अधिकमास में किया गया स्नान-दान जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट कर देता है. इस माह में किए गए जप, तप दस गुना फल देते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए. ऐसे में आइए जानते हैं कि अधिक मास में क्या करना सही है और क्या नहीं?

इसी अंतर को पाटने और ऋतुओं का संतुलन बनाए रखने के लिए हर तीसरे साल अधिक मास पड़ता है. अधिकमास में तीर्थ यात्रा और पवित्र नदियों में स्नान करने की पंरपरा सदियों से चली आ रही है. अधिक मास में किया गया स्नान-दान जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट कर देता है. इस माह में किए गए जप, तप दस गुना फल देते हैं, लेकिन इस दौरान कुछ खास नियमों का पालन करना चाहिए. ऐसे में आइए जानते हैं कि अधिक मास में क्या करना सही है और क्या नहीं?
- पंचांग के अनुसार, इस साल ज्येष्ठ का महीना अधिक मास होगा. इसकी शुरुआत 17 मई 2026, दिन रविवार से होगी.
- वहीं, इसका समापन 15 जून को होगा.
अधिक मास में क्या करें?
अधिक मास में पूरे महीने ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें. इस महीने विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ करें. विष्णु सहस्रनाम या पुरुष सूक्त का पाठ बेहद कल्याणकारी होता है. इस महीने में क्षमता के अनुसार अनाज, जल, वस्त्र और दीपदान करें. इस माह में कांसे के बर्तन में मालपुए रखकर दान करना शुभ होता है. पवित्र नदी में स्नान करें. अगर ये संभव न हो तो घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें. श्रीमद्भागवत कथा या गीता का पाठ कर करें या सुने.
अधिक मास में शादी, सगाई, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ संस्कार और नए घर का निर्माण शुरू न करें. नया कारोबार शुरू न करें. गाड़ी या प्लॉट खरीदने से बचें. लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन न करें. किसी का अपमान न करें. झूठ न बोलें. वाद-विवाद न करें.


