
Satya Report: बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस नवीन चावला और रविंदर दुदेजा की पीठ ने पाया कि पीड़ित परिसीमा अधिनियम के तहत 1,945 दिनों की देरी को माफ करने के लिए कोई पर्याप्त कारण स्थापित करने में विफल रहा।
कोर्ट ने टिप्पणी की, “देरी घोर, अस्पष्ट और लापरवाही के कारण हुई है, इसलिए आवेदन खारिज किए जाने योग्य है।” विलंब की माफी मांगने वाले उनके आवेदन की अस्वीकृति का तात्पर्य यह है कि सेंगर की सजा की मात्रा के खिलाफ अपील भी समय सीमा के कारण खारिज कर दी गई है।
कोर्ट ने पाया कि फैसले के खिलाफ अपील दायर करने की समय सीमा मई 2022 में समाप्त हो गई थी। न्यायालय ने यह भी कहा कि अपील समय सीमा समाप्त होने के बाद भी 1,199 दिनों की देरी से दायर की गई थी। न्यायालय ने पाया कि उनकी ओर से जानबूझकर निष्क्रियता और लापरवाही बरती गई थी। न्यायालय ने कहा कि उन्हें 2020 में पारित फैसले की जानकारी थी और वे इस घटना से संबंधित कार्यवाही में सक्रिय रूप से भाग ले रही थीं। कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता का आचरण उसे विलंब की माफी जैसी न्यायसंगत राहत मांगने से वंचित करता है।
न्यायालय ने कहा कि उनकी विलंबित याचिका को स्वीकार करने से विलंबित दावों की बाढ़ आ जाएगी और सेंगर के अधिकारों के साथ अन्याय होगा। कोर्ट ने कहा कि कई वर्षों की अस्पष्ट देरी के बाद दोषसिद्धि और सजा बढ़ाने की मांग वाली विलंबित अपील पर विचार करना, आरोपी के अधिकारों के साथ गंभीर रूप से अन्याय करेगा, क्योंकि इससे आरोपी को लंबे समय तक चलने वाले मुकदमे की अनिश्चितता और मुकदमे की समाप्ति के बहुत बाद भी गंभीर दंडात्मक परिणामों की संभावना का सामना करना पड़ेगा।
पीड़िता ने मुकदमेबाजी में वित्तीय बाधाओं, दिल्ली महिला आयोग द्वारा उपलब्ध कराए गए आवास से संबंधित मुद्दों, शारीरिक चोटों, धमकियों और उत्पीड़न के आरोपों के आधार पर देरी के लिए माफी मांगी थी। हालांकि, न्यायालय ने पाया कि ये आधार अस्पष्ट प्रकृति के हैं, किसी भी दस्तावेजी सामग्री द्वारा समर्थित नहीं हैं, और उस अवधि का खुलासा नहीं करते हैं जिसके दौरान ऐसी परिस्थितियां बनी रहीं। मात्र दावे, बिना प्रमाण के पर्याप्त कारण नहीं हो सकते।
कोर्ट ने वित्तीय बाधाओं के आधार को विशेष रूप से इस आधार पर खारिज कर दिया गया कि बलात्कार पीड़िता को पहले ही मुआवजे के रूप में 35 लाख रुपये मिल चुके थे।
उन्नाव बलात्कार पीड़िता, जो उस समय नाबालिग थी। उसको कथित तौर पर 11 जून से 20 जून 2017 के बीच सेंगर द्वारा अगवा कर बलात्कार किया गया था। इसके बाद उसे 60,000 रुपये में बेच दिया गया। पीड़िता को उसके बाद सेंगर के निर्देशानुसार पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार धमकाया गया और उसे चुप रहने की चेतावनी दी गई।उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता को सेंगर के कहने पर गिरफ्तार किया गया था और 9 अप्रैल, 2018 को हिरासत में उनकी मृत्यु हो गई।
इस मामले में एक और विवाद तब पैदा हो गया जब बिना नंबर प्लेट वाले एक ट्रक ने उस कार को टक्कर मार दी जिसमें पीड़िता यात्रा कर रही थी। पीड़िता और उसके वकील गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उसकी दो चाचियों की मौत हो गई।
अगस्त 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने चार मामलों की सुनवाई दिल्ली स्थानांतरित कर दी और आदेश दिया कि इसकी सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए और 45 दिनों के भीतर पूरी की जाए।
सेंगर को दिसंबर 2019 में नाबालिग पीड़िता के साथ बलात्कार और पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में दोषी ठहराया गया था। बलात्कार के मामले में उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई और हिरासत में मौत के मामले में 10 साल की जेल हुई। .
हाई कोर्ट ने जून 2024 में सेंगर की सजा को निलंबित करने की याचिका को खारिज कर दिया था। हाल ही में दिल्ली उच्च न्यायालय ने बलात्कार मामले में सेंगर को जमानत दे दी थी। हालांकि, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा अपील दायर करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने इस आदेश पर रोक लगा दी।



