मार्च महीने में गिरावट के बाद देश के विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले दो हफ्ते से तेजी देखी जा रही है. इसके साथ ही यह चढ़कर 700 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गया है. पिछले दो हफ्ते के दौरान इसमें 12 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की तेजी आई है.
)
Satya Report: (Photo Credit: AI)
India Forex Reserve: देश के विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserves) के आंकड़े को लेकर खुशखबरी आई है. पांच हफ्तों की गिरावट के बाद फॉरेक्स रिजर्व ने 700 अरब डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया है. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की तरफ से जारी हालिया आंकड़ों के अनुसार 10 अप्रैल 2026 को खत्म हुए सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 3.825 अरब डॉलर बढ़कर 700.946 अरब डॉलर पर पहुंच गया. फॉरेक्स रिजर्व के हिसाब से मार्च का महीना काफी खराब रहा और चार हफ्ते के दौरान इसमें 40 अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट देखी गई थी. लेकिन अब अप्रैल के पिछले दो हफ्तों में स्थिति में सुधार हुआ है. दो हफ्ते दौरान इसमें 12 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा की तेजी आई है. .
मार्च महीने में देश के फॉरेक्स रिजर्व में 40 अरब डॉलर से ज्यादा की गिरावट आई थी. लेकिन अप्रैल में हालात कुछ संभले हैं. 3 अप्रैल को खत्म हुए हफ्ते में गोल्ड रिजर्व 9.063 अरब डॉलर बढ़कर 697.121 अरब डॉलर पहुंच गया था. लगातार दूसरे हफ्ते इसमें तेजी देखी गई. यह इजाफा खासतौर पर सोने के दाम में उछाल, स्पेशल ड्रॉइंग राइट्स (SDR) और इंटरनेशनल मॉनीटरी फंड (IMF) के साथ रखे रिजर्व की वजह से हुई है. आरबीआई (RBI) के अनुसार इस हफ्ते गोल्ड रिजर्व का मूल्य 601 मिलियन डॉलर बढ़कर 121.343 अरब डॉलर हो गया.
सोना देश के विदेशी मुद्रा भंडार का अहम हिस्सा
आपको बता दें भारत के पास करीब 810 टन से ज्यादा सोना है. दाम में इजाफा होने का फायदा फॉरेक्स रिजर्व में मिलता है. गोल्ड का देश के विदेशी मुद्रा भंडार में अहम हिस्सा है. अब जब गोल्ड की कीमत में तेजी देखी जा रही है तो फॉरेक्स रिजर्व में इसका फायदा मिलता है. फॉरेक्स रिजर्व में यूरो, पाउंड और येन जैसी मुद्राओं के दाम में बदलाव का भी असर शामिल है. SDR में 56 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और अब यह 18.763 अरब डॉलर है. IMF के साथ भारत की रिजर्व पोजीशन भी 41 मिलियन डॉलर बढ़कर 4.857 अरब डॉलर हो गई.
रिकॉर्ड हाई से गिरावट का कारण?
फरवरी 2026 के आखिरी हफ्ते में देश का फॉरेक्स रिजर्व 728.494 अरब डॉलर के रिकॉर्ड हाई पर पहुंच गया था. लेकिन मिडिल ईस्ट में शुरू हुए संघर्ष के बाद चार हफ्ते तक लगातार इसमें गिरावट देखी गई. इसके बाद रुपया दबाव में आया तो आरबीआई (RBI) को डॉलर बेचकर मार्केट में हस्तक्षेप करना पड़ा, इससे भी रिजर्व में गिरावट आई. दूसरी तरफ RBI की तरफ से डॉलर की बिक्री और बाजार में हस्तक्षेप से अप्रैल में रुपया स्थिर बना हुआ है. 17 अप्रैल को रुपया 28 पैसे मजबूत होकर 92.86 पर बंद हुआ. मार्च में यह गिरकर 95.24 तक चला गया था



