Crude Oil Price: अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस पूरे हफ्ते कच्चे तेल की कीमतों में भारी उतारचढ़ाव रहा है. शुक्रवार सुबह ब्रेंट क्रूड के दाम एक बार फिर उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गए. सुबह 7 बजे के करीब ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 1.6 फीसदी की तेजी के साथ 99.86 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. वहीं, अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड भी 1.15 फीसदी बढ़कर 91.56 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया.

इससे पहले बुधवार को तेल बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली थी. तब दोनों प्रमुख तेल बेंचमार्क 8 फीसदी से ज्यादा टूटकर 31 अगस्त के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गए थे. हालांकि, ये गिरावट ज्यादा देर नहीं टिकी और गुरुवार शाम से ही कीमतों में फिर से तेजी लौटने लगी. गुरुवार को बाजार ने जोरदार वापसी की, जिससे ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 3.8 फीसदी उछलकर 98.29 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. इसी तरह अमेरिकी WTI क्रूड ने भी 2.7 फीसदी की बढ़त दर्ज की और 90.52 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बंद हुआ. गुरुवार से शुरू हुई यही तेजी शुक्रवार सुबह भी जारी रही.
अमेरिकी चुनाव से बदली कूटनीतिक हवा
तेल बाजार में शांति की ये उम्मीद अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के नतीजों के बाद जगी है. चुनाव में डेमोक्रेट्स ने अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों में अपना नियंत्रण हासिल कर लिया है. माना जा रहा है कि इस राजनीतिक बदलाव से ईरान के खिलाफ युद्ध में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मिलने वाला समर्थन सीमित हो सकता है. दूसरी तरफ, खबर ये भी है कि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर मध्यस्थों की तरफ से दिए गए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है. इन संकेतों ने बाजार को थोड़ी राहत दी है.
होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की कड़ी शर्त
कूटनीतिक उम्मीदों के बीच तेल की सप्लाई की सुरक्षा को लेकर अनिश्चितता अब भी कायम है. ईरान ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि जब तक उसके बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी नहीं हटाई जाती, तब तक वो होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोलेगा. इसके साथ ही ईरान ने अपने ऊपर लगे प्रतिबंधों में ढील देने व जब्त की गई संपत्तियों को तुरंत मुक्त करने की शर्त भी रखी है.
समंदर में जलते जहाज, रिफाइनरियों पर हमले
समंदर में व्यापारिक जहाजों के लिए खतरा लगातार बना हुआ है. यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के मुताबिक, रविवार से अब तक फारस की खाड़ी में जहाजों से जुड़ी कम से कम पांच घटनाएं सामने आ चुकी हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में बिना अनुमति वाले रास्तों का इस्तेमाल करने की कोशिश में दो तेल टैंकरों व एक टगबोट में अलगअलग घटनाओं में आग लग गई.
इस बीच, यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों ने क्षेत्रीय तनाव को काफी बढ़ा दिया है. इसे देखते हुए सऊदी अरब ने अपने लाल सागर स्थित तेल निर्यात केंद्र ‘यानबू’ के लिए संभावित खतरों को लेकर अलर्ट जारी किया है. उधर, यूक्रेन ने भी रूसी तेल रिफाइनरियों पर नए सिरे से हमले किए हैं. इससे रूस की डीजल निर्यात करने की क्षमता पर गहरा संकट खड़ा हो गया है.
फिर से 125 डॉलर तक जा सकता है क्रूड
सप्लाई के मोर्चे पर एक राहत की बात ये है कि खाड़ी देशों से कच्चे तेल का निर्यात युद्ध से पहले के स्तर के करीब पहुंच गया है. हालांकि, माल ढुलाई यानी ट्रांसपोर्टेशन का खर्च अब भी काफी ऊंचा बना हुआ है. रिसर्च फर्म यूरेशिया ग्रुप ने ईरान पर नए अमेरिकी हमलों के अपने अनुमान को 65 फीसदी से घटाकर 60 फीसदी कर दिया है. साथ ही कूटनीतिक समझौते की संभावना को 20 फीसदी से घटाकर 10 फीसदी कर दिया है. फर्म ने लंबे समय तक गतिरोध बने रहने की आशंका को 15 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया है. यूरेशिया ग्रुप ने चेतावनी दी है कि अगर ये तनाव फिर से बढ़ता है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमतें वापस 110 से 125 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में पहुंच सकती हैं.



