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कश्मीर ही नहीं राजस्थान में भी है ‘अमरनाथ’ मंदिर, भगवान परशुराम से है संबंध

 राजस्थान के पाली और राजसमंद सीमा पर स्थित परशुराम महादेव मंदिर भगवान विष्णु के छठवें अवतार परशुराम द्वारा निर्मित है. लगभग 4000 फीट ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर ‘राजस्थान का अमरनाथ’ कहलाता है.
कश्मीर ही नहीं राजस्थान में भी है ‘अमरनाथ’ मंदिर, भगवान परशुराम से है संबंध

Parshuram Mahadev Temple: भगवान परशुराम जगत के पालनहार भगवान विष्णु के छठवें अवतार हैं. भगवान परशुराम को श्री हरि विष्णु का उग्र अवतार माना जाता है. परशुराम जी बहुत क्रोधी स्वभाव के थे. उन्होंने पिता की आज्ञा पालन की खातिर अपनी मां का सिर काट दिया था. वो महादेव के परम भक्त थे. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, परशुराम ने अपने फरसे से एक बड़ी चट्टान को काटा था. उन्होंने तप करने के ऐसा किया था.

फिर उससे बनी गुफा में कोठर तप किया. बाद में, इसी का नाम परशुराम महादेव मंदिर पड़ा. इस मंदिर का निर्माण परशुराम जी ने ही किया था. ये मंदिर राजस्थान के ‘अमरनाथ’ के नाम से प्रसिद्ध है. राजस्थान के पाली और राजसमंद की सीमा पर ये मंदिर स्थित है. इसकी प्राकृतिक सुंदरता देखते ही बनती है. यह मंदिर करीब 4 हजार फीट की ऊंचाई पर है. यहां तक आने के लिए 500 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती है. ये सभी सीढ़ियां खड़ी चढ़ाई वाली है.

गुफा के अंदर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में विराजमान

घनी हरियाली के बीच गुफा के अंदर भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में हैं. शिवलिंग के ऊपर स्थित गोमुख से गंगा प्रवाहित होती है. इस गुफा का ऊपरी हिस्सा गाय के थन जैसा लगता है. इस मंदिर को मेवाड़ या राजस्थान का अमरनाथ कहा जाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस मंदिर तक आने के लिए कश्मीर के अमरनाथ मंदिर की तरह चढ़ाई करनी पड़ती है.

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इस शिव मंदिर का बड़ा महत्व

पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान परशुराम ने इस गुफा में बैठकर भगवान शिव का कठोर तप किया था. इसके बाद भगवान शिव ने उनको दर्शन देते हुए दिव्य धनुष और तीर प्रदान किया था. इस शिव मंदिर का बड़ा महत्व माना जाता है. परशुराम जयंती, महाशिवरात्रि समेत खास मौकों पर इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मान्यता है कि आज भी इस मंदिर में सच्चे मन से दर्शन के लिए जो भी आता है, उसके जीवन की सभी परेशानियां दूर हो जाती है.

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