ जेम्स विलियम बॉयड के सम्मान में रखा गया, जो शोध से जुड़े एक वैज्ञानिक के दादा थे. उन्हीं की वजह से इस वैज्ञानिक की जीवाश्म विज्ञान में दिलचस्पी जगी थी.
2011 में मिला, 2026 में खुला राज
यह जीवाश्म जुलाई 2011 में मोंटाना में खोदा गया था. इसमें लगभग पूरी और जुड़ी हुई खोपड़ी के साथ कंकाल का एक हिस्सा मिला. छोटे डायनासोर के इतने पूरे अवशेष जीवाश्म रिकॉर्ड में बहुत दुर्लभ होते हैं. वैज्ञानिकों ने सालों तक इसका अध्ययन किया और अब इसकी रिपोर्ट प्रतिष्ठित जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में छपी है. यह रिसर्च जीवाश्म वैज्ञानिक ग्रेगरी फनस्टन की लीडरशिप में हुई. यह जीवाश्म फिलहाल कनाडा के रॉयल ओंटारियो म्यूजियम में रखा गया है.
कितना बड़ा था यह जीव?
यह डायनासोर आकार में लगभग एक बड़े टर्की जितना था. इसका वजन करीब 12 किलो, यानी एक छोटे कुत्ते के बराबर आंका गया है. यह दो पैरों पर चलता था, इसके शरीर पर पंख थे और चोंच जैसा मुंह था. दावा है कि यह बाहर से देखने पर यह किसी विशाल तोते या शुतुरमुर्ग जैसा लगता होगा. यह करीब 6.8 से 6.6 करोड़ साल पहले, यानी क्रेटेशियस काल के आखिरी दौर में रहता था. उसके कुछ ही समय बाद वह महाविनाश हुआ, जिसने डायनासोर खत्म कर दिए.
यह डायनासोर आकार में लगभग एक बड़े तुर्की की टर्की बर्ड जितना था. फोटो: AI Generated
जबड़े ने खोला फलाहार का राज
वैज्ञानिकों को सबसे ज्यादा हैरानी इसके जबड़े से हुई. इस डायनासोर के मुंह में दांत नहीं थे. टीम ने CT स्कैन से खोपड़ी की अंदर तक जांच की. यह आसान काम नहीं था, क्योंकि निचले जबड़े की हड्डियां दबकर टूटी हुई थीं और नाजुक खोपड़ी को हिस्सों में स्कैन करके जोड़ना पड़ा.
जांच में पता चला कि इसका जबड़ा आगेपीछे खिसक सकता था, ठीक तोते के जबड़े की तरह. यह बनावट ताकतवर काट के लिए नहीं, बल्कि नरम चीजों को मसलने और कुचलने के लिए सही थी. अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं के मुताबिक यह जबड़ा हड्डी तोड़ने वाले शिकारियों से बिल्कुल अलग था.
पेट में पत्थर नहीं मिले
एक और सुराग यह था कि इसके पेट वाले हिस्से में ‘गैस्ट्रोलिथ’ यानी निगले हुए छोटे पत्थर नहीं मिले. कई पौधे खाने वाले जीव सख्त पत्तियां पीसने के लिए ऐसे पत्थर निगलते हैं. इनकी गैरमौजूदगी बताती है कि यह सख्त पत्तियों पर नहीं, बल्कि नरम और गूदेदार चीजों पर निर्भर था. उस दौर में अमेरिका का पश्चिमी हिस्सा नम जंगलों से ढका था. वहां शुरुआती फूल वाले पौधे उग रहे थे और उन पर आड़ू या चेरी जैसे गूदेदार फल लगते थे. माना जा रहा है कि यही फल इसके भोजन का बड़ा हिस्सा थे.
मांसाहारियों की दुनिया में शाकाहारी
इस खोज की सबसे दिलचस्प बात इसका विकासक्रम है. इन्फर्नोगैलस और इसके रिश्तेदार ओविरैप्टोरोसॉर समूह के हैं, जो डायनासोर के मांसाहारी वंश से निकले थे. यानी जिन पूर्वजों से टायरानोसॉरस जैसे शिकारी निकले, उन्हीं के कुछ वंशज धीरेधीरे फल और पौधों की तरफ मुड़ गए. यह जीव उन्हीं ट्राइसेराटॉप्स और T. rex के बीच रहता था, फिर भी उसका रास्ता अलग था.



